Haryana News: हरियाणा में कचरा प्रबंधन को लेकर एक बड़ा बदलाव शुरू हो चुका है। राज्य सरकार ने प्रदेश को “कूड़ा मुक्त” बनाने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से पाँच प्रमुख शहरों गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, करनाल और हिसार में अत्याधुनिक वेस्ट-टू-एनर्जी (कचरे से बिजली) परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है। इस पहल से न सिर्फ वर्षों से जमा कचरे के पहाड़ खत्म करने में मदद मिलेगी, बल्कि राज्य के ऊर्जा उत्पादन में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस परियोजना को दो प्रमुख तकनीकों में विभाजित किया गया है। पहली तकनीक “वेस्ट-टू-चारकोल” है, जिसे NTPC Limited के सहयोग से लागू किया जा रहा है। इन संयंत्रों में रोजाना लगभग 3,000 टन कचरे को प्रोसेस कर “ग्रीन चारकोल” तैयार किया जाएगा, जिसे बिजली संयंत्रों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
वहीं दूसरी ओर, हिसार, करनाल और पंचकूला में पीपीपी मॉडल के तहत ऐसे प्लांट लगाए जा रहे हैं जो कचरे को सीधे जलाकर बिजली उत्पादन करेंगे। इससे न केवल ठोस कचरे का निपटान होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर ऊर्जा उपलब्धता भी बढ़ेगी।
इस परियोजना की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। राज्य के कई शहरों में “लिगेसी वेस्ट” एक गंभीर समस्या बन चुका है। खासकर गुरुग्राम का बंधवाड़ी लैंडफिल साइट, जहां कचरे के विशाल ढेर से निकलने वाला जहरीला लीचेट भूजल को प्रदूषित कर रहा है। इस मामले में National Green Tribunal की सख्ती के बाद सरकार ने वैज्ञानिक कचरा निस्तारण को प्राथमिकता दी है।
शहरी स्थानीय निकाय विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक इन सभी संयंत्रों को पूरी क्षमता से चालू करना है। सोनीपत में सफल ट्रायल के बाद इस मॉडल को बड़े स्तर पर लागू किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इससे शहरों की स्वच्छता रैंकिंग में भी सुधार होगा।
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