फरीदाबाद: फरीदाबाद में इन दिनों खेतों में धान की कटाई शुरू हो चुकी है. आज के समय में जहां किसान कम समय और कम मजदूरी में फसल काटने के लिए आधुनिक मशीनों का सहारा ले रहे हैं, वहीं डीग गांव के किसान कुंवरपाल आज भी अपने खेत में हाथ से धान की कटाई करवा रहे हैं. कुंवरपाल करीब 25 एकड़ जमीन में धान की खेती कर रहे हैं. इसके लिए उन्होंने बिहार से मजदूर बुलाकर फसल की कटाई शुरू करवाई है. हाथ से कटाई का खर्च मशीन के मुकाबले काफी ज्यादा है, इसके बावजूद वह हर साल इसी तरीके से धान कटवाते हैं. इसके पीछे वजह सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि धान की क्वालिटी, दाने की स्थिति और खेत की तैयारी भी है. धान कटवाने के बाद मजदूर उसे पहले की तरह पटक-पटककर झाड़ रहे हैं.
हाथ से कटाई में खर्च ज्यादा, लेकिन क्वालिटी पर भरोसा
Local18 से बातचीत में कुंवरपाल बताते हैं कि उन्होंने इस साल करीब 25 एकड़ में धान लगाया है. खेत में धान की कटाई के लिए बिहार से मजदूर आए हैं. हाथ से कटाई करवाने में खर्च जरूर ज्यादा आता है, लेकिन इससे धान की क्वालिटी अच्छी रहती है और मंडी में भी इसका फायदा देखने को मिलता है.
कुंवरपाल के मुताबिक, हाथ से काटी गई फसल को अच्छी तरह पकने और सूखने के बाद झाड़ा जाता है. इससे दाना बेहतर तरीके से निकलता है. आज के समय में मशीनों से धान की कटाई बहुत तेजी से हो जाती है. मशीन करीब आधे घंटे से एक घंटे के अंदर एक एकड़ धान की फसल काट देती है. इसके मुकाबले हाथ से कटाई में काफी समय लगता है और मजदूर भी ज्यादा लगाने पड़ते हैं. इसके बावजूद वह मशीन से धान कटवाने के बजाय हाथ से कटाई करवाते हैं, क्योंकि उनके अनुभव में हाथ से काटी गई फसल में नुकसान कम रहता है.
मशीन से कटाई में हरे दानों का नुकसान
कुंवरपाल बताते हैं कि मशीन से कटाई के दौरान कई बार धान में हरे दाने भी रह जाते हैं. मशीन खेत में खड़ी फसल को तेजी से काट देती है, जबकि हाथ से कटाई में मजदूर फसल को देखकर उसे काटते हैं. हाथ से कटाई के बाद धान को ठीक से पकने और सूखने का समय मिलता है. इसके बाद दाने को अलग किया जाता है. इसी वजह से उनके अनुसार दाना अच्छी क्वालिटी का निकलता है.
कुंवरपाल बताते हैं कि हाथ से धान की कटाई करवाने में एक एकड़ पर करीब 7 हजार से 8 हजार रुपये तक का खर्च आता है. वहीं मशीन से एक एकड़ धान की कटाई करीब 3 हजार रुपये में हो जाती है. यानी मशीन से कटाई करवाने का खर्च काफी कम हो जाता है और समय भी बचता है.
4 हजार रुपये तक ज्यादा खर्च, फिर भी हाथ से कटाई क्यों?
कुंवरपाल का मानना है कि हाथ से कटाई करवाने में जो अतिरिक्त खर्च आता है, उसकी भरपाई धान की क्वालिटी और मंडी में मिलने वाले बेहतर रेट से हो जाती है. उनके मुताबिक, हाथ से कटाई किए गए धान का रेट मंडी में मशीन से काटे गए धान की तुलना में करीब 200 रुपये तक ज्यादा मिल जाता है. इसी वजह से ज्यादा खर्च होने के बावजूद वह हाथ से कटाई करवाते हैं.
खेत की तैयारी में भी हाथ से कटाई का फायदा
कुंवरपाल बताते हैं कि हाथ से धान की कटाई का एक फायदा खेत को लेकर भी है. हाथ से कटाई करने के बाद खेत काफी अच्छे तरीके से तैयार हो जाता है और बचा हुआ हिस्सा चारे के काम भी आ जाता है. धान की कटाई के बाद खेत में अगली फसल की तैयारी करनी होती है, इसलिए खेत की स्थिति भी किसान के लिए काफी मायने रखती है.
25 एकड़ में खेती, फिर भी मशीन की जगह मजदूरों पर भरोसा
कुंवरपाल के लिए धान की क्वालिटी, दाने की स्थिति, खेत की तैयारी और मंडी में मिलने वाला रेट ज्यादा मायने रखता है. यही वजह है कि करीब 25 एकड़ में धान की खेती करने के बावजूद वह मशीन की जगह बिहार से मजदूर बुलाकर हाथ से ही अपनी फसल की कटाई करवा रहे हैं.











