पानीपत में स्थित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की रिफाइनरी में बुधवार को एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई। रिफाइनरी में काम करने वाले मजदूरों ने सुबह सड़क जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर समझाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ उग्र हो गई और पथराव शुरू कर दिया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया।
मजदूरों का आरोप है कि प्रशासन ने पहले उनकी 8 घंटे की ड्यूटी समेत अन्य मांगों को मान लिया था, लेकिन अब उन पर अमल नहीं हो रहा। प्रदर्शनकारी श्रमिकों की मांग है कि तय शर्तों को पूरी रिफाइनरी परिसर में बोर्ड पर लिखवाया जाए, ताकि सभी ठेकेदार उनका पालन करें। उनका कहना है कि जो ठेकेदार नियमों का उल्लंघन करे, उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे ब्लैकलिस्ट किया जाए।
इससे पहले 23 फरवरी को भी रिफाइनरी परिसर में झड़प हुई थी। उस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर पथराव किया और वाहनों में तोड़फोड़ की। हालात काबू करने के लिए तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को दो हवाई फायर करने पड़े थे। तब से माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
मजदूरों की प्रमुख मांगों में ड्यूटी समय को सख्ती से 8 घंटे निर्धारित करना शामिल है। उनका कहना है कि व्यवहार में उनसे 10 से 12 घंटे तक काम लिया जाता है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान स्पष्ट नहीं होता। वेतन कटौती को लेकर भी असंतोष है। श्रमिकों का आरोप है कि पीएफ और ईएसआई के नाम पर अधिक कटौती की जाती है, पर पारदर्शी हिसाब नहीं दिया जाता।
सुविधाओं की कमी भी प्रदर्शन का बड़ा कारण बताई जा रही है। मजदूरों के अनुसार गेट नंबर 4 से साइट तक पहुंचने के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। साइट के भीतर शौचालय की सुविधा नहीं होने से उन्हें दूर तक पैदल जाना पड़ता है। कैंटीन की व्यवस्था भी नजदीक नहीं है, जिससे भोजन के समय में कटौती हो जाती है और देर होने पर फटकार का सामना करना पड़ता है।
श्रमिकों ने ठेकेदारों और सुरक्षा कर्मियों के व्यवहार पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि गेट पास जांच के दौरान दुर्व्यवहार और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। विरोध करने पर काम से निकालने की धमकी दी जाती है। प्रदर्शनकारी मजदूरों का कहना है कि वे सम्मानजनक व्यवहार और सुरक्षित कार्य परिस्थितियों की मांग कर रहे हैं।
पुलिस प्रशासन ने कहा है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और किसी को भी हिंसा की अनुमति नहीं दी जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, वार्ता के जरिए समाधान निकालने का प्रयास जारी है। रिफाइनरी प्रबंधन की ओर से अभी आधिकारिक बयान का इंतजार है।
पानीपत रिफाइनरी प्रदेश की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों में से एक है, जहां बड़ी संख्या में ठेका श्रमिक कार्यरत हैं। ऐसे में श्रम विवाद और सुरक्षा संबंधी घटनाएं औद्योगिक शांति और उत्पादन पर असर डाल सकती हैं। प्रशासन अब हालात सामान्य करने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश में जुटा है।











