हरियाणा में कांग्रेस नेता बीरेंद्र सिंह डूमरखां के बेटे और पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की सद्भाव यात्रा इन दिनों सियासी हलकों में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। जब यह यात्रा पंचकूला के कालका विधानसभा क्षेत्र में पहुंची, तो मंच से बृजेंद्र सिंह का दर्द खुलकर सामने आ गया। उन्होंने कुछ ऐसे तीखे बयान दिए, जो कांग्रेस के भीतर कई नेताओं को असहज करने वाले माने जा रहे हैं।
कालका में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ से विधायक हरदीप सिंह बावा, विधायक रामकुमार चौधरी और पूर्व विधायक बंबर ठाकुर की मौजूदगी ने माहौल को और खास बना दिया। इन्हें देखकर बृजेंद्र सिंह ने मंच से कहा कि यह कितनी विडंबना है कि पड़ोसी राज्य हिमाचल के विधायक और पूर्व विधायक यहां पहुंच रहे हैं, जबकि हरियाणा के अपने नेता नदारद हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि फिर यही लोग कहते हैं कि तीन चुनाव हार गए, ऐसे हालात रहे तो 30 चुनाव भी हार सकते हैं।
बृजेंद्र सिंह ने कहा कि जिस प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं है, वहां के नेता मेहनत कर यहां पहुंच रहे हैं, जबकि जिस हरियाणा में संगठन मजबूत करने की सबसे ज्यादा जरूरत है, वहीं के नेता घरों में बैठे हैं। उन्होंने भावुक लहजे में कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि हरियाणा में ही हर बात पर महाभारत क्यों जरूरी हो जाती है।
पूर्व सांसद ने अपनी राजनीतिक हार को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि राजनीति केवल पद पाने का नाम नहीं है। अपनी 32 वोटों से हुई हार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह धन्य महसूस करते हैं कि चुनाव हार गए। अगर जीत जाते तो अपने हलके तक ही सीमित रह जाते, लेकिन हार के बाद वह आजाद हो गए हैं और अब लंबी उड़ान भरने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अपनी उड़ान को मोर के पंखों से अलग बताते हुए कहा कि उनके साथ ऐसे साथी हैं जो उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दे रहे हैं।
पंचकूला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बृजेंद्र सिंह ने हरियाणा कांग्रेस संगठन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लंबे समय तक संगठन नहीं होने की वजह से नेताओं की आदतें खराब हो गई हैं। जहां संगठन नहीं होता, वहां नेता पदाधिकारी नहीं बल्कि सिर्फ टिकट के दावेदार बनकर रह जाते हैं। अब संगठन बन रहा है तो आदतें बदलने में समय लगेगा।
सद्भाव यात्रा की शुरुआत 5 अक्टूबर को जींद जिले के दनौंदा गांव से हुई थी और आज इस यात्रा को चार महीने पूरे हो चुके हैं। इस दौरान बृजेंद्र सिंह अब तक 47 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं। 5 फरवरी को उनकी यात्रा 48वीं विधानसभा साढौरा में प्रवेश करने जा रही है। कांग्रेस विचारधारा के तहत किसी एक राज्य में इतनी लंबी यात्रा करने वाले बृजेंद्र सिंह देश के गिने-चुने नेताओं में शामिल हो गए हैं। हरियाणा में वह करीब 3 हजार किलोमीटर की यात्रा तय कर रहे हैं, जबकि इससे पहले आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी ने इतनी लंबी पदयात्रा की थी।
हालांकि यह कांग्रेस की आधिकारिक यात्रा नहीं है, इसके बावजूद अब तक सात जिलाध्यक्ष इसमें शामिल हो चुके हैं। रणदीप सुरजेवाला, कुमारी सैलजा और पंडित कुलदीप शर्मा जैसे वरिष्ठ नेता भी अलग-अलग चरणों में इस यात्रा का हिस्सा बन चुके हैं। इसके बावजूद कई बड़े नेताओं की दूरी को लेकर पार्टी के भीतर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सद्भाव यात्रा के दौरान दिए गए कुछ बयानों ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को और उजागर कर दिया है। बीरेंद्र सिंह ने भी मंच से कहा कि कई कांग्रेसी इस भ्रम में हैं कि उन्हें इस यात्रा में आना चाहिए या नहीं। उन्होंने कहा कि जो नहीं आ रहे, वे कुछ महीने इंतजार कर लें, समय सबको सबक सिखा देगा। वहीं बृजेंद्र सिंह ने ED और CBI के डर को लेकर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों से डर समझ में आता है, लेकिन अपनी ही पार्टी के नेताओं से डरना चिंता की बात है।
कुल मिलाकर बृजेंद्र सिंह की सद्भाव यात्रा अब केवल जनसंपर्क अभियान नहीं रह गई है, बल्कि यह हरियाणा कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान और संगठनात्मक कमजोरियों को उजागर करने वाला मंच बनती जा रही है।











