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डॉ. पुनीत धर, सीनियर कंसल्टेंट अमृता हास्पिटल लोकल 18 से बताते हैं कि गैस बहुत ही सामान्य समस्या है. करीब 35 से 50 प्रतिशत लोगों को कभी न कभी गैस की परेशानी होती है. लेकिन हर बार होने वाली गैस सिर्फ गैस नहीं होती. कई मामलों में इसके पीछे पेट का अल्सर कुछ तरह के ट्यूमर या कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं. इसलिए लंबे समय तक रहने वाली गैस को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. पेट के अल्सर, पित्त की पथरी या कैंसर के शुरुआती लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं.
फरीदाबाद: आजकल गैस, पेट फूलना और एसिडिटी की समस्या इतनी आम हो गई है कि ज्यादातर लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. कई लोग मेडिकल स्टोर से दवा लेकर या घरेलू नुस्खों के सहारे राहत पाने की कोशिश करते रहते हैं. लेकिन अगर यही परेशानी बार-बार हो रही हो, लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ कुछ दूसरे लक्षण भी दिखाई दें तो इसे हल्के में लेना ठीक नहीं है. कई बार यही परेशानी पेट की गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकती है. ऐसे में समय रहते सही जांच और डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो जाता है.
लंबे समय तक है गैस की समस्या न करें नजरंदाज
डॉ. पुनीत धर, सीनियर कंसल्टेंट अमृता हास्पिटल लोकल 18 से बताते हैं कि गैस बहुत ही सामान्य समस्या है. करीब 35 से 50 प्रतिशत लोगों को कभी न कभी गैस की परेशानी होती है. लेकिन हर बार होने वाली गैस सिर्फ गैस नहीं होती. कई मामलों में इसके पीछे पेट का अल्सर कुछ तरह के ट्यूमर या कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं. इसलिए लंबे समय तक रहने वाली गैस को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. पेट के अल्सर, पित्त की पथरी या कैंसर के शुरुआती लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं. पित्त की पथरी में पेट के किसी खास हिस्से में दर्द होता है. जो शरीर के दूसरे हिस्सों तक भी जा सकता है. कैंसर की शुरुआती अवस्था में हल्की तकलीफ हो सकती है. इसलिए शुरुआत में ही डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. कई बार जब कैंसर बढ़ जाता है तो तेज दर्द, नसों से जुड़ा दर्द या शरीर के अंदर ब्लॉकेज जैसी समस्या हो सकती है. ऐसे में कई लोग इसे सिर्फ गैस समझ लेते हैं.
कोई स्थायी बीमारी नहीं है
डॉ. पुनीत बताते हैं कि गैस अपने आप में कोई बीमारी नहीं है. अलग-अलग लोग गैस को अलग तरीके से समझते हैं. किसी को ऊपर की तरफ ज्यादा गैस आती है, किसी को नीचे की तरफ. किसी का पेट फूल जाता है तो कोई सिर्फ डकार आने को गैस मान लेता है. इसलिए डॉक्टर को साफ-साफ बताना चाहिए कि असल परेशानी क्या है. पेट फूल रहा है, ज्यादा गैस बन रही है, दर्द है या कोई और दिक्कत है, तभी सही कारण का पता लगाया जा सकता है. बिना जांच के लंबे समय तक गैस या एसिडिटी की दवा लेना नुकसानदायक हो सकता है. अगर बीमारी की सही पहचान हो चुकी है तभी डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेनी चाहिए. लेकिन बिना जांच के लगातार दवा खाते रहने से असली बीमारी छिप सकती है. जरूरत पड़ने पर एंडोस्कोपी यानी कैमरे से पेट की जांच करानी पड़ती है. इससे यह पता चल जाता है कि पेट के अंदर अल्सर, कैंसर या दूसरी कोई गंभीर समस्या तो नहीं है. गलत दवा लेने से फायदा होने की बजाय नुकसान भी हो सकता है.
मसालेदार खाने का भी होता है असर
अगर गैस की दवा या एंटासिड लेने के बाद भी दो से तीन दिन में आराम नहीं मिलता है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. खासकर बार-बार गैस बनना, पेट फूलना, लगातार दर्द रहना, खाना निगलने में दिक्कत, बिना वजह वजन घटना, बार-बार उल्टी होना या मल में खून आना जैसे लक्षण दिखाई दें तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए. जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेकर समय पर इलाज शुरू कराना चाहिए. खानपान का असर भी कई लोगों में अलग-अलग होता है. ज्यादा मिर्च-मसाले वाला भोजन कुछ लोगों में परेशानी बढ़ा सकता है…जबकि कुछ लोगों को उससे कोई दिक्कत नहीं होती. इसलिए हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है. ऐसे में अपनी मर्जी से परहेज या दवा करने की बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर ही खानपान और इलाज तय करना सबसे बेहतर रहता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें











