punjab haryana high court | minor rape murder | 50 years jail | pocso case | काला धागा भी नहीं बचा पाया, शैतान से भी बुरा था आरोपी

On: July 14, 2026 9:32 PM
Follow Us:

होमताजा खबरदेश

शैतान से काला धागा भी नहीं बचा पाया, HC ने बताया- इसलिए दी 50 साल की सजा

Last Updated:

Minor Girl Rape Murder Case: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 7 साल की मासूम बच्ची से रेप और हत्या के दोषी को फांसी की जगह कम से कम 50 साल की जेल की सजा सुनाई है. अदालत ने कहा कि बच्ची के गले का ताबीज और कमर का काला धागा भी उसे नहीं बचा सका, क्योंकि आरोपी ‘शैतान से भी बदतर’ था. कोर्ट ने पुलिस की जांच पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं. साथ ही आरोपी पर 73 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. क्‍या है पूरा मामला जानने के लिए पढ़ें आगे…

शैतान से काला धागा भी नहीं बचा पाया, HC ने बताया- इसलिए दी 50 साल की सजाZoom

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 7 साल की मासूम से रेप और हत्या के दोषी को 50 साल की जेल और 73 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.

Minor Girl Rape Murder Case: बुरी ताकतों से बचाने के लिए लाडली के माता-पिता ने उसके गले में ताबीज और कमर में काला धागा बांधा था. माता-पिता को भरोसा था कि यह काला धागा उनकी ‘लाडली’ को हर बुरी नजर और बुरी ताकत से बचाएगा. लेकिन, माता-पिता का यह सुरक्षा कवच भी लाडली को नहीं बचा पाया. क्‍योंकि, लाडली के साथ हैवानियत करने वाला ‘शैतान’ से भी बदतर था.

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने यह टिप्‍पणी सात साल की लाडली के साथ हैवानियत करने वाले ‘शैतान’ को सजा सुनाते समय की है. हाईकोर्ट ने पुलिस पर गंभीर टिप्‍पणी करते हुए कहा कि जांच में ठीक से नहीं होने की वजह से मौत की सजा देना उचित नहीं होगा. हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को बदलते हुए आरोपी को कम से कम 50 साल तक जेल में रहने की सजा सुनाई है. साथ ही, उस पर कुल 73 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. दोषी से वसूले जाने वाला यह जुर्माना पीड़ित परिवार को दिया जाएगा.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला साल 2021 का है. 24 मई 2021 को 7 साल की बच्ची अचानक अपने घर से लापता हो गई थी. परिवार ने काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला. उसी रात पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई. अगले दिन बच्ची के पिता ने पुलिस को दूसरी शिकायत दी. अपनी शिकायत में उन्होंने अपने पड़ोसी आनंद सिंह पर शक जताया. पिता का आरोप था कि आरोपी उस दिन काम पर नहीं गया था और वही बच्ची को अपने साथ ले गया था. बाद में बच्ची का शव खेत से बरामद हुआ. जांच के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया और उसके खिलाफ रेप और हत्या का केस दर्ज किया था.

  1. ट्रायल कोर्ट ने दी थी फांसी: करीब दो साल तक चली सुनवाई के बाद जुलाई 2023 में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार दिया. हाईकोर्ट ने रेप और हत्या को बेहद जघन्य अपराध मानते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई. साथ ही पीड़ित परिवार को 30 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया. लेकिन आरोपी ने इस फैसले को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.
  2. हाईकोर्ट ने बच्ची को कहा ‘लाडली’: इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस रमेश चंद्र दिमरी की बेंच ने 54 पन्नों का फैसला सुनाया. फैसले में हाईकोर्ट ने बच्ची का असली नाम नहीं लिखा, बल्कि उसे प्यार से ‘लाडली’ कहकर संबोधित किया. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में लिखा कि यह बच्ची अपने सातवें जन्मदिन से सिर्फ 17 दिन दूर थी. उसका पहला ‘दोष’ यह था कि वह लड़की पैदा हुई और दूसरा यह कि वह बेहद गरीब परिवार में जन्मी थी.
  3. हाईकोर्ट ने जांच को बताया कमजोर: हाईकोर्ट ने साफ कहा कि इस मामले में जांच, सबूत और ट्रायल ऐसा नहीं था, जैसा मौत की सजा जैसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ जैसे मामलों में होना चाहिए था. हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ और ‘रेयर’ की सीमा पर खड़ा था. ऐसे मामलों में अगर जांच मजबूत तरीके से ना की गई हो तो तो फांसी जैसी सजा देना उचित नहीं माना जा सकता है.
  4. 73 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया: हाईकोर्ट ने आरोपी को सिर्फ 50 साल कैद की सजा ही नहीं सुनाई है, बल्कि भारी जुर्माना भी लगाया है. हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में 50 लाख रुपये और पॉक्सो कानून के तहत यौन अपराध के मामले में 23 लाख रुपये का जुर्माना लगाया. है इस तरह कुल 73 लाख रुपये पीड़ित बच्ची के परिवार को देने का आदेश दिया गया है.
  5. दोबारा किसी मासूम की जिंदगी ना हो बर्बाद: इस फैसले में हाईकोर्ट ने आरोपी के अपराध को बेहद जघन्य और अमानवीय माना है. साथ ही, यह भी साफ किया कि मौत की सजा तभी दी जा सकती है, जब जांच और सबूत बेहद पुख्‍ता हों. हाईकोर्ट ने माना कि जांच में कमियां थीं, इसलिए फांसी की सजा बरकरार नहीं रखी जा सकती. हालांकि, हाईकोर्ट ने सख्‍त रुख अख्तियार करते हुए आरोपी को 50 साल तक जेल में रखने का आदेश दिया है, ताकि वह दोबारा किसी मासूम की जिंदगी बर्बाद न कर सके.

