हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव गढ़ मिरकपुर की करीब 157 एकड़ पंचायत भूमि से जुड़े बहुचर्चित मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना, नियमों को दरकिनार कर कराई गई बेदखली और पंचायत भूमि की अवैध नीलामी का खुलासा होने के बाद उपायुक्त सोनीपत सुशील सरवन ने ग्राम पंचायत गढ़ मिरकपुर के सरपंच को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही तत्कालीन बीडीपीओ और ग्राम सचिव के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं।
यह कार्रवाई पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियों, अंतरिम आदेशों और बीडीपीओ मुरथल द्वारा प्रस्तुत की गई तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले को अदालत की अवमानना की श्रेणी में मानते हुए विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं, जिससे प्रशासनिक और पंचायती राज विभाग में हड़कंप मच गया है।
मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 2018 से जुड़ी है, जब पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 4 दिसंबर 2018 को गांव गढ़ मिरकपुर की विवादित पंचायत भूमि को लेकर यथास्थिति बनाए रखने के स्पष्ट आदेश पारित किए थे। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि विवाद के अंतिम निपटारे तक भूमि की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा और न ही किसी प्रकार की बेदखली या नीलामी की जाएगी।
इसके बावजूद जांच रिपोर्ट और हाईकोर्ट के अवलोकन में यह सामने आया कि 13 मई 2025 को पंचायत भूमि पर बेदखली की कार्रवाई कराई गई। यह कार्रवाई तत्कालीन बीडीपीओ मुरथल अंकुर कुमार, ग्राम सचिव दिनेश मलिक और ग्राम पंचायत गढ़ मिरकपुर के सरपंच पवन कुमार की भूमिका में की गई, जिसे अदालत के आदेशों का सीधा उल्लंघन माना गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि 17 जून 2025 को पंचायत भूमि की 100 एकड़ से अधिक भूमि की नीलामी कर दी गई। नियमों के अनुसार इतनी बड़ी पंचायत भूमि की नीलामी के लिए सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में बिना किसी स्वीकृति के ही नीलामी प्रक्रिया पूरी कर दी गई। इससे न केवल पंचायती राज नियमों की अनदेखी उजागर हुई, बल्कि पूरे प्रकरण की गंभीरता और बढ़ गई।
नीलामी के बाद सामने आया कि नीलाम की गई भूमि में से करीब 55 एकड़ पंचायत भूमि को विभागीय नियमों के विपरीत मैसर्स एस4वी हाइड्रोपोनिक ग्रीन एलएलपी नामक एक निजी कंपनी को सब-लीज पर दे दिया गया। जांच एजेंसियों ने इसे पंचायत संपत्ति के दुरुपयोग की श्रेणी में माना है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि ग्राम पंचायत गढ़ मिरकपुर के सरपंच पवन कुमार स्वयं इस मामले में RSA नंबर 6430 वर्ष 2018 में प्रतिवादी थे और उन्हें अदालत के यथास्थिति बनाए रखने संबंधी आदेश की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद न तो उन्होंने न्यायालय के आदेशों का पालन किया और न ही संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी, जिसके चलते बेदखली और नीलामी की कार्रवाई को अंजाम दिया जा सका।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि पंचायत भूमि को 16 प्लॉटों में विभाजित कर नीलामी की गई थी। इनमें से आठ प्लॉट मुकेश पुत्र रामकुमार, तीन प्लॉट मुकेश पुत्र तेज सिंह, चार प्लॉट प्रमोद पुत्र नफे सिंह और एक प्लॉट नवीन पुत्र सतबीर के नाम पर लीज पर दिए गए। एक ही नाम या समान नामों पर कई प्लॉट आवंटित होने से नीलामी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अधिकारियों और सरपंच के इस पूरे रवैये को “कंटेम्प्चुअस एटीट्यूड” करार देते हुए अदालत की अवमानना माना है। अदालत ने टिप्पणी की है कि न्यायिक आदेशों की इस तरह अवहेलना लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा है। इसी आधार पर विजिलेंस जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
हाईकोर्ट के आदेशों और जांच रिपोर्ट के आधार पर डीसी सोनीपत सुशील सरवन ने हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 51(1)(b) और 51(3)(e) के तहत सरपंच पवन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही तत्कालीन बीडीपीओ मुरथल अंकुर कुमार, जो वर्तमान में बीडीपीओ सोनीपत के पद पर तैनात हैं, के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए सरकार को संस्तुति भेजी गई है, जबकि ग्राम सचिव दिनेश मलिक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश सीईओ जिला परिषद सोनीपत को दिए गए हैं।
सरपंच के निलंबन की अवधि के दौरान ग्राम पंचायत गढ़ मिरकपुर की चल और अचल संपत्ति का प्रभार पंचायत के बहुमत वाले पंच को सौंपने के आदेश दिए गए हैं, ताकि पंचायत संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।
डीसी द्वारा जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई जनहित, पंचायत भूमि की सुरक्षा और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों के सख्त अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। विजिलेंस जांच की रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में और भी कड़ी कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया गया है।











