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Haryana Electricity Crisis and Employees Strike LIVE: हरियाणा में निजी कंपनी को बिजली सप्लाई का लाइसेंस देने के विरोध में करीब 40 हजार बिजली कर्मचारी तीन दिन की हड़ताल पर हैं. जिससे राज्यभर में बिजली संकट गहरा …और पढ़ें

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिन की हड़ताल के चलते हाहाकार मच गया है.
चंडीगढ़. हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिन की हड़ताल के चलते हाहाकार मच गया है. सोनीपत में करंट लगने से दो युवकों की मौत हो गई. वहीं, फरीदाबाद और गुरुग्राम में बिजली ना आने से लोगों ने सड़क पर जाम लगा दिया. करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, सोनीपत और अंबाला समेत तमाम जिलों में ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट की वजह से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
जानकारी के अनुसार, नूंह और गुरुग्राम में निजी कंपनी को बिजली सप्लाई का लाइसेंस देने के विरोध में कर्मचारी तीन दिन की हड़ताल पर हैं. 22 से 24 अक्तूबर तक कर्मचारी हड़ताल पर हैं. बिजली मंत्री अनिल विज और सीएम नायब सैनी ने वार्ता भी की है. लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला है. हालांकि, बिजली मंत्री अनिल विज का दावा है कि हड़ताल का कोई असर नहीं हुआ है, लेकिन हकीकत कुछ और है.
बताया जा रहा है कि करीब 40,000 कर्मचारी हड़ताल पर चले गए. इसके कारण कई आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई, क्योंकि बिजली आपूर्ति में खराबी से जुड़ी शिकायतों का निपटारा नहीं हो सका. हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने राज्य के बिजली क्षेत्र के नियामक हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) द्वारा 19 अक्टूबर को एक निजी कंपनी को गुरुग्राम और नूंह जिलों में मौजूदा सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के साथ बिजली आपूर्ति करने का लाइसेंस दिए जाने के विरोध में तीन दिन की हड़ताल का आह्वान किया है.
कर्मचारी संगठनों के मंच ने बयान में कहा कि करीब 40,000 बिजली कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए हैं. इसका राज्यभर में व्यापक असर पड़ा है और बिजली आपूर्ति, जल सेवाएं, औद्योगिक उत्पादन तथा कई आवश्यक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं.
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा था कि राज्य सरकार एचईआरसी के फैसले के खिलाफ बिजली कर्मचारियों का पक्ष विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) के समक्ष रखेगी. सैनी ने कहा कि सरकार इस मामले की पैरवी के लिए बिजली कर्मचारी यूनियनों की पसंद के अधिवक्ताओं की सेवाएं लेने को तैयार है. मुख्यमंत्री ने तीन दिवसीय हड़ताल के मद्देनजर व्यवस्था का जायजा लेने के लिए प्रशासनिक सचिवों के साथ समीक्षा बैठक भी की. इस बीच, हड़ताल कर रहे कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संयुक्त मोर्चा ने कहा कि लगभग पूरा कार्यबल हड़ताल में शामिल है, जिसके कारण खराबी से प्रभावित 33 केवी और 11 केवी के कई फीडर बंद पड़े हैं.
मोर्चा के अनुसार, कई शहरी और ग्रामीण आवासीय क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है. औद्योगिक फीडर को बिजली नहीं मिलने से औद्योगिक उत्पादन भी प्रभावित हुआ है. बयान में कहा गया कि बिजली शिकायत केंद्रों, सब स्टेशन और उपमंडल, मंडल तथा सर्किल स्तर के कार्यालयों में भी कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण सन्नाटा पसरा रहा. संयुक्त किसान मोर्चा के अधिकांश घटक संगठनों के अलावा सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा और सीटू, एटक तथा इंटक सहित विभिन्न श्रमिक संगठनों ने हड़ताल का समर्थन किया और कई स्थानों पर प्रदर्शन किए.
बिजली कर्मचारी महासंघ (ईईएफआई) के उपाध्यक्ष सुभाष लांबा और अखिल भारतीय विद्युत अभियंता महासंघ (एआईपीईएफ) के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने भी समानांतर वितरण लाइसेंस का विरोध करते हुए हड़ताल कर रहे कर्मचारियों के प्रति एकजुटता जताई.
