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Chandigarh Ubar Rapido Ban: चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने रैपिडो और उबर का लाइसेंस 6 महीने के लिए सस्पेंड किया. पूर्व IAS अशोक खेमका ने इसे नासमझी भरा फैसला बताया, जिससे हजारों ड्राइवरों की आजीविका प्रभावित होगी.
चंडीगढ़ में उबर को बैन करने पर अब पूर्व आईएएस अफसर अशोक खेमका ने भी बयान दिया है.
चंडीगढ़. नियमों की उल्लंघन और पालना ना करने की वजह से चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने शहर में रेपिडो और उबर का लाइसेंस छह महीने के लिए सस्पेंड कर दिया है. यानी शहर में अब उबर की कैब्स अगले छह महीने तक नहीं चलेंगी. हालांकि, प्रशासन के इस फैसले से आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ेगा. वहीं, इस विवाद में अब हरियाणा के चर्चित और पूर्व आईएएस अफसर अशोक खेमका ने भी बयान दिया है और इस प्रशासन के एक्शन का विरोध जताया है.
पूर्व आईएएस अशोक खेमका ने एक्स पर लिखा कि चंडीगढ़ शहर में रैपिडो, उबर और अन्य कैब एग्रीगेटर्स को बैन नासमझी भरा फैसला है. इससे आम जनता को परेशानी होगी. क्योंकि यह लोगों के लिए किफायती और सुविधाजनक सुविधा था. इससे भी गंभीर बात यह है कि हजारों ड्राइवरों की आजीविका प्रभावित हो गई है.
खेमका ने लिखा कि अगर एग्रीगेटर्स ने नियमों का उल्लंघन किया है तो कंपनियों पर जुर्माना लगाया जाए और उनके प्रबंधन को जवाबदेह ठहराया जाए. ड्राइवरों और यात्रियों को इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए. मैं चंडीगढ़ प्रशासक से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील करता हूं. खेमका आगे लिखते हैं कि दोषी को सजा दें, निर्दोष को नहीं. प्रतिबंध लगाने के बजाय नियमों लागू करवाएं.
चालक यूनियन ने हड़ताल तोड़ी
उबर और रैपिडो पर एक्शन के बाद चंडीगढ़ कैब यूनियन ने बुधवार को 100 दिन से जारी हड़ताल और धरना खत्म कर दिया. पिछले लंबे समय से यूनियन एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही थी.
यूनियन अध्यक्ष अमनदीप सिंह ने कहा कि बुधवार को धरने का 100वां दिन था. उन्होंने बताया कि चालकों के लिए 6 लाख रुपये का मेडिकल इंश्योरेंस, 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस और एग्रीगेटर कंपनियों के चंडीगढ़ में 24 घंटे चालू रहने वाले स्थानीय कार्यालय की मांग अब भी लंबित है. यूनियन करीब एक साल तीन महीने से मेडिकल इंश्योरेंस की मांग उठा रही थी, जिसे कंपनी ने नहीं माना है.
Banning Rapido, Uber and other cab aggregators from plying in Chandigarh city is ill-considered response that inconvenience citizens who depend on affordable, convenient transport and, more seriously, take away the livelihood of thousands of self-employed drivers….. 1/2













