अंबाला. 11 साल तक संतान का इंतजार करने के बाद जब बिम्पी रेखी के घर बेटे ने जन्म लिया तो परिवार ने इसे गुरु की रहमत माना. बेटे का नाम गुर्रहमत रखा गया और कुछ साल बाद इसी नाम से समाजसेवा की संस्था भी शुरू कर दी गई. करीब छह साल पहले शुरू हुई ‘गुरु की रहमत’ संस्था अब बच्चों की शिक्षा, बेटियों की वोकेशनल ट्रेनिंग, जरूरतमंद परिवारों की मदद और महिला सशक्तिकरण जैसे काम कर रही है. इसका खर्च बिम्पी अपने चॉकलेट और सोप मेकिंग के कारोबार से होने वाली कमाई से करती हैं. उनके साथ जुड़े लोग भी अपनी तरफ से सहयोग करते हैं.
पति ने किया प्रेरित
लोकल 18 को बिम्पी रेखी बताती हैं कि शादी के करीब 11 साल बाद बेटे का जन्म हुआ था. वह इस दौरान गुरुद्वारा साहिब में अरदास करती थीं. बेटे के जन्म के बाद उन्हें लगा कि यह गुरु की रहमत है. पति कंवरदीप रेखी ने भी इसे गुरु की कृपा माना, जिसके बाद बेटे का नाम गुर्रहमत रखा गया. पति ने ही उन्हें लोगों की सेवा के लिए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. इसके बाद करीब छह साल पहले संस्था रजिस्टर कराई गई और धीरे-धीरे दूसरे लोग भी इससे जुड़ते गए. संस्था की ओर से अब तक शहरी क्षेत्र में करीब 450 बच्चों को पढ़ाया जा चुका है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 300 से 500 बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया है.
अंबाला के ऑब्जरवेशन होम में भी बिम्पी 200 से ज्यादा बच्चों को शिक्षा दे रही हैं, यहां रोजाना क्लास लगाई जाती हैं. इस कार्य को लेकर अंबाला सीडब्ल्यूसी की ओर से भी संस्था के प्रयासों की सराहना की गई है. वूमेन एंपावरमेंट जैसे कार्य को लेकर ग्लोबल वूमेन इंस्पिरेशन अवार्ड 2020 और राष्ट्रीय समाज सेवा रत्न अवार्ड 2021 भी उन्हें मिल चुका है.
बिम्पी बताती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को पढ़ाई के साथ इंग्लिश, आर्ट एंड क्राफ्ट और बेकरी से जुड़ी चीजों की जानकारी दी जाती है. बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने पर भी संस्था का फोकस है. अब तक 300 से ज्यादा ग्रामीण लड़कियों को बेकरी, क्राफ्ट और सेल्फ डिफेंस जैसी वोकेशनल ट्रेनिंग दी जा चुकी है. बिम्पी खुद जूडो में ब्राउन बेल्ट हैं, इसलिए लड़कियों को सेल्फ डिफेंस के लिए प्रेरित करती हैं. वह चाहती हैं कि बेटियां अपने हुनर के दम पर रोजगार या अपना काम शुरू करें. महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए भी गांवों में कार्यक्रम किए जाते हैं, जिसमें अंबाला की लीगल टीम सहयोग करती है.
बेटियों की कराई शादी
बिम्पी ने बताया कि संस्था ने जरूरतमंद परिवारों की 7 से 8 बेटियों की शादी में भी सहयोग किया है. इनमें कोरोना काल में अंबाला से सटे पंजाब के दड़वा गांव की एक लड़की की शादी भी शामिल है. बिम्पी के अनुसार लड़की के पिता छत से गिरने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गए थे और परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि शादी का खर्च उठा सके. ऐसे समय में संस्था की टीम वहां पहुंची और शादी में सहयोग किया, कन्यादान भी किया. संस्था का काम अंबाला के लहरसा, नगला, लोहसिंबली, सेंकती, बलाना और तेजां गांव, नया गांव तक पहुंच चुका है. इन गांवों के सरकारी स्कूलों में जरूरतमंद बच्चों को गर्म कपड़े, जर्सी, जुराब और जूते दिए गए हैं.
उनके 11 वर्षीय बेटे गुर्रहमत का कहना है कि ‘गुरु की रहमत’ संस्था का नाम उनके नाम से जुड़ी है. उन्हें अपनी मां के काम पर खुशी होती है. संस्था गरीब परिवारों और जरूरतमंद बच्चों की मदद करने के साथ उन्हें आगे बढ़ने का मौका देती है. गुर्रहमत कहते हैं कि अभी वह उम्र में छोटे हैं, लेकिन भविष्य में संस्था को और आगे ले जाना चाहते हैं. उनका सपना है कि समाजसेवा के साथ पर्यावरण के लिए भी काम किया जाए. इस तरह 11 साल के इंतजार में मिली खुशी आज कई जरूरतमंद परिवारों के लिए मदद की वजह बन रही है.












