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Ambala ki local news : अंबाला का यह मंदिर करीब 150 साल पुराना है. ब्रिटिश काल से यहां फूलडोल मेले की परंपरा चली आ रही है. यहां जन्माष्टमी के दूसरे दिन सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण को पंचामृत से स्नान करवाया गया. इसके बाद पूजा-अर्चना कर छप्पन भोग लगाया गया. इसके होती है नौका की परंपरा. लोकल 18 से मंदिर के पुजारी देव ढोंडियाल बताते हैं कि इसमें हरियाणा और पंजाब के अलग-अलग जिलों से श्रद्धालु पहुंचते हैं. इस मेले की सबसे खास बात भगवान श्रीकृष्ण की शोभायात्रा है. रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालु फूल बरसाकर स्वागत करते हैं. कई जगह आतिशबाजी भी होती है.
अंबाला. हरियाणा का अंबाला जिला सिर्फ ऐतिहासिक इमारतों और छावनी के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी धार्मिक परंपराओं के लिए भी जाना जाता है. अंबाला छावनी में आज भी ब्रिटिश काल की एक ऐसी परंपरा पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है, जो करीब 104 साल पुरानी है. जन्माष्टमी के दूसरे दिन आयोजित होने वाला ऐतिहासिक मेला फूलडोल यहां श्रद्धा और उत्साह का ऐसा संगम बन जाता है, जिसमें हरियाणा और पंजाब के अलग-अलग जिलों से श्रद्धालु पहुंचते हैं. इस मेले की सबसे खास बात भगवान श्रीकृष्ण की पालकी की शोभायात्रा है. जन्माष्टमी के दूसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण को पंचामृत से स्नान करवाने और उनके वस्त्र धोने की परंपरा निभाई जाती है. इसके बाद ठाकुर जी को पालकी में विराजमान कर बाजारों में भ्रमण करवाया जाता है. रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालु फूल बरसाकर पालकी का स्वागत करते हैं. कई जगह आतिशबाजी भी की जाती है, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय होने के साथ उत्सव में बदल जाता है. अंबाला छावनी की अनाज मंडी स्थित श्री सत्संग सभा शिवाला रजि. शिव मंदिर में फूल डोल मेले का आयोजन होता आया है.
क्या-क्या हुआ
लोकल 18 से मंदिर के पुजारी देव ढोंडियाल बताते हैं कि यह मंदिर करीब 150 साल से भी अधिक पुराना है. ब्रिटिश काल से यहां फूलडोल मेले की परंपरा चली आ रही है. जन्माष्टमी के दूसरे दिन सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण को पंचामृत से स्नान करवाया गया. इसके बाद पूजा-अर्चना कर छप्पन भोग लगाया गया फिर नौका की परंपरा निभाई गई. इस दौरान पानी के कुंड में भगवान श्रीकृष्ण को नौका में विराजमान कर भ्रमण करवाया गया. इसके बाद फूल डोल मेले की शुरुआत हुई और भगवान श्रीकृष्ण की दो पालकियां शोभायात्रा में शामिल की गईं. इनमें एक पालकी श्री कैलाश मंदिर हाथी खाना से आई, जबकि दूसरी पालकी अनाज मंडी स्थित मंदिर से. दोनों पालकियों से भगवान कृष्ण को बाजारों में भ्रमण करवाया गया.
क्या बोले श्रद्धालु
पुजारी देव ढोंडियाल बताते हैं कि शोभायात्रा जब बाजारों से होकर गुजरी तो श्रद्धालुओं ने जगह-जगह फूल बरसाकर भगवान का स्वागत किया. बड़ी संख्या में लोग पालकी के साथ चलते नजर आए. शोभायात्रा सुभाष पार्क के सामने स्थित बीपीएस प्लेनेटोरियम तक पहुंची, जहां कुछ देर विश्राम के बाद पालकी वापस अनाज मंडी मंदिर पहुंची. मंदिर में शोभायात्रा के वापस पहुंचने के बाद आरती की गई और भगवान श्रीकृष्ण को दोबारा छप्पन भोग लगाया गया. श्रद्धालु अनिल ने बताया कि उनकी उम्र 59 वर्ष है और वह बचपन से ही फूल डोल मेले में शामिल होते आ रहे हैं. उन्हें पूरे साल इस मेले का इंतजार रहता है. उनके लिए यह सिर्फ मेला नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही आस्था और परंपरा है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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