तलाक के बाद पत्नी को पति की संपत्ति में कितना हिस्सा मिलता है? वकील ने बताया कानून

On: October 3, 2026 1:47 AM
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फरीदाबाद: तलाक को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या पत्नी को पति की संपत्ति में हिस्सा मिलता है, क्या तलाक के समय पति को अपनी 70 प्रतिशत संपत्ति देनी पड़ती है या पत्नी नौकरी करती हो तो उसे गुजारा भत्ता मिलेगा. सोशल मीडिया और आपसी चर्चाओं में ऐसी कई बातें सुनने को मिलती हैं, लेकिन कानून में हर मामले का फैसला परिस्थितियों के आधार पर होता है.

Local18 से बातचीत में फरीदाबाद सेक्टर-12 कोर्ट के एडवोकेट डॉ. दीपु सिंह रावत, पूर्व वाइस प्रेसिडेंट, डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन, ने इन सवालों पर स्थिति साफ की.

पति की संपत्ति में पत्नी का हिस्सा

दीपु सिंह रावत बताते हैं कि केवल पत्नी होने के आधार पर पति की संपत्ति में सीधे हिस्से का कोई सामान्य प्रावधान नहीं है. हालांकि पत्नी अपने भरण पोषण की मांग कर सकती है. अगर दोनों के बीच समझौता होता है और गुजारा भत्ता या सेटलमेंट के तहत पति संपत्ति देने पर सहमत होता है, तो ऐसी संपत्ति समझौते का हिस्सा हो सकती है.

क्या 70 प्रतिशत संपत्ति देनी पड़ती है

इस पर दीपु सिंह रावत बताते हैं कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि तलाक के समय पत्नी को पति की संपत्ति का 70 प्रतिशत हिस्सा देना ही पड़ेगा. गुजारा भत्ता या स्थायी भरण पोषण की राशि कोई तय 70 प्रतिशत फॉर्मूले के आधार पर तय नहीं होती. अदालत मामले की परिस्थितियों और दोनों पक्षों की आर्थिक स्थिति को देखकर फैसला कर सकती है.

आम आदमी को कब देना पड़ता है गुजारा भत्ता

दीपु सिंह रावत बताते हैं कि कानून में आम आदमी या अमीर आदमी के लिए अलग नियम नहीं है. कानून सभी पर लागू होता है. भरण पोषण का सवाल उठने पर अदालत संबंधित पक्षों की आय और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर फैसला करती है.

पत्नी कमाती है तो भी मिल सकता है भरण पोषण

दीपु सिंह रावत बताते हैं कि पत्नी के नौकरी करने या कमाने मात्र से उसका भरण पोषण का दावा अपने आप खत्म नहीं हो जाता. अदालत यह देख सकती है कि उसकी अपनी आय कितनी है और उसके लिए पर्याप्त है या नहीं. इसी आधार पर भरण पोषण की राशि तय की जा सकती है.

आपसी सहमति वाले तलाक में रकम कैसे तय होती है

इस पर दीपु सिंह रावत बताते हैं कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13B के तहत आपसी सहमति से तलाक में पति और पत्नी आपसी बातचीत और समझौते के जरिए भरण पोषण या सेटलमेंट की रकम तय कर सकते हैं. इसमें दोनों की सहमति महत्वपूर्ण होती है.

बच्चे की जिम्मेदारी होने पर खर्च कौन उठाएगा

इस पर दीपु सिंह रावत बताते हैं कि बच्चे की कस्टडी किसके पास है, यह भी महत्वपूर्ण होता है. अगर बच्चा मां के पास रहता है, तो मां उसकी देखभाल करती है, लेकिन बच्चे का अपने पिता से भरण पोषण पाने का अधिकार बना रहता है. बच्चे के खर्च को लेकर अदालत परिस्थितियों के अनुसार आदेश दे सकती है.

पति संपत्ति अपने नाम न रखे तो क्या होगा

इस पर दीपु सिंह रावत बताते हैं कि केवल संपत्ति अपने नाम नहीं रखने से पति की भरण पोषण की कानूनी जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती. भरण पोषण का फैसला सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि संपत्ति किसके नाम है. अदालत पति की आय, आर्थिक स्थिति और मामले की दूसरी परिस्थितियों को भी देख सकती है.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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