हरियाणा सरकार का परिवार पहचान पत्र (PPP) पोर्टल एक बार फिर अपनी तकनीकी खामियों और लापरवाही को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। ताजा मामला झज्जर जिले के गांव बीड छुछकवास से सामने आया है, जहां पोर्टल की गंभीर त्रुटि के चलते 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला सावित्री को कागजों में मात्र 8 माह 12 दिन की दुधमुंही बच्ची बना दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि इसी ‘नन्ही बच्ची’ की सालाना आय भी पोर्टल पर 10 हजार से 25 हजार रुपये दर्शा दी गई है।
इस तकनीकी गड़बड़ी का सीधा असर सावित्री और उनके 66 वर्षीय पति बाबूलाल पर पड़ा है, जो पिछले एक साल से वृद्धावस्था पेंशन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। सावित्री का कहना है कि परिवार पहचान पत्र पोर्टल में उनकी जन्मतिथि 1 जून 2024 दर्ज कर दी गई है। इस पर व्यंग्य करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन ने तो उन्हें बच्ची बना दिया है, अब पता नहीं वे दोबारा बुजुर्ग कब मानी जाएंगी। यदि यह गलती नहीं सुधरी तो नियमों के मुताबिक उन्हें वृद्धावस्था पेंशन के लिए लगभग 60 साल और इंतजार करना पड़ेगा।
पीड़िता सावित्री के अनुसार, मतदाता सूची वर्ष 2016 के रिकॉर्ड में उनकी उम्र 55 वर्ष दर्ज थी, जिसके आधार पर वर्तमान में उनकी उम्र करीब 65 वर्ष बनती है। उन्होंने संबंधित दस्तावेज और जन्मतिथि के रिकॉर्ड भी अधिकारियों के सामने पेश किए, लेकिन इसके बावजूद परिवार पहचान पत्र पोर्टल में सुधार नहीं हो पा रहा है। सिस्टम की इस लापरवाही ने एक बुजुर्ग महिला को अपनी ही उम्र साबित करने के लिए संघर्ष करने पर मजबूर कर दिया है।
इस मामले ने सरकारी दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सरकार डिजिटल इंडिया और सरल सेवाओं की बात करती है, वहीं दूसरी ओर एक महिला को बुढ़ापा पेंशन जैसी बुनियादी सुविधा के लिए सिस्टम से लड़ना पड़ रहा है। परिवार का कहना है कि यह महज तकनीकी गलती नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा गंभीर मामला है, जिसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए।
दर-दर भटकने के बावजूद अब तक समाधान नहीं निकल पाया है। सावित्री के बेटे अनूप सिंह ने बताया कि वे बीते एक साल से समाधान के लिए क्रीड केंद्र, एडीसी कार्यालय, समाधान शिविरों और लघु सचिवालय के कई चक्कर काट चुके हैं। यहां तक कि मुख्यमंत्री विंडो पर भी शिकायत दर्ज करवाई गई है, लेकिन हर जगह से केवल आश्वासन ही मिला है। परिवार का कहना है कि यदि जल्द ही गलती नहीं सुधारी गई, तो बुजुर्ग महिला को उसका हक मिलने में और लंबा इंतजार करना पड़ेगा।












