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Who is indias first loco pilot hydrogen train : प्रधानमंत्री मोदी ने आज हरियाणा में हाइड्रोजन से चलने वाली देश की पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. फिलहाल अभी यह ट्रेन जींद-सोनीपत रूट पर ही चलेगी. जींद के राजेश कुमार देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट बन गए हैं. इससे पहले वे इसी रूट पर पैसेंजर ट्रेन को चला रहे थे. राजेश के पिता भी रेलवे में थे. राजेश जींद-गोहाना-सोनीपत रूट पर ट्रेन संचालन में सबसे अनुभवी हैं.
राजेश कुमार के साथ सेल्फी लेने वालों की होड़ मच गई.
सोनीपत. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (17 जुलाई) हरियाणा में हाइड्रोजन से चलने वाली देश की पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई. यह ट्रेन न तो डीजल से चलती है और न ही बिजली से. इस ट्रेन में 10 कोच हैं. करीब 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं. फिलहाल यह हाइड्रोजन ट्रेन जींद-सोनीपत रूट पर 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी. इस ट्रेन ने तो इतिहास रचा ही, एक शख्स भी सुर्खियों में आ गया. उनका नाम है राजेश कुमार, जो देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट बन गए हैं. राजेश कुमार आगे भी जींद-गोहाना-सोनीपत के बीच चलने वाली देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की कमान संभालेंगे. इससे पहले वे इसी रूट पर पैसेंजर ट्रेन को चला रहे थे.
‘मेरा दिन बन गया’
लोको पायलट राजेश मूलत: यूपी के रहने वाले हैं, लेकिन पिछले 65 साल से उनका परिवार जींद में रह रहा है. राजेश के पिता भी रेलवे में थे. अपने पिता की प्रेरणा से ही राजेश लोको पायलट बने. राजेश जींद-गोहाना-सोनीपत रूट पर ट्रेन संचालन में सबसे अनुभवी हैं. इसी वजह से रेलवे ने उन्हें देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चलाने के लिए चुना. इसके लिए उन्हें चेन्नई में 15 दिन की ट्रेनिंग दिलाई गई. ट्रेनिंग के बाद ट्रायल में भी राजेश ही ट्रेन चला रहे थे.
राजेश के मुताबिक, हाइड्रोजन ट्रेन का इंजन ज्यादा पावरफुल है. पिकअप भी ज्यादा है. राजेश कहते हैं कि इसे चलाना सामान्य इंजन वाली ट्रेन से आसान है. प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी बातचीत के बारे में राजेश कहते हैं कि आज मेरा दिन बन गया. ट्रेन तो मैं रोज चलाता हूं, लेकिन जीवन पहली बार देश के प्रधानमंत्री ने उनसे बात की.
हाइड्रोजन ट्रेन में सफर कर आए यात्रियों में खासा उत्साह देखने को मिला. यात्रियों का कहना है कि ट्रेन का सफर बेहद सुगम, आरामदायक और आधुनिक सुविधाओं से भरपूर रहा. महिला यात्री रेणु ने कहा कि इस हाइड्रोजन ट्रेन को दिल्ली तक चलाना चाहिए. इससे बड़ी संख्या में दैनिक यात्रियों को इसका लाभ मिल सके. क्योंकि सोनीपत में जब यह पहुंची है तो इससे आगे के लिए कोई ट्रेन नहीं थी. हालांकि, अभी इस ट्रेन के रूट की टाइमिंग नहीं बनाई गई है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें












