यूक्रेन-रूस युद्ध में भारतीय जहाज पर मिसाइल अटैक में हरियाणा के युवक की भी मौत, डेढ़ महीने पहले ज्वाइन की थी नौकरी, 6 माह का है बेटा

On: July 22, 2026 10:11 AM
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यूक्रेन-रूस युद्ध में भारतीय जहाज पर मिसाइल हमले में यमुनानगर के गुरप्रीत सिंह समेत 4 भारतीयों की मौत हो गई. परिवार ने शव जल्द लाने, मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग की है.गुरप्रीत की शादी को अभी डेढ़ साल ही हुआ था. पीछे उसकी पत्नी, मात्र छह महीने का मासूम बेटा और बुजुर्ग मां और पिता रह गए हैं.

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यमुनानगर. यूक्रेन-रूस युद्ध की चपेट में आए भारतीय जहाज पर हुए मिसाइल हमले में चार भारतीयों की मौत हो गई है. मृतकों में यमुनानगर जिले के पंजेटो गांव का इकलौता बेटा गुरप्रीत सिंह भी शामिल है. डेढ़ महीने पहले ही वह मर्चेंट नेवी में नौकरी के लिए गया था. डेढ़ साल पहले उसकी शादी हुई थी और छह महीने का मासूम बेटा है. मौत की खबर से परिवार में मातम पसरा है. परिजनों ने केंद्र सरकार से गुरप्रीत का शव जल्द भारत लाने, उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है.

जानकारी के अनुसार, यमुनानगर जिले के पंजेटो गांव में मातम पसरा हुआ है. परिवार का इकलौता बेटा गुरप्रीत सिंह अब कभी वापस नहीं लौटेगा. यूक्रेन में भारतीय जहाज पर हुए रूसी मिसाइल हमले में गुरप्रीत सिंह समेत चार भारतीय नागरिकों की मौत की खबर ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. पिता ने बताया गुरप्रीत सिंह करीब डेढ़ महीने पहले ही मर्चेंट नेवी में नौकरी के लिए विदेश गया था. परिवार को उम्मीद थी कि बेटा अच्छी कमाई कर घर की आर्थिक स्थिति सुधारेगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.

गौरतलब है कि 20 जुलाई को यह हमला किया गया था. गुरप्रीत की शादी को अभी डेढ़ साल ही हुआ था. पीछे उसकी पत्नी, मात्र छह महीने का मासूम बेटा और बुजुर्ग मां और पिता रह गए हैं. जैसे ही मौत की खबर गांव पहुंची, घर में चीख-पुकार मच गई. मां और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है. तीन साल पहले एक हादसे में गुरप्रीत के पिता दिव्यांग हो गए थे. ऐसे में पूरे परिवार की जिम्मेदारी गुरप्रीत के कंधों पर थी. गांव में शोक की लहर है और हर किसी की आंखें नम हैं.

पिता कीर्तन सिंह ने केंद्र सरकार से मांग की है कि गुरप्रीत का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाया जाए ताकि पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया जा सके. साथ ही परिवार को उचित मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग उठाई गई है.रोटी कमाने निकला एक बेटा तिरंगे में लिपटकर लौटेगा, यह किसी ने नहीं सोचा था. अब पूरे जिले की निगाहें केंद्र सरकार पर हैं कि आखिर इस दुख की घड़ी में गुरप्रीत के परिवार को कितना और कितनी जल्दी न्याय और सहारा मिलता है.

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Vinod Kumar Katwal

Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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