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Ambala Lieutenant Success Story: कहते हैं कि अगर हौंसला हो तो सफलता अपने आप मिल जाती है. कुछ ऐसी ही कहानी है अंबाला निवासी लेफ्टिनेंट राहुल की. एक साल तक घर से दूर रहकर ट्रेनिंग करने के बाद जब राहुल अपने परिवार के बीच पहुंचे तो उनके चेहरे पर खुशी साफ नजर आई.
अंबाला: कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और मंजिल पाने का जुनून हो, तो मुश्किलों की बड़ी से बड़ी दीवार भी रास्ता नहीं रोक सकती है. दरअसल अंबाला शहर के राहुल धाकड़ ने इस बात को सच कर दिखाया है, क्योंकि भारतीय सेना में शामिल होकर देश सेवा करने का सपना देखने वाले राहुल ने कई असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और आखिरकार सातवीं कोशिश में SSB पास कर लेफ्टिनेंट बनने का सपना पूरा कर लिया है.
बता दें कि राहुल जब ट्रेनिंग पूरी करने के बाद पहली बार अपने घर अंबाला पहुंचे, तो परिवार ही नहीं बल्कि पूरा मोहल्ला उनकी इस उपलब्धि पर गर्व से झूम उठा ओर ढोल-नगाड़ों और बधाइयों के बीच राहुल का जोरदार स्वागत किया गया. खासतौर पर एक साल तक घर से दूर रहकर ट्रेनिंग करने के बाद जब राहुल अपने परिवार के बीच पहुंचे तो उनके चेहरे पर खुशी साफ नजर आई.
आंखों में बेटे की कामयाबी
वहीं माता-पिता और कॉलोनीवासियों की आंखों में बेटे की कामयाबी की खुशी दिखाई दी. वहीं राहुल की सफलता की कहानी इसलिए खास है, क्योंकि उन्होंने एक-दो नहीं बल्कि लगातार कई असफलताओं का सामना किया था. हर बार असफलता के बाद उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और पहले से ज्यादा मेहनत के साथ दोबारा तैयारी शुरू की. आखिरकार सातवीं कोशिश में उनका SSB परीक्षा में चयन हुआ और वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गए.
चेन्नई में ट्रेनिंग के बाद लौटे गांव
वहीं लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए राहुल ने बताया कि बचपन से ही उनका सपना भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करने का था और दिल्ली से B.Com की पढ़ाई पूरी करने के दौरान ही उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी. कई बार प्रयास करने के बावजूद जब सफलता नहीं मिली तो उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी तैयारी को और मजबूत किया. राहुल ने बताया कि चेन्नई में अकादमी में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वह पहली बार लेफ्टिनेंट बनने के बाद घर लौटे हैं.
हौंसला और जज्बा कम नहीं
उन्होंने कहा कि करीब एक साल घर से दूर रहने के बाद जब परिवार और कॉलोनी के लोगों के हंसते हुए चेहरे देखे तो उन्हें बेहद सुकून मिला. पूरे मोहल्ले ने जिस तरह उनका स्वागत किया, वह उनके लिए बेहद भावुक पल था. वहीं आज राहुल के अंबाला पहुंचने पर परिवार और मोहल्ला वासियों में खुशी की लहर दिखी.
पिता पंकज ने बताया कि आज वे बहुत खुश हैं और राहुल से सभी लोगों को प्रेरणा लेनी चाहिए कि अगर कोई मुकाम हासिल करना है तो उसमें चाहे लाख मुश्किलें आ जाए, लेकिन हमारा हौंसला और जज्बा कम नहीं होना चाहिए. उन्होंने बताया कि वह पहले जॉब करते थे और आप खुद का छोटा सा बिजनेस चलते हैं और अब बेटे के लेफ्टिनेंट बनने के बाद काफी ज्यादा खुश हैं. उन्होंने कहा कि जब राहुल दसवीं क्लास में था, तभी से बोलना था कि सेवा में नौकरी करूंगा और सेवा भी करूंगा. ऐसे में अब उसका सपना पूरा हुआ है.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…
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