जघन्‍य होने के बावजूद हाईकोर्ट ने क्‍यों हटाई फांसी की सजा?
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने पुलिस जांच पर कई सवाल उठाए. उनका कहना था कि जांच में कई जरूरी तथ्यों को सही तरीके से रिकॉर्ड नहीं किया गया. जिस व्यक्ति ने सबसे पहले बच्ची के गायब होने की जानकारी दी, उसकी भूमिका की भी ठीक से जांच नहीं हुई. सबसे बड़ा सवाल शव की बरामदगी को लेकर भी उठा. पुलिस का दावा था कि आरोपी की निशानदेही पर बच्ची का शव मिला था. लेकिन हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि पुलिस को शव की जानकारी आरोपी की गिरफ्तारी से पहले ही मिल चुकी थी. ऐसे में यह साबित नहीं हो सका कि शव आरोपी की बताई जगह से बरामद हुआ था. हाईकोर्ट ने माना कि जांच में लापरवाही हुई है. हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि उस समय देश में कोविड-19 की पाबंदियां के चलते जांच करना मुश्किल था.

आखिर आरोपी को क्‍यों दी गई 50 साल की सजा?
फांसी की सजा हटाने के बावजूद हाईकोर्ट ने आरोपी के अपराध को बेहद घिनौना बताया है. हाईकोर्ट ने कहा कि समाज की दूसरी बच्चियों की सुरक्षा भी जरूरी है. इसी वजह से हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि आरोपी को उम्रकैद तो होगी, लेकिन वह कम से कम 50 साल पूरे किए बिना जेल से बाहर नहीं आ सकेगा. यानी सामान्य उम्रकैद की तरह समय से पहले रिहाई का फायदा उसे नहीं मिलेगा. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि ऐसा विकृत मानसिकता वाला व्यक्ति दोबारा किसी दूसरी बच्ची के लिए खतरा न बने.

About the Author

authorimg

Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…और पढ़ें

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Follow Now

और पढ़ें

फूलों की बारिश, तालियां और भावनाएं… पंचकूला से डीसीपी की विदाई, भावुक हुईं IPS सृष्टि गुप्ता, बोलीं- यादें हमेशा साथ रहेंगी

इस पहाड़ी पर हनुमान जी भी कर चुके आराम, आज भी मौजूद पदचिह्न, फरीदाबाद की ये जगह कैसे बनी इतनी रहस्यमयी?

under water homes| flats inside sea| sharjah sea based homes| समंदर के भीतर बन रही सोसायटी, 2BHK का कितना है दाम, नोएडा-गुरुग्राम से कितना है महंगा?

गुरुग्राम में भाजपा दफ्तर के आसपास धारा 163 लागू, कांग्रेस सुंदरकांड का पाठ करने पर अड़ी, भारी पुलिस बल तैनात

जान की कीमत महज 500 रुपयेः सिरसा में पैसों के विवाद में 22 साल के युवक की हत्या, 22 लोगों के खिलाफ मर्डर का केस दर्ज

भिवानी हत्या का बदला हत्या…भाभी से अस्पताल मिलने गए युवक को मार डाला, डबल मर्डर का आरोपी था बलजीत