Good News: न पंजाब में जलेगी पराली न दिल्ली में होगा प्रदूषण, उल्टा लहलहाएंगे आलू, नई खोज करेगी टेंशन खत्‍म

On: September 21, 2026 6:14 AM
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पंजाब में पराली जलाने से अब दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने का सरदर्द खत्‍म हो सकता है. ज‍िस पराली के धुएं से द‍िल्‍ली की हवा जहरीली होती है, उसे जलाए ब‍िना अब पराली में आलू उगाए जा सकेंगे, जिससे पानी की बचत और पैदावार में वृद्धि होगी. वैज्ञान‍िक डॉ. सुकांता कुमार षडंगी ने यह खोज की है.

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Good News: न पंजाब में जलेगी पराली न दिल्ली में होगा प्रदूषण, उल्टा लहलहाएंगे आलू, नई खोज करेगी टेंशन खत्‍म.

हर साल पंजाब में पराली जलाने की वजह से दिल्ली-एनसीआर में भीषण प्रदूषण होता है. पराली के धुएं के एनसीआर में आने की वजह से पूरे इलाके में जहरीले स्मॉग की चादर तन जाती है और यहां लोगों को सांस लेने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. पूरी दिल्ली प्रदूषित धुंध में कराहती रहती है, हालांकि अब इससे छुटकारा पाने का उपाय मिल गया है. नई खोज से न केवल पराली का टेंशन खत्म होगा बल्कि इसमें आलू की फसल भी लहलहाएगी.

पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए बेहद अच्छी खबर है कि वे अब पराली को आग लगाने के बजाय उसमें आलू उगा सकते हैं.बिना मिट्टी लगे पराली में उगने वाला आलू 50 प्रतिशत तक पानी की भी बचत करेगा. जबकि पैदावार 25 से 50 फीसदी तक बढ़ जाएगी.

केंद्रीय कृषिरत महिला संस्थान भुवनेश्वर की विशेषज्ञ डॉक्टर सुकांता का दावा है कि पराली में उगाया गया आलू बिना स्प्रे से भी 4 से 6 महीने खराब नहीं होता.

ऐसे में आने वाले दिनों में पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए पराली सर दर्द नहीं बल्कि फायदे का सौदा बनने जा रही है. अब किसान धान से चावल निकालने के बाद बची पराली में आलू उगा सकेंगे.

विशेषज्ञों ने बताया कि पराली वाले खेत में आलू उगाने से पानी की खपत 50 प्रतिशत तक कम हो जाती है जबकि उत्पादकता 25 से 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है. इतना ही नहीं इस तरह पराली में उगा हुआ आलू जल्द खराब भी नहीं होता.

यह खोज आईसीएआर से सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर वूमेन इन एग्रीकल्चर भुवनेश्वर के डॉक्टर सुकांता कुमार षडंगी ने की है. डॉ. सुकांता महिलाओं के लिए कृषि प्रौद्योगिकी विभाग के हेड डिवीजन में प्रिंसिपल साइंटिस्ट के तौर पर काम करती हैं. वहीं पराली के इस्तेमाल की यह जानकारी पीआईबी चंडीगढ़ की तरफ से भुवनेश्वर में प्रायोजित मीडिया एक्सचेंज कार्यक्रम के दौरान डॉक्टर सुकांता ने दी. डॉक्टर सुकांता ने बताया कि इस शोध के लिए विभिन्न राज्यों में काम किया है जिसका परिणाम सार्थक रहा है.

जहां हम पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बना सकते हैं वहीं इससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि देखने को मिल रही है. गौरतलब है कि भुवनेश्वर में स्थित केंद्रीय कृषिरत महिला संस्थान भारत का अकेला संस्थान है जो कि महिलाओं की खेती में प्रतिभागिता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है.

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प्रिया गौतमSenior Correspondent

Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …

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वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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