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Roti bank ambala news : अस्पताल में किसी अपने के भर्ती होने के बाद उसके साथ रहने वाले तीमारदार के खाने-पीने की चिंता भी एक अलग दिक्कत बनकर सामने आती है. आपने भी कभी न कभी ये समस्या झेली होगी. सभी की इतनी आर्थिक हैसियत नहीं होती कि वह बाहर का खाना रोज खरीदकर खाए. जो खरीद सकता है उसके लिए अस्पताल के पास सेहतमंद खाना पाना किसी चुनौती से कम नहीं. ऐसे लोगों की इसी परेशानी को अंबाला छावनी के नागरिक अस्पताल में चल रहा रोटी बैंक काफी हद तक दूर कर रहा है. 10 सदस्यों के साथ शुरू हुई इस सेवा से अब 300 से ज्यादा सदस्य बतौर स्वयंसेवक जुड़ चुके हैं.
अंबाला. अस्पताल में किसी अपने के भर्ती होने के बाद परिवार की सबसे बड़ी चिंता सिर्फ मरीज की दवा और इलाज नहीं होती, बल्कि उसके साथ रहने वाले तीमारदार के खाने-पीने की भी होती है. घर में बीमार सदस्य की देखभाल के कारण खाना बनाना मुश्किल हो जाता है और अस्पताल में दिन-रात रहने वाले परिजनों को मजबूरी में बाहर का खाना खाना पड़ता है. ऐसे लोगों की इसी परेशानी को अंबाला छावनी के नागरिक अस्पताल में चल रहा रोटी बैंक काफी हद तक दूर कर रहा है. यहां सेवा का केंद्र सिर्फ मरीज नहीं, बल्कि उसके साथ अस्पताल में रहने वाला तीमारदार भी हैं. 15 मार्च 2017 को महज 10 सदस्यों के साथ शुरू हुआ यह सेवा प्रोजेक्ट अब करीब 300 से ज्यादा सदस्यों तक पहुंच चुका है. पिछले नौ वर्षों से रोटी बैंक के सदस्य अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को निःशुल्क घर जैसा भोजन उपलब्ध करा रहे हैं. शुरुआत में जहां पुराने नागरिक अस्पताल में केवल एक समय का लंच दिया जाता था, अब दिन में कई बार भोजन और अतिरिक्त डाइट दी जा रही है.
इस बारे में लोकल 18 से रोटी बैंक संस्था के प्रधान अरुण खन्ना बताते हैं कि इस प्रोजेक्ट की शुरुआत मंत्री अनिल विज के आह्वान पर की गई थी. इसका उद्देश्य यही था कि अस्पताल में भर्ती मरीज और उसके साथ रहने वाले परिजन भूखे न रहें और उन्हें बाहर के अस्वास्थ्यकर भोजन पर निर्भर न होना पड़े. स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल परिसर में खाना तैयार करने के लिए कमरा उपलब्ध कराया गया, जिसके बाद इस सेवा का दायरा लगातार बढ़ता गया.
लेते हैं डाइटिशियन की सलाह
अरुण बताते हैं कि रोटी बैंक की यहां केवल दो वक्त का खाना देकर जिम्मेदारी पूरी नहीं कर देता, बल्कि मरीजों और तीमारदारों को सुबह चाय-नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना दिया जाता है. शाम को हल्दी वाला दूध और भोजन के साथ फल भी उपलब्ध कराए जाते हैं. भोजन में रोटी, सब्जी, दाल-चावल के साथ खिचड़ी और दलिया जैसे विकल्प भी शामिल रहते हैं. खाना डाइटिशियन की सलाह के मुताबिक तैयार किया जाता है, ताकि मरीजों को पौष्टिक भोजन मिल सके.
व्रत रखने वालों के लिए अलग व्यवस्था
संस्था के सदस्य अरुण कुमार बताते हैं कि वह शुरुआत से इस सेवा से जुड़े हैं. नए अस्पताल के बनने के बाद रोटी बैंक को भोजन तैयार करने के लिए अलग कमरा मिला और वितरण के लिए ट्रॉलियां भी तैयार करवाई गईं. इससे मरीजों तक खाना पहुंचाना आसान हुआ. रोटी बैंक की सेवा का एक और पहलू इसे खास बनाता है. नवरात्र और सावन माह के दौरान अस्पताल में मरीजों के साथ रहने वाले जो तीमारदार व्रत रखते हैं, उनके लिए अलग से व्रत का भोजन तैयार किया जाता है. पूरी सेवा नि:शुल्क है. कई ऐसे लोग भी हैं जो अस्पताल से ठीक होकर घर लौटने के बाद अपनी क्षमता के अनुसार रोटी बैंक में सहयोग करते हैं.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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