विज की कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील
संयुक्त मोर्चा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र सिंह हुड्डा ने जोर देकर कहा कि बिजली कर्मचारी और इंजीनियर वेतन या भत्ते बढ़ाने के लिए हड़ताल नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष बिजली वितरण के निजीकरण को रोकने और किसानों तथा आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए है. वहीं, हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बृहस्पतिवार को कहा कि यह हड़ताल अनावश्यक है, क्योंकि निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने का फैसला एचईआरसी ने किया है. विज ने कहा कि वह स्वयं निजीकरण के खिलाफ हैं, क्योंकि बिजली क्षेत्र में जनता का काफी पैसा और बुनियादी ढांचा लगा हुआ है तथा कर्मचारियों की नौकरियां भी दांव पर हैं. विज ने कर्मचारियों से हड़ताल का रास्ता छोड़कर काम पर लौटने की अपील की.
क्या है बिजली नियामक आयोग
एचईआरसी ने 19 अक्टूबर के अपने आदेश में बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 14 के तहत इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह के दोनों राजस्व जिलों में 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस प्रदान किया है. हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग तीन सदस्यों वाला एक वैधानिक निकाय है, जो राज्य में बिजली क्षेत्र के नियमन के लिए जिम्मेदार है. राज्य सरकार चयन समिति की सिफारिश पर आयोग के चेयरपर्सन और सदस्यों की नियुक्ति करती है.
October 23, 202609:16 IST
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October 23, 202609:06 IST
Haryana Electricity Strike LIVE: बिजली मंत्री ने कर्मचारियों से की अपील
हरियाणा के हड़ताल पर गए कर्मचारियों से अपील हड़ताल खत्म कर ड्यूटी पर आयें । सभी विकल्पों पर बातचीत करने के लिए हम तैयार हैं । इसमें इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 108 पर कार्यवाही करना भी शामिल है ।
— Anil Vij Minister Haryana, India (@anilvijminister) October 23, 2026
October 23, 202608:55 IST
Sonipat Bijli Karamchari Strike: सोनीपत में बिजली का करंट लगने से दो युवकों की मौत, पुलिस जांच में जुटी
सोनीपत के ककरोई रोड स्थित देवनगर में एक बड़ा हादसा सामने आया है, जहां वेल्डिंग का काम करते समय बिजली का करंट लगने से दो युवकों की दर्दनाक मौत हो गई. फिलहाल सिटी थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है. उत्तर प्रदेश के रहने वाले जाहिद और रिहान जो उत्तर प्रदेश के बागपत के रहने वाले थे और सोनीपत में अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए आए थे , लेकिन उन्हें नहीं पता था कि के साथ ऐसा होगा कि वह वापस ही नहीं जाएंगे.घटना देवनगर में एक दुकान के तीसरे फ्लोर पर हुई, जहां दोनों युवक वेल्डिंग का काम कर रहे थे. इसी दौरान उन्हें अचानक तेज करंट लगा, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. एक तरफ जहां बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है, वहीं इस हादसे ने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी है. फिलहाल सिटी थाना पुलिस मौके पर पहुंचकर इस पूरे हादसे की गंभीरता से जांच में जुटी हुई है. दुकानदार सतीश का कहना है कि दोनों युवक मजदूरी का काम करते थे और इनमें से एक युवक उनके पास आया था.जिसके बाद उन्होंने मजदूरी पर काम करने की बात कही थी,उन्हें कल सारा सामान दे दिया गया था और आज देवनगर में स्थित दुकान पर लोहे के पाइप भी डलवा दिए गए थे, इसके बाद वह खाना खाने की बात कह कर वापस आ रहा था और जैसे ही नीचे आया ऊपर से तेज शोर सुनाई दिया और दोनों युवक नीचे गिरे हुए थे. जिसके बाद दोनों की मौत हो गई है.
October 23, 202608:53 IST
Faridabad Strike: फरीदाबाद में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर, आम जनता परेशान
बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल का असर फरीदाबाद में भी दिखाई देने लगा है. एक तरफ बिजली कटौती के चलते आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर इंटरनेट सेवाएं और मोबाइल कॉलिंग भी प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं. बिजली संकट के चलते लोगों के रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित हो रहे हैं. घरों से लेकर दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों तक बिजली की कमी का असर देखने को मिल रहा है. हड़ताल के चलते आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं, वीआईपी सेक्टरों में बिजली आपूर्ति सुचारु रहने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि मंत्री, विधायक और अधिकारियों के आवास वाले सेक्टरों में बिजली आपूर्ति चालू है, जबकि अन्य इलाकों में लोग बिजली कटौती से जूझ रहे हैं. हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है. सबसे बड़ा सवाल: क्या हड़ताल के दौरान सभी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए समान व्यवस्था की गई है? अगर आम जनता बिजली संकट से जूझ रही है, तो जिम्मेदार विभाग की ओर से राहत के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? फिलहाल बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है और लोगों को बिजली आपूर्ति सामान्य होने का इंतजार है.
