Taiwanese Pink Guava | Guava Farming Tips | Farming Tips | अमरूद के 300 पेड़ों पर महिला क्यों बांध रही है पन्नी? वजह जानकर आप भी चौंक जाएंगे

On: September 10, 2026 8:27 PM
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अमरूद के 300 पेड़ों पर महिला क्यों बांध रही है पन्नी? वजह जानकर चौंक जाएंगे

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फरीदाबाद के फतेहपुर बिल्लौच गांव की महिला किसान सुशीला ताइवानी पिंक अमरूद की खेती से अच्छी कमाई कर रही हैं. एक एकड़ में करीब 300 पेड़ लगाए हैं. मंडी में अमरूद का भाव 50 से 60 रुपये किलो तक मिल रहा है. बरसात में कीड़ों से फसल बचाने के लिए फलों पर पन्नी बांधती हैं और पेड़ों की समय-समय पर छंटाई करती हैं.

कहते हैं कि मेहनत का फल मीठा होता है, फरीदाबाद के फतेहपुर बिल्लौच गांव में अमरूद की खेती इसका अच्छा उदाहरण है. यहां एक एकड़ जमीन में करीब 300 पेड़ लगाए गए हैं. खेत में ताइवानी पिंक वैरायटी के अमरूद तैयार हो रहे हैं. इस समय बाजार में फल का भाव भी अच्छा चल रहा है. खेती आसान नहीं है, किसान तेज धूप में भी खेत संभालते हैं. पेड़ों की छंटाई, सिंचाई और फलों की देखभाल लगातार करनी पड़ती है.

Local18 से बातचीत में महिला किसान सुशीला बताती हैं कि मैंने खेत में ताइवानी पिंक वैरायटी लगा रखी है. मैं पेड़ों की समय-समय पर छंटाई करती हूं. टहनियों की कटाई करने से पेड़ पर फल ज्यादा आते हैं और पैदावार भी बढ़िया होती है. अभी मंडी में अमरूद का रेट करीब 50 से 60 रुपये किलो तक चला जाता है. अगर इसी तरह भाव बना रहे तो मुझे इस फसल से अच्छी आमदनी हो जाती है.

महिला किसान सुशीला बताती हैं कि बरसात आते ही अमरूद के फलों में कीड़े लगने की परेशानी बढ़ जाती है. ऐसे समय में मैं पेड़ों पर लगे अमरूद को ध्यान से देखती हूं. अगर किसी फल पर कीड़े का खतरा नजर आता है तो उसे बचाने का इंतजाम करती हूं. बारिश के दिनों में खेत पर ज्यादा समय देना पड़ता है. थोड़ी सी लापरवाही से तैयार फल खराब हो सकता है, इसलिए मैं लगातार निगरानी करती हूं.

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सुशीला बताती हैं कि फलों को कीड़ों से बचाने के लिए मैं अमरूद पर पन्नी बांधती हूं. पेड़ पर लगे फल को ढकने से उसे कीड़ों से बचाने में मदद मिलती है. इस काम में काफी समय लगता है, क्योंकि हर फल पर अलग से ध्यान देना पड़ता है. बरसात में यह तरीका अपनाने से फसल को नुकसान से बचाने की कोशिश करती हूं. तैयार फल सुरक्षित रहे तो मेहनत भी बेकार नहीं जाती.

महिला किसान सुशीला बताती हैं कि अमरूद के पेड़ों में छंटाई का काम समय पर करना जरूरी है. मैं सूखी और जरूरत से ज्यादा बढ़ी टहनियों को हटाती हूं. इससे पेड़ पर फल आने के लिए अच्छी जगह बनती है और पैदावार भी ठीक रहती है. खेती में हर काम का अपना समय होता है. पेड़ को यूं ही छोड़ देने से काम नहीं चलता, इसलिए मैं मौसम और पौधे की जरूरत देखकर उसकी देखभाल करती हूं.

सुशीला बताती हैं कि अमरूद की खेती में मेहनत खूब करनी पड़ती है. मैं दोपहर के समय भी खेत में रहती हूं और पेड़ों की हालत देखती हूं. कभी टहनियों की छंटाई करनी होती है तो कभी फलों को सुरक्षित रखने का काम करना पड़ता है. मौसम बदलने पर परेशानी भी बदल जाती है. खेत में नियमित समय देने से पौधों की जरूरत समझ आती है और फसल पर भी नजर बनी रहती है.

सुशीला बताती हैं कि अमरूद का मंडी भाव अभी 50 से 60 रुपये किलो तक पहुंच रहा है. मैं ताइवानी पिंक वैरायटी उगा रही हूं, महीने की अच्छी कमाई हो जाती है. बाजार में सही दाम मिलने पर किसान की कमाई अच्छी हो सकती है. हालांकि इसकी खेती में खर्च के साथ मेहनत भी जुड़ी रहती है. इसलिए मैं फल तैयार होने के बाद उसकी सुरक्षा पर भी ध्यान देती हूं, ताकि जितना संभव हो नुकसान से बचा जा सके.

सुशीला बताती हैं कि अमरूद की खेती में सिर्फ अच्छी पैदावार लेना ही जरूरी नहीं, बल्कि तैयार फल को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है. मैं पेड़ों की छंटाई से लेकर फलों को ढकने तक खुद काम करती हूं. बरसात में कीड़ों की परेशानी रहती है, इसलिए पन्नी का इस्तेमाल करती हूं. जब मंडी में 50 से 60 रुपये किलो तक भाव मिले और फल खराब न हों तो कमाई अच्छी हो जाती है.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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