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Ambala Sobha Yatra: बंधु नगर स्थित शीतला माता मंदिर में 14 अगस्त से तीन दिवसीय महोत्सव की शुरुआत हुई थी. पहले दिन कलश पूजा और कलश परिक्रमा का आयोजन हुआ, इसके बाद 15 अगस्त को मंदिर परिसर से माता की पालकी यात्रा निकाली गई. वहीं तीसरे दिन 16 अगस्त यानी आज अंबेडकर पार्क से शोभायात्रा निकाली गई है.
अंबाला: सनातन धर्म में देवी-देवताओं की आराधना की अलग-अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं. कहीं भक्त उपवास रखते हैं तो कहीं पैदल यात्रा कर अपनी आस्था प्रकट करते हैं. वहीं अंबाला छावनी में मां करुमारी अम्मन यानी शीतला माता के प्रति श्रद्धालुओं की ऐसी ही अनोखी आस्था देखने को मिली, जहां मनोकामना पूरी होने के बाद भक्तों ने अपने शरीर में त्रिशूल और लोहे के हुक धारण कर शोभायात्रा में हिस्सा लिया. कई श्रद्धालु इन हुक के सहारे भारी वाहन खींचते हुए नजर आए.
बता दें कि मां करुमारी अम्मन धर्मशाला कमेटी रजि. की ओर से आयोजित यह धार्मिक आयोजन पिछले करीब 62 वर्षों से अंबाला छावनी में होता आ रहा है. हर साल अगस्त महीने में होने वाले शीतला माता महोत्सव में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और इस बार भी हरियाणा और पंजाब के कई जिलों से बड़ी संख्या में भक्त अंबाला पहुंचे. वहीं महोत्सव के तीसरे दिन यानी 16 अगस्त को अंबाला छावनी के 12 क्रॉस रोड स्थित अंबेडकर पार्क से भव्य शोभायात्रा निकाली गई. यात्रा शहर के प्रमुख बाजारों से होती हुई बंधु नगर की ओर रवाना हुई. इस दौरान श्रद्धालु माता के जयकारे लगाते हुए नजर आए और ढोल नगाड़े बजाकर अपनी अपनी मनोकामना मांगते हुए दिखाई दिए.
कुछ ने जीभ, तो कुछ ने पीठ पर लगाया हुक-कुंडा
सबसे ज्यादा ध्यान उन भक्तों ने खींचा, जिन्होंने अपनी धार्मिक मन्नत पूरी होने के बाद शरीर में त्रिशूल और कुंडे धारण किए हुए थे. इस दौरान कुछ श्रद्धालुओं ने गाल और जीभ में त्रिशूल आर-पार किए, जबकि कुछ ने पीठ की त्वचा में लोहे के हुक लगवाकर उनसे भारी वाहन खींचा. श्रद्धालु इसे माता के प्रति अपनी श्रद्धा और मनोकामना पूरी होने पर धन्यवाद देने की परंपरा बताते हैं.
हर साल होता है भव्य आयोजन
वहीं लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए कमेटी सदस्य अजय ने बताया कि मां करुमारी अम्मन की पूजा उनके पूर्वजों के समय से होती आ रही है. हर साल अगस्त में शीतला माता महोत्सव का आयोजन किया जाता है. उनका कहना है कि इस धार्मिक आयोजन में दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होते हैं और अपनी मन्नत पूरी होने पर माता के प्रति आस्था प्रकट करते हैं. आयोजकों के अनुसार, श्रद्धालु शरीर में कुंडे और त्रिशूल धारण करके शोभायात्रा में शामिल होते हैं. इसे भक्त अपनी धार्मिक मान्यता और माता के प्रति समर्पण से जोड़कर देखते हैं.
3 दिन चलता है कार्यक्रम
वहीं सेवादारों ने बताया कि बंधु नगर स्थित शीतला माता मंदिर में 14 अगस्त से तीन दिवसीय महोत्सव की शुरुआत हुई थी. पहले दिन कलश पूजा और कलश परिक्रमा का आयोजन हुआ. इसके बाद 15 अगस्त को मंदिर परिसर से माता की पालकी यात्रा निकाली गई. वहीं तीसरे दिन 16 अगस्त को अंबेडकर पार्क से शोभायात्रा निकाली गई है.
उन्होंने कहा कि शोभायात्रा के बाद बंधु नगर में अग्नि परीक्षा की परंपरा भी निभाई जाती है. आयोजकों के मुताबिक, जिन श्रद्धालुओं ने कंगन बांधे होते हैं, वे रात में अंगारों के बीच से गुजरकर अपनी मन्नत पूरी होने पर माता के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हैं. उनका मानना है कि माता के आशीर्वाद से वे इन कठिन धार्मिक परंपराओं को पूरा करते हैं. वहीं इस पूरे आयोजन के दौरान भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिला और पूरा क्षेत्र माता के जयकारों से गूंजता रहा था .
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…
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