October 23, 202608:36 IST
karnal Electricity Employee Strike: करनाल के सेक्टर-12 स्थित बिजली कार्यालय के बाहर भी कर्मचारियों ने धरना
करनाल के सेक्टर-12 स्थित बिजली कार्यालय के बाहर भी कर्मचारियों ने धरना देकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. कर्मचारियों का साफ कहना है कि बिजली जैसी बुनियादी जरूरत को निजी कंपनियों के हवाले करने का फैसला किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा. 25 साल के लाइसेंस पर विवाद, निजीकरण के खिलाफ मोर्चा हड़ताल की सबसे बड़ी वजह हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग की ओर से गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण के लिए ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ को 25 साल का लाइसेंस दिए जाने का विरोध है. कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि सरकार पहले हुए समझौतों से पीछे हट रही है और बिजली विभाग का निजीकरण पिछले दरवाजे से किया जा रहा है. कर्मचारियों का कहना है कि बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने से आम उपभोक्ताओं के हित प्रभावित हो सकते हैं. सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा की करनाल जिला इकाई के प्रधान सुशील गुर्जर ने कहा कि यह लड़ाई केवल कर्मचारियों की नहीं, बल्कि आम जनता के घरों तक बिजली पहुंचाने की लड़ाई है. उन्होंने निजीकरण के संभावित परिणामों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर बिजली विभाग को निजी कंपनियों के हवाले कर दिया गया, तो यह विभाग ‘लाला जी की दुकान’ बनकर रह जाएगा. उनका तर्क है कि निजी कंपनी सबसे पहले अपना मुनाफा देखेगी और उसके बाद जनता के हितों के बारे में सोचेगी. स्मार्ट मीटरों का भी विरोध, सरकार से फैसला वापस लेने की मांग सुशील गुर्जर ने स्मार्ट मीटर लगाए जाने का भी विरोध किया. उन्होंने कहा कि तीन दिन की हड़ताल के पीछे कर्मचारियों की प्रमुख मांग बिजली विभाग के निजीकरण के फैसले को तत्काल वापस लेना है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार को पुराने समझौतों का सम्मान करते हुए बिजली निगमों को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया रोकनी चाहिए. कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा. अनिल विज पर भी सुशील गुर्जर ने साधा निशाना बिजली मंत्री अनिल विज को लेकर भी सुशील गुर्जर ने टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि अनिल विज की आत्मा तो कर्मचारियों के साथ है, लेकिन उनका शरीर उनके साथ खड़ा दिखाई नहीं दे रहा. इसी वजह से कर्मचारी उनका पुतला नहीं फूंक रहे हैं. सुशील गुर्जर ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार ने अनिल विज को मंत्री तो बना दिया, लेकिन उन्हें ‘पावरलेस मंत्री’ बनाकर रख दिया है. अब कर्मचारियों की नजर सरकार के अगले कदम पर है और बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार निजीकरण के फैसले पर पुनर्विचार करेगी या कर्मचारियों का यह आंदोलन और तेज होगा.
October 23, 202608:31 IST
Haryana Bijli Karamchari Strike: कैथल में सड़कों पर उतरे बिजली कर्मचारी
हरियाणा में निजीकरण के विरोध मे बिजली कर्मचारी तीन दिन की हड़ताल पर चले गए हैं. कैथल के बिजली कर्मचारी बुधवार सुबह से पेहवा चौंक स्थित बिजली दफ्तर मे धरने पर बैठ गए हैं. बिजली कर्मचारियों के समर्थन मे अन्य कई यूनियन भी आ गई हैं. बिजली कर्मचारी लगातार निजीकरण का विरोध कर रहे है और साथ मे पावर इलेवन पॉलिसी का भी विरोध कर रहे हैं. बिजली कर्मचारियों ने 19 अक्टूबर को प्रदर्शन कर तीन दिन की हड़ताल का पहले ही एलान कर दिया था. कर्मचारियों ने धरना स्थल से कमेटी चौंक तक सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.












