25 हजार गांव होंगे डिजिटल, ‘मेरा गांव मेरी धरोहर’ प्रोजेक्ट से बढ़ेगा ग्रामीण पर्यटन और रोजगार

On: May 20, 2026 7:29 PM
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राजस्थान के ग्रामीण इलाकों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्र सरकार के ‘मेरा गांव मेरी धरोहर’ प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान के 25 हजार से अधिक गांवों का डिजिटल डेटा ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य गांवों की कला, संस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक विरासत को डिजिटल रूप में संरक्षित करना है, ताकि देश-विदेश के लोग राजस्थान के ग्रामीण जीवन और संस्कृति को करीब से जान सकें।

सरकारी जानकारी के अनुसार, राजस्थान के कुल करीब 40 हजार गांवों में से 25 हजार से ज्यादा गांवों की डिजिटल प्रोफाइल तैयार कर पोर्टल पर उपलब्ध करा दी गई है। इससे ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार का मानना है कि आने वाले समय में विदेशी और घरेलू पर्यटक बड़े शहरों के साथ-साथ गांवों की यात्रा भी अपने ट्रैवल प्लान में शामिल करेंगे।

ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलने से गांवों में होमस्टे, लोक कला, हस्तशिल्प, पारंपरिक खान-पान और स्थानीय गाइड जैसी सेवाओं की मांग बढ़ेगी। इससे ग्रामीण युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलने की संभावना मजबूत होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का काम कर सकती है।

‘मेरा गांव मेरी धरोहर’ प्रोजेक्ट के तहत हर गांव की अलग डिजिटल पहचान तैयार की जा रही है। इसमें गांव की ऐतिहासिक विरासत, लोक संस्कृति, तीज-त्योहार, पारंपरिक पहनावा, गहने, खान-पान, धार्मिक स्थल, प्रसिद्ध व्यक्तित्व और लोक कला से जुड़ी जानकारी शामिल की जा रही है। इससे राजस्थान की समृद्ध ग्रामीण संस्कृति एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो रही है।

जयपुर जिले के कई क्षेत्रों के गांवों को भी पोर्टल पर शामिल किया गया है। इनमें चाकसू, आमेर, फागी, बस्सी, चौमूं, फुलेरा, कोटखावदा, किशनगढ़-रेनवाल, कोटपूतली, मौजमाबाद, पावटा, दूदू और जयपुर क्षेत्र के सैकड़ों गांव शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक चाकसू क्षेत्र के 212 गांव, आमेर के 184 गांव और फागी के 168 गांवों की डिजिटल प्रोफाइल ऑनलाइन दर्ज की गई है।

पोर्टल पर अपलोड की गई जानकारियों में सांगानेर के विधानी गांव का प्रसिद्ध मंदिर भी शामिल किया गया है, जिसे स्थानीय आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। इसी तरह प्रदेश के कई अन्य गांवों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को भी डिजिटल रूप से संरक्षित किया जा रहा है।

सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अपने गांव की डिजिटल प्रोफाइल और सांस्कृतिक जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर देखें। इसके लिए मेरा गांव मेरी धरोहर पोर्टल पर विजिट किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना राजस्थान के गांवों को नई पहचान देने के साथ-साथ पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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