अंबाला. जिस उम्र में लोग अपने करियर और भविष्य को लेकर सबसे ज्यादा एक्टिव रहते हैं, उसी उम्र में अब कई लोगों को घुटनों के दर्द ने परेशान करना शुरू कर दिया है. पहले घुटनों का दर्द बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब कम उम्र के लोग भी इस परेशानी को लेकर ऑर्थो डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं. महिलाओं में करीब 30 साल की उम्र से और पुरुषों में 40 साल के बाद घुटनों से जुड़ी समस्या देखने को मिल रही है. डॉक्टरों के मुताबिक, इसके पीछे सबसे बड़ी वजह बदलती लाइफस्टाइल, कम शारीरिक गतिविधि और खान-पान में आया बदलाव हो सकता है. अंबाला के ऑर्थो स्पेशलिस्ट डॉ. अक्षय सेठ लोकल 18 से बताते हैं कि ओपीडी में इन दिनों घुटनों से जुड़ी शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है. कई मरीज घुटनों में दर्द के साथ पूरे शरीर में दर्द और थकान की शिकायत भी करते हैं. शाम के समय उन्हें लगता है कि दिनभर ज्यादा काम नहीं किया, फिर भी शरीर पूरी तरह थका हुआ है. डॉ. अक्षय सेठ के अनुसार कुछ साल पहले की तुलना में लोगों की दिनचर्या में बड़ा बदलाव आया है. पहले लोग रोजमर्रा के कामों के दौरान ज्यादा चलते-फिरते थे. अब ऑफिस का काम हो या घर का, ज्यादातर समय बैठकर या एक ही जगह पर बिताया जा रहा है. बाहर निकलना और शारीरिक गतिविधियां भी कम हुई हैं.
जोड़ों को मिलेगा बेहतर सपोर्ट
डॉ. अक्षय सेठ बताते हैं कि आजकल हमारी लाइफस्टाइल काफी ज्यादा बदल गई है. लोग पहले की तुलना में कम एक्टिव हैं. शरीर को एक्टिव रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि मांसपेशियां मजबूत रहेंगी तो जोड़ों को भी बेहतर सपोर्ट मिलेगा. सिर्फ यह सोचकर चलना-फिरना बंद कर देना कि ज्यादा चलने से घुटने खराब हो जाएंगे, सही नहीं है. डॉ. अक्षय सेठ के मुताबिक कम शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त धूप न मिलने जैसी वजहों से विटामिन D की कमी की समस्या भी हो सकती है. इसका असर हड्डियों की सेहत पर पड़ सकता है. हालांकि, हर व्यक्ति में घुटनों के दर्द का कारण अलग हो सकता है और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.
कर सकते हैं ये काम
डॉ. अक्षय सेठ बताते हैं कि सामान्य और सही तरीके से एक्टिव रहना शरीर के लिए फायदेमंद है. वॉकिंग, साइकिलिंग और व्यक्ति की क्षमता के अनुसार एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है. हालांकि, रोजाना कितनी देर और किस स्तर की एक्सरसाइज करनी चाहिए, यह उम्र, फिटनेस और पहले से मौजूद बीमारी के हिसाब से तय होना चाहिए. घुटनों और हड्डियों की समस्या में खान-पान की भूमिका भी महत्वपूर्ण है. आजकल कुछ लोग जरूरत से कम भोजन करते हैं तो कुछ लोग बाहर के खाने पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं. इससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते. कैल्शियम की जरूरत पूरी करने के लिए डाइट में दूध और उससे बनी चीजें, पनीर, सोयाबीन, साग, पालक और बथुआ जैसी चीजों को शामिल किया जा सकता है. नॉनवेज खाने वाले लोग मछली और अंडे को भी संतुलित डाइट का हिस्सा बना सकते हैं.
क्या कैल्शियम की दवा लेने से बन जाएगी पथरी
डॉ. अक्षय सेठ कहते हैं कि उनके पास पहुंचने वाले कई मरीज यह सवाल भी करते हैं कि कैल्शियम की दवा लेने से कहीं पथरी की समस्या तो नहीं हो जाएगी. वे कहते हैं कि अगर शरीर में कैल्शियम की कमी है और डॉक्टर ने सप्लीमेंट की सलाह दी है तो उसे केवल पथरी के डर से छोड़ना सही नहीं है, लेकिन कैल्शियम की गोली खुद से लेना भी उचित नहीं है. खासकर महिलाओं में पीरियड्स बंद होने के बाद हड्डियों की सेहत पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है. उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में डॉक्टर जरूरत के मुताबिक कैल्शियम या अन्य सप्लीमेंट की सलाह दे सकते हैं.
हर किसी की जरूरत अलग
डॉ. अक्षय सेठ के मुताबिक इंटरनेट पर बीमारी या दवा के बारे में पढ़कर खुद से कोई दवा शुरू न करें. कैल्शियम और विटामिन D की जरूरत हर व्यक्ति में अलग हो सकती है, इसलिए किसी भी सप्लीमेंट को लेने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है. घुटनों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए सबसे जरूरी है कि शरीर को एक्टिव रखा जाए, संतुलित डाइट ली जाए और मांसपेशियों को मजबूत बनाया जाए. घुटनों में लगातार दर्द, सूजन या चलने-फिरने में परेशानी हो तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए.












