सिर पर चोट लगने के बाद ये लक्षण दिखें तो तुरंत जाएं अस्पताल, डॉक्टर ने दी चेतावनी

On: August 23, 2026 3:26 PM
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फरीदाबाद: सिर पर चोट लगने के बाद अगर कोई व्यक्ति हंस-बोल रहा है और बिल्कुल सामान्य नजर आ रहा है, तो क्या इसका मतलब है कि वह पूरी तरह सुरक्षित है. जरूरी नहीं. कई बार सिर की चोट के बाद दिमाग के अंदर ब्लीडिंग या सूजन के लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते. मरीज कुछ घंटों तक सामान्य रह सकता है, लेकिन बाद में उसकी हालत बिगड़ सकती है. ऐसे में तेज सिरदर्द, उल्टी, ज्यादा नींद या व्यवहार में बदलाव जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

चोट के बाद दिमाग में अंदरूनी ब्लीडिंग हो सकती है

Local18 से बातचीत में डॉ. गौरव कक्कड़, सीनियर कंसल्टेंट एंड लीड, न्यूरो-एनेस्थीसिया एंड न्यूरोक्रिटिकल केयर, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद बताते हैं कि चोट के बाद बिल्कुल ब्रेन में ब्लीडिंग हो सकती है. इसके लिए हमें बहुत ही जागरूकता की जरूरत है. लेकिन उससे बड़ी बात यह है कि चोट के बाद जो ब्रेन में अंदर ब्लीडिंग होती है, कई बार वह बाहर नहीं दिखती है. इसके बारे में पता होना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह बाद में जानलेवा साबित हो सकती है.

सामान्य दिखने के बाद भी सिर की चोट खतरनाक

डॉ. गौरव कक्कड़ बताते हैं कि बिल्कुल सिर की चोट इसीलिए सबसे बुरी मानी जाती है, क्योंकि दिमाग के अंदर जो चोट है, वह चोट लगने के एक-दो घंटे बाद या कई घंटे बाद मस्तिष्क में सूजन बना सकती है. इसका परिणाम यह होता है कि बाहर से सामान्य दिखने वाला व्यक्ति कुछ घंटे में पूरी तरह बेहोश हो सकता है. तब समय लगभग खत्म हो जाता है. ब्रेन या दिमाग की चोट को समय रहते ठीक करना जरूरी है. इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

सिर पर चोट के बाद ब्लीडिंग कब शुरू होती है

डॉ. गौरव कक्कड़ बताते हैं कि सिर पर लगने वाली चोटों के अंदर दो-चार प्रकार की ब्लीडिंग होती हैं. कुछ ब्लीडिंग ऐसी होती हैं, जो चोट के साथ-साथ ही अंदर लग जाती हैं. कुछ ब्लीडिंग ऐसी होती हैं, जो चोट लगने के समय शुरू होती हैं और उसके कुछ घंटे बाद बढ़ती रहती हैं. ऐसी सभी ब्लीडिंग खतरनाक होती हैं. हर तरह की सिर पर लगने वाली ब्लीडिंग को गंभीरता से लेना चाहिए. इसलिए जागरूक रहना और तुरंत अस्पताल आना जरूरी है. व्यक्ति बिल्कुल सामान्य भी दिख रहा हो, तब भी एक बड़े अस्पताल में न्यूरो डॉक्टर के पास जाकर जांच और इलाज कराना बहुत जरूरी है.

सामान्य दिखने वाला मरीज अंदर से गंभीर हो सकता

डॉ. गौरव कक्कड़ बताते हैं कि बिल्कुल सिर की चोट में ऐसा होता है कि जितने भी सामान्य लोग होते हैं, जितनी मेजोरिटी चोटें लगती हैं, ऊपर वाले की कृपा से वह सामान्य ही होती हैं. उनमें ज्यादा चोट नहीं लगती है. लेकिन कुछ 15 से 20 प्रतिशत चोटें ऐसी होती हैं, जो बहुत ही गंभीर होती हैं. उनमें से कुछ ऐसी होती हैं, जो बाहर से सामान्य दिखती हैं, लेकिन अंदर बहुत गंभीर होती हैं. ऐसा मरीज यदि डॉक्टर के पास एक बार आकर चला भी जाए, लेकिन जिसे हम रेड फ्लैग्स कहते हैं, उन्हें फॉलो न करें, तो वह अचानक से कोलैप्स भी कर सकता है. जब सिर में सूजन अचानक बढ़ जाती है, तो यह स्थिति जानलेवा बन सकती है.

