आर्मी के पूर्व डिप्टी चीफ को ‘कायर’ कहना पड़ा भारी, IAF के रिटायर्ड कैप्टन को 4 महीने की जेल

On: July 21, 2026 5:55 PM
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Gurugram Court News: गुरुग्राम की एक अदालत ने मानहानि के एक भारतीय वायुसेना (IAF) के रिटायर्ड अफसर को सजा सुनाई है. ग्रुप कैप्टन विनोद कुमार गांधी नाम के अधिकारी ने सेना के पूर्व डिप्टी चीफ रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल राज कादयान को एक ईमेल में ‘कायर’ कहा था. यह विवाद जंतर-मंतर पर ‘वन रैंक वन पेंशन’ (OROP) आंदोलन के दौरान का है.

पूर्व डिप्टी चीफ को 'कायर' कहना पड़ा भारी, रिटायर्ड कैप्टन को 4 महीने की जेलZoom

एयरफोर्स के पूर्व अफसर को गुरुग्राम कोर्ट में चार महीने की जेल की सजा सुनाई गई है.

गुरुग्राम: गुरुग्राम की एक कोर्ट ने एयरफोर्स के अफसर को मंगलवार को जेल की सजा सुनाई है. अदालत ने भारतीय वायुसेना (IAF) के एक सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन विनोद के. गांधी को मानहानि के मामले में दोषी करार दिया है. कोर्ट ने उनको 4 महीने की जेल की सजा सुनाई है. ग्रुप कैप्टन पर आरोप था कि उन्होंने भारतीय सेना के पूर्व डिप्टी चीफ (ट्रेनिंग और कोआर्डिनेशन), रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल राज कादयान को ‘कायर’ कहा था.

पूरा मामला जंतर-मंतर पर रक्षा कर्मियों के ‘वन रैंक वन पेंशन’ (OROP) आंदोलन से जुड़ा है. न्यायिक मजिस्ट्रेट हरि किशन की अदालत ने इस मामले पर 17 जुलाई को अपना फैसला सुनाते हुए साफ किया कि सेना के किसी अधिकारी के लिए ‘कायर’ शब्द का इस्तेमाल करना सामान्य बात नहीं है.

‘कायर’ कहना गरिमा पर सीधा प्रहार
अदालत ने मानहानि के इस मामले में सजा सुनाते हुए बेहद कड़ी टिप्पणियां कीं. न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा कि एक सम्मानित सेना अधिकारी को ‘कायर’ कहना, विशेष रूप से तब जब यह बात दिग्गजों और रक्षा कर्मियों के बीच फैलाई गई हो, अपने आप में मानहानिकारक है.

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ‘शिकायतकर्ता ने चार दशकों से अधिक समय तक भारतीय सेना की सेवा की और लेफ्टिनेंट जनरल का पद प्राप्त किया. ऐसे अधिकारी पर कायरता का आरोप लगाना स्वाभाविक रूप से अपमानजनक है. यह आम सामाजिक जीवन में इस्तेमाल किए गए इसी शब्द की तुलना में कहीं अधिक गंभीर मानहानिकारक प्रभाव डालता है. यह आरोप शिकायतकर्ता द्वारा अपने विशिष्ट सैन्य करियर के दौरान अर्जित सम्मान और विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार करता है.’

क्या था पूरा विवाद?
साल 2016 में पूर्व डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राज कादयान ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था. शिकायत में कहा गया था कि इंडियन एक्स-सर्विसमेन मूवमेंट (IESM) और अन्य पूर्व सैनिक समूहों के सदस्यों के बीच ग्रुप कैप्टन गांधी द्वारा कई ऐसे ईमेल भेजे गए, जिनमें झूठे, अपमानजनक और मानहानिकारक आरोप लगाए गए थे. अदालत को बताया गया कि यह मानहानि तब की गई जब कादयान ने IESM में संगठनात्मक धन (फंड) की हेराफेरी और धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया था. इसके जवाब में गांधी ने कथित तौर पर ईमेल सर्कुलेट कर कादयान को ‘कायर’ बताया और कहा कि वह लेफ्टिनेंट जनरल के पद से संबोधित किए जाने के लायक नहीं हैं.

टिप्पणी का गलत मतलब निकाला गया
इस मामले में बचाव पक्ष ने दलील दी कि कादयान की एनुअल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट (ACR) में एक एडवाइजरी नोट था, जिसमें अधिकारी को ‘ऑपरेशन्स में बोल्ड और आक्रामक होने’ की सलाह दी गई थी. कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ACR में दर्ज इस सलाह को किसी भी हाल में इस अर्थ में नहीं लिया जा सकता कि अधिकारी कायर था. जज ने साफ किया, ‘सशस्त्र बलों के किसी सदस्य के खिलाफ जब ‘कायर’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, तो यह एक साधारण व्यक्ति के खिलाफ किए गए इस्तेमाल की तुलना में कहीं अधिक गंभीर और नुकसानदेह अर्थ रखता है.’

कोर्ट ने नहीं दिया प्रोबेशन का लाभ, लेकिन दी जमानत
अदालत ने माना कि आरोपी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 500 (मानहानि) के तहत अपराध किया है. यह भी साबित हुआ कि आरोपी ने ही ईमेल लिखे और तीसरे व्यक्तियों को भेजे, जो कानून की नजर में ‘पब्लिकेशन’ (प्रकाशन) माना जाता है. अदालत ने ग्रुप कैप्टन (रिटायर्ड) विनोद कुमार गांधी को दोषी ठहराते हुए प्रोबेशन का लाभ देने से इनकार कर दिया. हालांकि, सजा तय करते समय अदालत ने उनके सैन्य बैकग्राउंड और उम्र को देखते हुए नरम रुख अपनाया.

कोर्ट ने कहा, ‘दोषी एक वरिष्ठ नागरिक है और उसने भारतीय वायुसेना में एक अधिकारी के रूप में देश की सेवा की है. पूर्व सैनिकों के कल्याण में उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.’ इसी आधार पर अदालत ने सजा सुनाने के बाद उन्हें फैसले के खिलाफ अपील दायर करने के लिए 17 अगस्त तक की अंतरिम जमानत दे दी है. इस मामले में शिकायतकर्ता की ओर से एडवोकेट डीसी गुप्ता और आरोपी की ओर से एडवोकेट संदीप अनेजा ने पैरवी की थी.

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Deep Raj DeepakSub-Editor

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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