‘सुबह 4 बजे से लगा था…खाली हाथ लौट रहा हूं’, फरीदाबाद से बिहार जाने वालों की टूट रही उम्मीद, ट्रेन टिकट की ऐसी मारामारी

On: September 16, 2026 8:28 PM
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Public Opinion Faridabad : फरीदाबाद और बल्लभगढ़ में रहने वाले बिहार के लोगों के लिए इस बार छठ पर घर जाना मुश्किल होता दिख रहा है. रिजर्वेशन काउंटर खुलते ही कुछ मिनटों में सीटें खत्म हो रही हैं. लोग रात 2 बजे से टिकट काउंटर पर लाइन लगा रहे हैं, फिर भी कंफर्म टिकट नहीं मिल रहा. यात्रियों का कहना है कि बल्लभगढ़ से बिहार के लिए सीधी ट्रेन नहीं होने से परेशानी और बढ़ गई है. लोकल 18 से देवेंद्र मिश्रा बताते हैं कि मैं लगातार चार दिनों से आ रहा हूं, लेकिन टिकट नहीं मिल रहा. सब परेशान हैं. बड़ी मायूसी के साथ घर लौट रहा हूं. मंटून यादव बताते हैं कि बल्लभगढ़ से बिहार के लिए पहले तूफान गाड़ी चलती थी, उससे दिक्कत नहीं होती थी. अब वह बंद कर दी गई है.

फरीदाबाद. त्योहार अपनों के साथ मनाने का मजा ही कुछ और होता है. यही वजह है कि जैसे-जैसे दिवाली और छठ नजदीक आते हैं, फरीदाबाद में रहने वाले बिहार के लोगों का घर लौटने का उत्साह भी बढ़ने लगता है, लेकिन इस बार घर जाने की राह इतनी आसान नहीं है. फरीदाबाद और बल्लभगढ़ से बड़ी संख्या में लोग बिहार जाने के लिए दो महीने पहले ही ट्रेन का टिकट कराने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन रिजर्वेशन खुलने के बाद भी कुछ ही मिनटों में सीटें खत्म हो जा रही हैं. हालात ऐसे हैं कि टिकट के लिए लोग रात 2 बजे से रेलवे स्टेशन के काउंटर पर लाइन में लग रहे हैं और सुबह 8 बजे काउंटर खुलने के कुछ ही मिनट बाद कंफर्म टिकट की उम्मीद खत्म हो जाती है. लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है.

‘हर 5 मिनट में सीट छोड़ देते हैं’

लोकल 18 से बल्लभगढ़ स्टेशन पर टिकट कटाने आए देवेंद्र मिश्रा बताते हैं कि मैं लगातार चार दिनों से आ रहा हूं, पर टिकट नहीं मिला. आज भी खाली हाथ लौट रहा हूं. काउंटर पर जो टिकट काटते हैं, वह हर 5 मिनट में सीट छोड़ देते हैं. कैश लेकर, यूपीआई लेकर हम दोनों कंडीशन में यहां खड़े हैं, किसी तरीके से टिकट कट जाए. 2 महीने बाद छठ महापर्व के लिए कुछ स्पेशल ट्रेनें भी निकाली गई हैं. 4:00 बजे से लाइन में लग जाते हैं, उसके बाद भी टिकट नहीं मिल रहा है. सब परेशान हैं. बड़ी मायूसी के साथ घर लौट रहा हूं.

लखन वर्मा बताते हैं कि टिकट कंफर्म कराने आया था, लेकिन नहीं हुआ. मुझे वैष्णो देवी जाना है, वहां का टिकट भी नहीं मिल रहा है. बीरबल कुमार बताते हैं कि मुझे 11 नवंबर को बिहार जाना था, लेकिन टिकट नहीं मिला. लाइन लंबी है. लगने के बावजूद टिकट नहीं मिला. बल्लभगढ़ रेलवे स्टेशन पर रिक्शा चलाने वाले बलराम यादव बताते हैं कि बहुत ज्यादा दिक्कत है. रात दो-दो बजे से लाइन में लोग लग जाते हैं. मैं देखता रहता हूं. इसके बावजूद लोग खाली हाथ लौटते हैं.

क्यों आई लालू का याद

मंटून यादव बताते हैं कि हर साल बिहार (घर) जाता हूं, छठ पूजा में. इस बार भी जाना चाहता हूं, लेकिन टिकट नहीं मिल रहा है. मुंगेर का रहने वाला हूं. हमारे पास का स्टेशन जमुई पड़ता है या बरियारपुर. बल्लभगढ़ से कोई ट्रेन नहीं चलती है बिहार के लिए. आनंद विहार या नई दिल्ली जाना पड़ता है, जिसके लिए बहुत दिक्कत परेशानी होती है. हमारे रूट पर विक्रमशिला ट्रेन चलती है, उसमें भी मारामारी रहती है. विक्रमशिला की स्थिति खराब है. लोग लटक कर यात्रा करते हैं. बल्लभगढ़ से पहले तूफान गाड़ी चलती थी, उससे दिक्कत नहीं होती थी. अब वह बंद कर दी गई है. लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, उस समय बिल्कुल स्थिति ठीक थी. उस समय इतनी दिक्कत परेशानी नहीं होती थी.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

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वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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