सिर की चोट में खाने पीने से जुड़े भ्रम गलत

चोट लगने के बाद खान-पान को लेकर ऐसी बातें कही जाती हैं कि चावल नहीं खाना चाहिए, दही नहीं खानी चाहिए या कोई खट्टी चीज और अचार नहीं खाना चाहिए. इस पर डॉ. गौरव कक्कड़ बताते हैं मेडिकल साइंस में ऐसा कुछ भी नहीं है. खाने से चोट पर ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रभाव नहीं माना जाता है. मैं यह भी नहीं कहूंगा कि यह अंधविश्वास है, लेकिन इसका मेडिकल साइंस से कोई वैज्ञानिक ताल्लुक नहीं है. लेकिन हां, सिर की चोट वाले मरीज को कोई भी खाने या पीने की चीज नहीं देनी चाहिए, जब तक कि वह अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर से चेकअप या इलाज न करा ले. क्योंकि वह मरीज उल्टी कर सकता है या बेहोश हो सकता है. यही चीजें सांस की नली में जाकर रुकावट पैदा कर सकती हैं. सिर की चोट में डॉक्टर की सलाह बिल्कुल लेनी चाहिए, चाहे चोट बाहर से कितनी ही मामूली क्यों न लगे.

सिर की चोट से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

डॉ. गौरव कक्कड़ बताते हैं कि सिर की चोट एक ऐसी चोट है, जो काफी गंभीर बन सकती है. हमने एक स्लोगन निकाला है, सिर सलामत तो घर सलामत. सिर की चोट से बचने के लिए चार-पांच सिंपल चीजें हैं, जिन्हें लोग अपनी जिंदगी में अपनाएं. सबसे पहले यदि हम दोपहिया वाहन चलाते हैं, तो सिर पर हेलमेट जरूर लगाएं. अगर हम साइकिल चलाते हैं, तो तेज रफ्तार वाली सड़क से दूर रहें. साइकिल चलाते समय भी सिर को बचाने के लिए हेलमेट लगा सकते हैं. इसके अलावा दोपहिया या चार पहिया वाहन को सड़क के सभी नियमों के अनुसार चलाएं. रॉन्ग साइड न चलें और रेड लाइट जंप न करें.

नाबालिगों को वाहन देना गंभीर खतरा बन सकता

डॉ. गौरव कक्कड़ बताते हैं कि आजकल हम देखते हैं कि कम उम्र के बच्चों और नाबालिग बच्चों के हाथों में स्कूटर या मोटरसाइकिल दे दी जाती है. अपने आप में यह एक कानूनी अपराध है. उन बच्चों में इतनी मैच्योरिटी नहीं होती है. वे अक्सर हेलमेट नहीं पहनते और तेज रफ्तार में वाहन चलाते हैं. आए दिन हमारे पास ऐसे नाबालिग बच्चे आते हैं, जो हाई स्पीड एक्सीडेंट का शिकार होकर गंभीर सिर की चोट लेकर आते हैं.

डॉ. गौरव कक्कड़ बताते हैं कि शराब या किसी भी नशे वाले पदार्थ का इस्तेमाल करके साइकिल, दोपहिया वाहन या गाड़ी नहीं चलानी चाहिए. इसके अलावा छोटे बच्चों में यह देखा जाता है कि वे छतों, रेलिंगों या बालकनी से गिरकर सिर की चोट का शिकार हो जाते हैं. इसलिए हमेशा छोटे बच्चों का ध्यान रखें. बालकनी को बंद रखें. अगर बालकनी खुली है, तो उसमें जाली लगाएं, ताकि छोटे बच्चों के छतों या बालकनी से गिरने की घटनाओं को कम किया जा सके. सिर सलामत तो घर सलामत, इस बात को हमें अपनी जिंदगी में अमल करना चाहिए.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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