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Stubble Burning Fine Ambala : पराली जलाने की घटनाओं पर रोक के लिए अंबाला कृषि विभाग ने इस बार निगरानी का तरीका बदल दिया है. अंबाला में इस बार करीब 2.1 लाख एकड़ में धान की बुवाई हुई है, जिसकी कटाई के बाद बड़ी मात्रा में फसल अवशेष निकलेंगे. ऐसे में विभाग के सामने पराली प्रबंधन की बड़ी चुनौती आने वाली है. इसके लिए पहले से तैयार शुरू कर दी गई है. लोकल 18 से अंबाला कृषि विभाग के डीडीए डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए अब तक करीब 150 गांवों में कैंप लगाए जा चुके हैं. पराली प्रबंधन करने वाले किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जाएगा. अगर कोई किसान जागरूकता के बावजूद पराली जलाता है, तो उसके खिलाफ रेड एंट्री की जाएगी. वह दो साल तक मंडी में अपनी फसल नहीं बेच पाएगा.
अंबाला. धान की कटाई शुरू होते ही खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए अंबाला कृषि विभाग ने इस बार निगरानी का तरीका बदल दिया है. अब खेतों में आग लगने की सूचना मिलने के बाद केवल कर्मचारी ही मौके पर नहीं पहुंचेंगे, बल्कि आसमान से भी नजर रखी जाएगी. सेटेलाइट से पराली जलाने की आशंका वाली लोकेशन चिह्नित होगी और इसके बाद मौके पर टीम पहुंचकर कारवाई करेगी. सरकार जल्द ही कृषि विभाग को विशेष ड्रोन उपलब्ध कराने जा रही है. अंबाला में इस बार करीब 2 लाख 10 हजार एकड़ क्षेत्र में धान की खेती की गई है. कटाई के बाद बड़ी मात्रा में फसल अवशेष निकलेंगे. ऐसे में विभाग के सामने पराली प्रबंधन और आगजनी रोकने की बड़ी चुनौती है. इसी को देखते हुए जिले के करीब 400 गांवों में विशेष टीमें गठित की गई हैं. इन टीमों में लगभग 600 कर्मचारियों को जोड़ा गया है, जो कटाई के दौरान खेतों में निगरानी रखने के साथ-साथ किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक भी करेंगे.
क्या समझाया जा रहा
लोकल 18 से अंबाला कृषि विभाग के डीडीए डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन के तहत गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. अब तक करीब 150 गांवों में कैंप लगाए जा चुके हैं. इन शिविरों में किसानों को समझाया जा रहा है कि पराली में आग लगाने से मिट्टी की उर्वरक शक्ति प्रभावित होती है और पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ता है. विभाग का प्रयास है कि किसान पराली जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन करें. डॉ. वजीर सिंह के अनुसार, विभाग ने पराली प्रबंधन को लेकर 25 स्कूलों में पेंटिंग प्रतियोगिताएं भी आयोजित करवाई हैं. जिला और ब्लॉक स्तर पर टीमें गठित कर गांव-गांव किसानों को जागरूक किया जा रहा है. विभाग का मानना है कि अभियान में ग्रामीणों और बच्चों को जोड़ने से पराली जलाने के खिलाफ बेहतर माहौल तैयार होगा. विभाग की ओर से किसानों को पराली प्रबंधन के लिए आर्थिक सहायता भी दी जा रही है.
कृषि यंत्र पर 50 प्रतिशत सब्सिडी
डॉ. वजीर सिंह कहते हैं कि पराली प्रबंधन करने वाले किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जाता है. कृषि यंत्र खरीदने पर 50 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान है. इसमें हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, जीरो टिल ड्रिल, पैडी स्ट्रॉ चॉपर और रोटरी स्लेशर जैसे यंत्रों की मदद से पराली को खेत में मिलाया जा सकता है. अंबाला में लक्ष्य से अधिक आए 1117 आवेदनों का चयन ड्रॉ के माध्यम से किया जा चुका है. डॉ. वजीर सिंह के मुताबिक, अगर कोई किसान जागरूकता के बावजूद पराली जलाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. संबंधित किसान की रेड एंट्री की जाएगी, जिसके बाद वह दो साल तक मंडी में अपनी फसल नहीं बेच पाएगा. पुलिस विभाग के माध्यम से मामला दर्ज करवाया जा सकता है और जमीन के रकबे के हिसाब से 30 हजार रुपये तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति भी लगाई जा सकती है. डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि विभाग का मुख्य जोर पराली जलाने के बजाय उसे खेत में ही मिलाने पर है, ताकि मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बनी रहे और अगली फसल के लिए जमीन बेहतर तैयार हो सके.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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