NEET Topper Success Story, NEET UG 2026: कई बार जिंदगी का एक दर्द ही इंसान के सपनों की सबसे बड़ी वजह बन जाता है. पंजाब के आर्यन गुप्ता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है.जब वह सिर्फ तीसरी कक्षा में पढ़ते थे तब उनकी दादी का कैंसर की वजह से निधन हो गया था.उस छोटी उम्र में शायद उन्हें बीमारी की पूरी गंभीरता समझ नहीं आई होगी लेकिन दादी को खोने का दर्द उनके मन में हमेशा के लिए बस गया.उसी दिन उन्होंने मन ही मन एक संकल्प लिया था-एक दिन डॉक्टर बनेंगे और कैंसर के मरीजों का इलाज करेंगे. वर्षों बाद वही सपना उन्हें देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक NEET UG 2026 में ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR-1)तक ले आया.
दादी की याद बनी सबसे बड़ी प्रेरणा
आर्यन बताते हैं कि जब उनकी दादी कैंसर से जूझ रही थीं तब उन्होंने बहुत करीब से परिवार का दर्द देखा था. दादी की मौत के बाद उन्होंने तय कर लिया था कि वह बड़े होकर ऐसे मरीजों की मदद करेंगे जो इस गंभीर बीमारी से लड़ रहे हैं.यही वजह है कि आज भी उनका सपना सिर्फ डॉक्टर बनना नहीं है बल्कि ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ)बनकर कैंसर मरीजों की सेवा करना है.आर्यन कहते हैं कि जब मैं तीसरी क्लास में था, तब मेरी दादी का कैंसर से निधन हो गया था. उसी समय मैंने तय कर लिया था कि डॉक्टर बनूंगा और कैंसर के मरीजों का इलाज करूंगा.
NEET में हासिल किए 720 में से 715 अंक
री-नीट यूजी 2026 के नतीजे घोषित होने के बाद पंजाब के लुधियाना निवासी आर्यन गुप्ता पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए. उन्होंने परीक्षा में 720 में से 715 अंक हासिल किए और AIR-1 प्राप्त की.आर्यन के साथ हरियाणा के पंकज बंसल भी संयुक्त रूप से टॉपर रहे लेकिन आर्यन की सफलता के पीछे छिपी भावनात्मक कहानी लाखों छात्रों को प्रेरित कर रही है.
रिजल्ट आया तो घर में छा गई खुशी
रिजल्ट घोषित होते ही आर्यन के घर में जश्न का माहौल बन गया. परिवार, रिश्तेदार, दोस्त और शुभचिंतक लगातार उन्हें बधाई देने पहुंचे.आर्यन कहते हैं कि AIR-1 हासिल करना किसी सपने के सच होने जैसा है. उन्हें अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि उन्होंने देशभर में पहला स्थान हासिल किया है. उनके अनुसार अब यह सब किसी सपने जैसा लगता है.पूरा परिवार बहुत खुश है. जिंदगी में अभी बहुत कुछ करना है, लेकिन इस सफलता से बेहद अच्छा महसूस हो रहा है.
16-17 घंटे पढ़ाई, कई बार पूरी नहीं हो पाती थी नींद
NEET जैसी परीक्षा में टॉप करना आसान नहीं होता. इसके लिए आर्यन ने दिन-रात एक कर दिया था.
उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान वह रोजाना 16 से 17 घंटे तक पढ़ाई करते थे.कई बार इतना अधिक दबाव होता था कि उन्हें ठीक से नींद भी नहीं आती थी हालांकि लगातार मेहनत के बावजूद उन्होंने अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा. वह हर रात लगभग 7 घंटे की नींद लेते थे और दिन में करीब एक घंटे की झपकी भी लेते थे, ताकि पढ़ाई के दौरान दिमाग तरोताजा बना रहे.उनका मानना है कि केवल लंबे समय तक पढ़ना ही सफलता की गारंटी नहीं है, बल्कि शरीर और दिमाग दोनों का स्वस्थ रहना भी जरूरी है.
डॉक्टरों के परिवार में हुआ पालन-पोषण
आर्यन का परिवार पूरी तरह मेडिकल क्षेत्र से जुड़ा हुआ है. उनके पिता डॉ. विश्वविद्ध सिन्हा और मां गायत्री देवी दोनों डॉक्टर हैं.इतना ही नहीं, उनके नाना-नानी, चाचा-चाची और बुआ-फूफा भी चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं. ऐसे माहौल में पले-बढ़े आर्यन को बचपन से ही डॉक्टर बनने की प्रेरणा मिलती रही.
बड़े भाई भी रह चुके हैं NEET टॉपर
आर्यन की सफलता में उनके बड़े भाई का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उनके भाई ने NEET UG 2025 में AIR 54 हासिल की थी.आर्यन कहते हैं कि उन्होंने तैयारी के दौरान हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया. पढ़ाई की रणनीति बनाना, कमजोरियों को पहचानना और सही दिशा में मेहनत करना इन सभी बातों में भाई ने उनकी मदद की.वह अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने भाई को देते हैं.
11वीं कक्षा से शुरू कर दी थी गंभीर तैयारी
हालांकि आर्यन शुरू से ही पढ़ाई में अच्छे थे और स्कूल के दिनों में कई ओलंपियाड प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते रहे,लेकिन NEET की गंभीर तैयारी उन्होंने 11वीं कक्षा से शुरू की थी.उन्होंने अपने बेसिक कॉन्सेप्ट्स मजबूत किए.लगातार प्रैक्टिस की और नियमित टेस्ट दिए। इसी अनुशासन ने उन्हें धीरे-धीरे टॉप रैंक तक पहुंचा दिया.
पेपर लीक के बाद टूट गए थे आर्यन
NEET UG 2026 की यात्रा आर्यन के लिए आसान नहीं रही. 3 मई 2026 को आयोजित पहली परीक्षा पेपर लीक विवाद के कारण रद्द कर दी गई थी.जब उन्हें यह खबर मिली तो वह बुरी तरह टूट गए.उन्होंने बताया कि वह लगातार दो दिनों तक रोते रहे क्योंकि उन्हें लगा कि उनकी महीनों की मेहनत बेकार चली गई लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने खुद को संभाला.उन्हें एहसास हुआ कि यह परेशानी केवल उनके साथ नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के साथ हुई है.इसके बाद उन्होंने दोबारा पूरी ताकत के साथ तैयारी शुरू की और री-एग्जाम में शानदार प्रदर्शन किया.
पहली परीक्षा में 5 सवाल गलत हुए थे
आर्यन ने खुलासा किया कि पहली परीक्षा में उनके 5 प्रश्न गलत हो गए थे.अगर वही परीक्षा अंतिम मानी जाती, तो शायद वह देश के टॉपर नहीं बन पाते लेकिन पेपर रद्द होने के बाद उन्हें दूसरी बार मौका मिला और उन्होंने उसका पूरा फायदा उठाया.री-एग्जाम में उन्होंने 715 अंक हासिल किए और सीधे AIR-1 तक पहुंच गए.












