Haryana News: हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग द्वारा निजी कंपनी को समानांतर बिजली लाइसेंस देने संबंधी निर्णय का राज्य सरकार ने पहले दिन से ही विरोध किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने इस संबंध में किसी निजी कंपनी से आवेदन आमंत्रित नहीं किए थे। हालांकि, विद्युत अधिनियम, 2003 में ऐसा प्रावधान है, जिसके तहत संबंधित कोई भी व्यक्ति आयोग के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
विज आज यहां बिजली प्रतिनिधियों की बैठक के उपरांत मीडिया कर्मियों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस दिन से यह मामला सामने आया, उसी दिन से बिजली कर्मचारी संगठनों ने इसका विरोध किया और राज्य सरकार ने भी अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखा। उन्होंने विधानसभा में भी विस्तार से सरकार का रुख रखा था और अन्य राजनीतिक दलों से भी अपील की थी कि यदि वे इस मुद्दे पर सहमत हैं, तो आयोग के समक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं।
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ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सरकार ने शुरुआत से ही इस निर्णय को चुनौती देने और इसके विरुद्ध कानूनी विकल्प अपनाने का रुख अपनाया है। आज बिजली कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत में सहमति बनी कि विद्युत अधिनियम की धारा 108 के तहत राज्य सरकार आयोग को आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है। इसी के अनुरूप अधिकारियों को कार्रवाई तत्काल करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, अधिनियम की धारा 94 के तहत हम इसकी रिव्यू पिटीशन भी फाइल करने वाले हैं और इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं।
बिजली कर्मचारी यूनियनों के साथ खड़ी है- अनिल विज
उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर बिजली कर्मचारी यूनियनों के साथ खड़ी है। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने इसी भावना के तहत हड़ताल वापस लेने और तत्काल प्रभाव से बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए कर्मचारियों को काम पर लौटने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार और कर्मचारी यूनियनों के बीच आज सौहार्दपूर्ण वातावरण में सकारात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की शेष मांगों पर भी बातचीत जारी रहेगी और इस संबंध में आगामी 3 नवंबर को एक बैठक चंडीगढ़ में निर्धारित की गई है।










