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Ambala ki local news : हरियाणा के अंबाला में एक ऐसा खेल तेजी से पैठ बना रहा है, जिसमें कभी गिने-चुने खिलाड़ी ही दिखाई देते थे. पेरिस ओलंपिक में अंबाला के स्टार शूटर सरबजोत सिंह की सफलता के बाद शहर के युवाओं में इस खेल को लेकर उत्साह बढ़ गया है. अभिभावक भी बच्चों को शूटिंग की ट्रेनिंग दिलाने के लिए अकादमियों में पहुंच रहे हैं. स्कूल के बाद बच्चे अपनी दिनचर्या में शूटिंग को भी शामिल कर रहे हैं. लोकल 18 से कोच बलबीर सिंह बताते हैं कि 10 साल की उम्र के बाद बच्चे शूटिंग की प्रैक्टिस शुरू कर सकते हैं. कोच खिलाड़ी की क्षमता, एकाग्रता और रुचि को देखते हुए उसे आगे बढ़ाते हैं. अरिहंत एक साल से शूटिंग की प्रैक्टिस कर रहे हैं. वे कहते हैं कि उनका सपना ओलंपिक में मेडल जीतना है.
अंबाला. हरियाणा को कुश्ती के लिए जाना जाता है. यहां के खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. अब अंबाला में एक ऐसा खेल युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसमें कभी गिने-चुने खिलाड़ी ही नजर आते थे. यह खेल है शूटिंग. पेरिस ओलंपिक में अंबाला के स्टार शूटर सरबजोत सिंह की शानदार सफलता के बाद शहर के युवाओं में इस खेल को लेकर उत्साह और बढ़ गया है. अंबाला की अलग-अलग शूटिंग अकादमियों में बड़ी संख्या में बच्चे और युवा नियमित रूप से ट्रेनिंग ले रहे हैं. उनका लक्ष्य आने वाले समय में नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर देश का नाम रोशन करना है.
4-4 घंटे तक अभ्यास
अंबाला के सरबजोत सिंह ने शूटिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाकर शहर के युवाओं को नई प्रेरणा दी है. ओलंपिक स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ी को अपने बीच से निकलता देखकर अब कई बच्चों का रुझान इस खेल की तरफ बढ़ा है. अभिभावक भी बच्चों को शूटिंग की ट्रेनिंग दिलाने के लिए अकादमियों तक लेकर पहुंच रहे हैं. अंबाला में कई स्थानों पर शूटिंग अकादमियां संचालित हो रही हैं, जहां सुबह और शाम के समय युवा खिलाड़ी अभ्यास करते दिखाई देते हैं. स्कूल की पढ़ाई के बाद बच्चे अपनी दिनचर्या में शूटिंग को भी शामिल कर रहे हैं. कई खिलाड़ी रोजाना 2 से 4 घंटे तक अभ्यास कर रहे हैं. सरबजोत सिंह के कोच अभिषेक राणा भी अंबाला में अपनी अकादमियों के माध्यम से युवाओं को शूटिंग से जोड़ने का काम कर रहे हैं. उनका उद्देश्य केवल खिलाड़ियों को मेडल के लिए तैयार करना ही नहीं, बल्कि युवाओं को अनुशासन और सही दिशा देना भी है.
कहां-कहां मौके
लोकल 18 से अभिषेक राणा के कोच रहे बलबीर सिंह बताते हैं कि शूटिंग सीखने के लिए आने वाले हर बच्चे को सबसे पहले समझना जरूरी होता है कि वह इस खेल के लिए कितना तैयार है. उनके अनुसार किसी भी खेल में अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण है और जो खिलाड़ी अपने कोच की बात को गंभीरता से मानकर लगातार अभ्यास करता है, वही आगे चलकर बेहतर प्रदर्शन कर पाता है. बलबीर सिंह के मुताबिक करीब 10 साल की उम्र के बाद बच्चे शूटिंग की प्रैक्टिस शुरू कर सकते हैं. शुरुआत में कोच खिलाड़ी की क्षमता, एकाग्रता और रुचि को देखते हुए उसे आगे बढ़ाते हैं. लगातार अभ्यास के जरिए खिलाड़ी प्रतियोगिताओं के लिए तैयार होते हैं. बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के लिए नेशनल और इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं तक पहुंचने के मौके बनते हैं. इसके अलावा स्पोर्ट्स कोटे के जरिए सेना, नौसेना और पैरामिलिट्री सहित विभिन्न क्षेत्रों में करियर के अवसर भी मिल सकते हैं.
10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड
अरिहंत पिछले करीब एक साल से शूटिंग की प्रैक्टिस कर रहे हैं. उनका कहना है कि वह स्कूल से आने के बाद पढ़ाई के साथ रोजाना 2 से 3 घंटे शूटिंग का अभ्यास करते हैं. उनका सपना है कि जिस तरह अंबाला के खिलाड़ी ओलंपिक और नेशनल स्तर पर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन कर रहे हैं, उसी तरह वह भी भविष्य में देश के लिए पदक जीतें. राजेंद्र सिंह पिछले तीन साल से अभिषेक राणा से 10 मीटर एयर पिस्टल की ट्रेनिंग ले रहे हैं. हाल ही में उन्होंने सीबीएसई नॉर्थ जोन में 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड मेडल हासिल किया है. अब उनका लक्ष्य नेशनल स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करना है. राजेंद्र रोजाना करीब 3 से 4 घंटे अभ्यास करते हैं.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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