फरीदाबाद: कहते हैं कि जिस गांव का विकास रुक जाए वहां लोगों की उम्मीदें भी धीरे-धीरे टूटने लगती हैं. कुछ ऐसा ही हाल फरीदाबाद के मौजाबाद गांव का है. करीब 1200 साल पुराने इस गांव के लोग अब खुले तौर पर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सड़कें टूटी हुई हैं, नालियां ठीक नहीं हैं, जोहड़ (तालाब) असुरक्षित है और कई जरूरी सुविधाएं आज भी नहीं पहुंची हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि मौजाबाद, शेखपुर और अकबरपुर गांव मंझावली ग्राम पंचायत के अधीन आते हैं लेकिन विकास का फायदा इन गांवों तक नहीं पहुंच पा रहा है. अब तीनों गांवों के लोग अलग पंचायत बनाने और अपना सरपंच चुनने की मांग कर रहे हैं.
ग्रामीणों ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
Local18 से बातचीत में ग्रामीणों ने बताया कि इस मांग को लेकर वे प्रशासन को ज्ञापन भी दे चुके हैं. ज्ञापन में कहा गया है कि मंझावली पंचायत में करीब 2200 वोटर हैं, जबकि मौजाबाद, शेखपुर और अकबरपुर में मिलाकर करीब 550 से 600 वोटर हैं. ज्यादा वोट होने की वजह से हमेशा मंझावली का ही सरपंच चुना जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि इसी कारण उनके गांवों में विकास के काम पीछे रह जाते हैं. उनका कहना है कि अगर तीनों गांवों की अलग पंचायत बना दी जाए तो वे अपनी जरूरत के हिसाब से विकास कार्य करा सकेंगे.
74 साल में नहीं देखा कोई बड़ा विकास
प्रेम सिंह बताते हैं कि मेरी उम्र 74 साल हो गई है, लेकिन मैंने आज तक गांव में कोई बड़ा विकास कार्य नहीं देखा. गांव का जोहड़ बिना सुरक्षा के पड़ा है, जिसमें कई बार पशु डूब जाते हैं और बच्चों के लिए भी खतरा बना रहता है. बिजली की सप्लाई भी ठीक नहीं रहती. गांव की सड़कें जगह-जगह से टूटी हुई हैं और बड़े-बड़े गड्ढों के कारण स्कूल बस तक को आने-जाने में परेशानी होती है. गांव इतना पुराना होने के बाद भी यहां विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ.
सड़क, नालियां और श्मशान घाट तक का रास्ता बदहाल
भूपेंद्र भाटी बताते हैं कि मौजाबाद, शेखपुर और अकबरपुर में मिलाकर करीब 500 से 700 घर हैं, लेकिन तीनों गांवों में न सड़कें ठीक हैं, न नालियां और न ही दूसरी बुनियादी सुविधाएं. जोहड़ के चारों तरफ बाउंड्री नहीं होने से पशु उसमें गिर जाते हैं. श्मशान घाट तक जाने वाला रास्ता भी खराब हालत में है. गांव के लोगों ने अपनी मांग को लेकर डीसी को ज्ञापन दिया और केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर से भी मुलाकात की, लेकिन अब तक कोई ठोस हल नहीं निकला. अलग पंचायत बनने पर ही गांव का विकास हो सकेगा.
वादे नहीं, अब जमीन पर काम चाहिए
सुमित शर्मा बताते हैं कि मैंने बचपन से गांव में विकास होने की बातें ही सुनी हैं, लेकिन हालात आज भी वैसे ही हैं. गांव की सड़कों पर इतने बड़े गड्ढे हैं कि आए दिन बाइक सवार गिर जाते हैं और बच्चों को भी परेशानी होती है. यही स्थिति रही तो आने वाली पीढ़ियां भी इसी बदहाल गांव को देखेंगी. अब गांव के लोग सिर्फ वादे नहीं, बल्कि जमीन पर काम होते देखना चाहते हैं.
अलग पंचायत बने, तभी होगा बराबरी से विकास
श्यामवीर बताते हैं कि उनके गांव में करीब 500 से 700 वोट हैं, लेकिन पंचायत मंझावली के साथ होने की वजह से उनकी आवाज दब जाती है. मेरी 55 साल की उम्र में गांव में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा. मंझावली के सरपंच का ज्यादा ध्यान अपने गांव के विकास पर रहता है, जबकि मौजाबाद, शेखपुर और अकबरपुर की जरूरतों को नजरअंदाज किया जाता है. इसलिए हमारी सबसे बड़ी मांग यही है कि तीनों गांवों को मिलाकर अलग ग्राम पंचायत मौजाबाद बनाई जाए और गांव का अपना सरपंच चुना जाए, ताकि विकास के काम तेजी से शुरू हो सकें.











