Brinjal Farming : सिंचाई से पीछा छूटा तो कीड़ों ने घेरा, बारिश ले आई बैंगन किसानों के लिए ये कैसी आफत?

On: August 18, 2026 7:33 PM
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सिंचाई से पीछा छूटा तो कीड़ों ने घेरा, बारिश ले आई बैंगन के लिए ये कैसी आफत?

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Brinjal Farming Tips : बारिश ने बैंगन किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है. खेत में कीड़े लगने से दवाई का खर्च बढ़ रहा है. लोकल 18 से फरीदाबाद के किसान पप्पू बताते हैं कि मंडी में बैंगन 15-20 रुपये किलो बिक रही है, जबकि किसान को अच्छे मुनाफे के लिए 35-40 रुपये किलो भाव की उम्मीद है. इस बार मैंने बैंगन की ऐसी वैरायटी लगाई है, जो आसपास के दूसरे किसानों के खेतों में देखने को नहीं मिलती. उम्मीद थी कि नई वैरायटी से अच्छी कमाई होगी, लेकिन बरसात ने मेहनत बढ़ा दी है. पप्पू के मुताबिक, एक एकड़ में करीब 15 हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं. बीज और बाकी सामान का खर्च अलग है.

फरीदाबाद. दोपहर का समय है. जब ज्यादातर लोग गर्मी और उमस से बचने के लिए घरों में आराम कर रहे हैं, उसी समय फरीदाबाद के कुछ किसान खेतों में पसीना बहा रहे हैं. बल्लभगढ़ के ऊंचा गांव में एक किसान परिवार इन दिनों बैंगन की फसल बचाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा है. खेत में परिवार के सभी सदस्य बैंगन तोड़ने और पौधों की देखभाल करने में जुटे हैं. किसान ने बैंगन की ऐसी वैरायटी लगाई है, जो आसपास के दूसरे किसानों के खेतों में देखने को नहीं मिलती. उम्मीद थी कि इस नई वैरायटी से अच्छी कमाई होगी, लेकिन बरसात ने मेहनत बढ़ा दी है.

पीछे पड़ा गिडार रोग

लोकल 18 से किसान पप्पू बताते हैं कि पीछे से मैं सिकंदराबाद का रहने वाला हूं. बल्लभगढ़ के ऊंचा गांव में रहता हूं. पट्टे पर खेत हैं और 50 हजार रुपये एकड़ के हिसाब से खेत लिया हुआ है. करीब 3 महीना हो गया है. बैंगन की फसल अच्छी है और खेत से अच्छी खासी बैंगन टूट जाती है, लेकिन बरसात शुरू होने के बाद फसल को बचाना मुश्किल हो गया है. पप्पू बताते हैं कि बरसात में बैंगन में गिडार रोग लग रहा हैं. बारिश के मौसम से रवा जड़ जाते हैं. जब से बरसात आई है, तब से यह समस्या हो रही है. इससे पहले बैंगन बिल्कुल ठीक थी. फसल को कीड़ों से बचाने के लिए लगातार दवाई का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. अगर दवाई नहीं लगाई जाए तो बैंगन की फसल बर्बाद हो जाएगी.

पप्पू बताते हैं कि मंडी में बैंगन 15 से 20 रुपये किलो तक जा रही है. रेट अभी ठीक है, लेकिन इतना ज्यादा मुनाफा नहीं हो रहा है. जितने की बैंगन जा रही है, उतने की दवाई लग जाती है. फसल को बचाने के लिए महीने में करीब 2 हजार रुपये तक की दवाई लग जाती है. अगर मंडी में बैंगन का रेट कम से कम 35 से 40 रुपये किलो मिले, तभी अच्छा मुनाफा हो पाएगा. पप्पू के मुताबिक, खेत की जुताई और सिंचाई करने में करीब 15 हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं. बीज और बाकी सामान का खर्च अलग है. एक एकड़ में करीब आधा किलो बीज लग जाता है. अभी बारिश अच्छी होने के कारण ट्यूबवेल से सिंचाई करने की जरूरत नहीं पड़ रही है. बारिश के पानी से ही खेत की सिंचाई हो रही है.

पट्टे पर खेती करना आसान नहीं

पप्पू बताते हैं कि इसी खेती से पूरा परिवार चल रहा है. पट्टे पर खेती करना आसान नहीं है. एक तरफ खेत का किराया है, दूसरी तरफ खाद, बीज, दवाई और मजदूरी का खर्च है. इसके बावजूद उम्मीद है कि अगर बैंगन का रेट आगे अच्छा रहा तो मेहनत की भरपाई हो जाएगी. किसान परिवार अभी खेत में फसल को बचाने की पूरी कोशिश कर रहा है. पप्पू बताते हैं कि बैंगन की अच्छी पैदावार के लिए 25 से 30 डिग्री तापमान उपयुक्त माना जाता है. यह फसल अधिकतम करीब 35 डिग्री और न्यूनतम 13 डिग्री तापमान तक सहन कर सकती है. बैंगन की खेती के लिए भुरभुरी मिट्टी अच्छी मानी जाती है. खेत तैयार करने के लिए पहले मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई की जाती है. इसके बाद खेत को कुछ समय के लिए खाली छोड़कर पुरानी गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट डाली जाती है.

कैसे करते हैं खेत तैयार

खेत में खाद डालने के बाद कल्टीवेटर से दो से तीन तिरछी जुताई की जाती है, ताकि खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाए. इसके बाद खेत में पानी लगाकर पलेवा किया जाता है. कुछ दिन बाद मिट्टी ऊपर से सूखने पर रोटावेटर चलाया जाता है, जिससे मिट्टी के ढेले टूट जाते हैं और खेत की मिट्टी भुरभुरी हो जाती है. इसके बाद पाटा लगाकर खेत को समतल किया जाता है. रासायनिक खाद का इस्तेमाल करने वाले किसान आखिरी जुताई के समय जरूरत के अनुसार एनपीके का इस्तेमाल कर सकते हैं. पौध रोपाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई की जाती है. गर्मी में तीन से चार दिन के अंतराल पर सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है, जबकि सर्दियों में 10 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई की जाती है. हालांकि बारिश पर्याप्त होने पर सिंचाई की जरूरत काफी कम हो जाती है. यही वजह है कि इस समय खेत में बारिश से पानी की जरूरत तो पूरी हो रही है, लेकिन कीड़ों और फसल में लग रही बीमारी ने किसान की चिंता बढ़ा दी है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

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वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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