हरियाणा की महिला शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार की जिला कैडर अध्यापकों की कैडर चेंज पॉलिसी एक बार फिर चर्चा में है और इस बार इसके पीछे वजह है महिला शिक्षकों को वर्षों से झेलनी पड़ रही परेशानी। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 16 दिसंबर 2025 को अधिसूचित यह पॉलिसी शिक्षकों को स्वैच्छिक आधार पर जिला बदलने का अवसर देने के उद्देश्य से लागू की गई थी, लेकिन इसकी एक शर्त ने हजारों शिक्षकों, खासकर महिला अध्यापिकाओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी थीं।
पॉलिसी में यह प्रावधान किया गया था कि जिन जिलों में शिक्षकों की उपलब्धता रेशनलाइजेशन आवश्यकता के 95 प्रतिशत से कम है, वहां से किसी भी शिक्षक को दूसरे जिले में स्थानांतरण की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी शर्त के चलते यमुनानगर, पलवल, अंबाला और सिरसा जैसे जिलों में कार्यरत कई शिक्षक, विशेष रूप से 2017 बैच की महिला अध्यापिकाएं, अपने गृह जिले या घर के नजदीकी स्थान पर तैनाती से वंचित रह गई थीं।
महिला शिक्षकों का कहना था कि पारिवारिक जिम्मेदारियों, बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक परिस्थितियों के चलते उनके लिए दूर-दराज के जिलों में सेवा देना बेहद कठिन हो गया है। लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग के समक्ष मांग उठाई जा रही थी कि कैडर चेंज पॉलिसी में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए।
अब मिली जानकारी के अनुसार हरियाणा सरकार ने महिला शिक्षकों की इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए पॉलिसी में संशोधन का मन बनाया है। सरकार 95 प्रतिशत रेशनलाइजेशन वाली शर्त में ढील देने के प्रस्ताव पर काम कर रही है, ताकि महिला शिक्षकों को घर के समीप तैनाती का अवसर मिल सके।
सूत्रों के मुताबिक इस संशोधन से जुड़ा प्रस्ताव जल्द ही राज्य कैबिनेट में भेजा जाएगा। यदि कैबिनेट से मंजूरी मिल जाती है तो हजारों महिला शिक्षकों के लिए स्थानांतरण का रास्ता साफ हो जाएगा और उन्हें लंबे समय से चली आ रही परेशानी से राहत मिल सकेगी। शिक्षा विभाग के स्तर पर भी इसे एक सकारात्मक और संवेदनशील सुधार के रूप में देखा जा रहा है।











