पहले दादा-पिता ने पहनी सेना की वर्दी, अब बेटी बनी लेफ्टिनेंट, पूरे गांव ने दिल खोलकर किया स्वागत

On: September 7, 2026 6:50 PM
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Ambala News: अंबाला की एक बेटी ने वर्दी पहन अपने परिवार सहित पूरे इलाके का नाम रोशन किया है. अंबाला की रहने वाली सिमरनजीत कौर का सेना में चयन होने के बाद पूरे इलाके ने उनका जोरदार स्वागत किया है. बता दें कि उनके परिवार का वर्दी से रिश्ता नया नहीं है, बल्कि सिमरनजीत ने पिता और दादा भी बड़े पद पर रह चुके हैं.

अंबाला: परिवार में जब कोई बेटा या बेटी सेना की वर्दी पहनता है तो वह पल पूरे परिवार के लिए गर्व का होता है. लेकिन सिरसगढ़ गांव की सिमरनजीत कौर चहल के लिए यह सिर्फ एक नौकरी या उपलब्धि नहीं, बल्कि उस परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है, जिसकी नींव उनके दादा और पिता ने रखी थी. दरअसल एनडीए से प्रशिक्षण पूरा कर लेफ्टिनेंट बनीं सिमरनजीत कौर जब पहली बार अपने गांव लौटीं तो ग्रामीणों ने उनका ऐसा स्वागत किया कि पूरा गांव जश्न में बदल गया.

बता दें कि सिमरनजीत के गांव पहुंचने से पहले ही स्वागत की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं. ग्रामीण करीब एक किलोमीटर दूर से ही उन्हें वाहन में लेकर गांव पहुंचे. ढोल-नगाड़ों और उत्साह के बीच जब गांव की बेटी अपने घर पहुंची तो परिवार की खुशी देखते ही बन रही थी. घर पर भव्य कार्यक्रम रखा गया. वहीं पिता कैप्टन अरविंदर सिंह ने बताया कि माहौल ऐसा था जैसे घर में शादी हो, बल्कि बेटी की इस उपलब्धि की खुशी उन्हें शादी से भी बड़ी लग रही है.

दादा 13 फील्ड रेजिमेंट, पिता कैप्टन
मिली जानकारी अनुसार, सिमरनजीत कौर का सेना से रिश्ता नया नहीं है. उनके दादा गनर गुरदयाल सिंह 13 फील्ड रेजिमेंट में सेवा दे चुके हैं. इसके बाद उनके पिता कैप्टन अरविंदर सिंह ने 193 मेड रेजिमेंट में देश की सेवा की और सेवानिवृत्त हुए, अब परिवार की अगली पीढ़ी में सिमरनजीत ने सेना की वर्दी पहनकर इस परंपरा को आगे बढ़ाया है. इतना ही नहीं, उनके भाई अंशदीप सिंह भी वर्तमान में 18 सिख रेजिमेंट में सेवाएं दे रहे हैं, यानी एक ही परिवार में दादा, पिता, भाई और अब बेटी चार सदस्यों का सेना से जुड़ना अपने आप में गर्व की कहानी है.

सालों का सपना अब हुआ पूरा
उनकी मां सुखविंदर कौर पूर्व शिक्षिका रही हैं और परिवार को हमेशा मजबूती से संभालती रही हैं. वही सिमरनजीत ने शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई. उनकी प्राथमिक शिक्षा बराड़ा के एंजल पब्लिक स्कूल से हुई. इसके बाद उन्होंने अंबाला छावनी के एसडी कॉलेज से बीसीए किया और फिर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एमसीए की डिग्री हासिल की. तकनीकी शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने एनडीए का रास्ता चुना. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद जब वह लेफ्टिनेंट बनीं तो वर्षों से देखा जा रहा उनका सपना हकीकत में बदल गया.

बचपन में वर्दी देखकर आया हौसला
वहीं लोकल 18 से बातचीत में लेफ्टिनेंट सिमरनजीत कौर ने कहा कि बचपन से ही उन्होंने अपने दादा और पिता को सेना की वर्दी में देखा था, तभी उनके मन में भी भारतीय सेना में जाने का सपना पैदा हुआ. कॉलेज के दौरान वह एनसीसी से भी जुड़ी रहीं. उन्होंने बताया कि उनका भाई उनसे करीब तीन साल छोटा है, लेकिन वह उनसे पहले सेना में भर्ती हो गया. भाई को वर्दी में देखकर उनका भी हौसला बढ़ा और उन्हें लगा कि वह भी सेना में जाकर देश की सेवा कर सकती हैं.

पूरे गांव ने किया बेटी का स्वागत
सिमरनजीत ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि बड़े सपने देखने चाहिए और खुद पर विश्वास रखना चाहिए. अगर व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास और मेहनत है तो वह अपने मुकाम को जरूर हासिल कर सकता है. वहीं उनके पिता कैप्टन अरविंदर सिंह ने कहा कि जिस दिन उनकी बेटी लेफ्टिनेंट बनी, उसी दिन से परिवार में खुशी का माहौल है. लेकिन आज जब पूरा गांव बेटी के स्वागत के लिए एकजुट हुआ तो उनकी खुशी और बढ़ गई. उन्होंने कहा कि परिवार में शुरू से ही देशभक्ति की भावना रही है. आज पिता सेना में सेवा दे चुके हैं और बेटा सेना में सेवा दे रहा है और बेटी ने भी उसी राह को चुना है. सिमरनजीत का लेफ्टिनेंट बनना उनके परिवार की सैन्य परंपरा का अगला अध्याय है.

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आर्यन सेठ

आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…

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वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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