फरीदाबाद: प्रॉपर्टी खरीदने के लिए एक-एक पैसा जोड़कर लोग प्रॉपर्टी खरीदते हैं. लेकिन वही प्रॉपर्टी खरीदने से पहले उसके कागजात कैसे पहचानें कि वह असली हैं या नकली है. आज के समय में फ्रॉड बहुत ज्यादा है. ऐसे में जो लोग फरीदाबाद में रह रहे हैं, फरीदाबाद में हर किसी का सपना होता है कि वह यहां पर जमीन खरीदें. लेकिन जमीन खरीदने से पहले उस प्रॉपर्टी के कागजात को कैसे पहचानें कि वह असली है या नकली, तो आइए एडवोकेट से जानते हैं.
Local18 से बातचीत में फरीदाबाद सेक्टर 12 कोर्ट, डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन कोर्ट के एडवोकेट कुणाल कांत शर्मा बताते हैं कि पिछले 25 सालों से मैं वकालत कर रहा हूं. प्रॉपर्टी के कागज असली हैं या नकली, इसकी पहचान कैसे करें. इस पर एडवोकेट कुणाल कांत शर्मा बताते हैं कि सबसे पहले जो प्रॉपर्टी होती है, उसके सेलर से आप ओरिजिनल पेपर देखिए. ओरिजिनल पेपर में पता लग जाता है. फिर उनके पेपर की ओरिजिनल प्रतिलिपि लीजिए. फिर जहां वह रजिस्टर्ड है, वहां आपको रिपोर्ट चेक करके आना है.
खरीदारों के साथ ऐसे होता है फ्रॉड
उन्होंने आगे बताया कि होता क्या है, पहले के जो स्टांप पेपर हैं, वह तो प्रिंटेड आते थे. 25 हजार रुपये का होता था, फिर 15 हजार का होता था, 5 हजार का होता था. अब आजकल कंप्यूटर से जनरेटेड पेपर निकलता है. वह आप 1 रुपये का लेंगे तो भी वैसा ही दिखाई देगा. 1 करोड़ का लेंगे तो भी वैसा ही दिखाई देगा. ओरिजिनल और फोटोकॉपी में सब मात खा जाते हैं, क्योंकि उसमें सरकार का स्टांप नहीं होता है. सरकार के पोर्टल पर जाते हैं, स्टांप वेंडर वहां पर नाम रजिस्टर करते हैं और उसको प्रिंटआउट निकाल देते हैं. उसमें कुछ गड़बड़ियां हैं, जो कंप्यूटर वाले कर सकते हैं. आपने वही देखकर छोड़ दिया तो फिर आपके साथ चीटिंग हो सकती है.
सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में चेक करें रिकॉर्ड
कुणाल कांत शर्मा बताते हैं कि आप उस पेपर को लेकर किसी भी तहसील में, जिस तहसील की संपत्ति आप ले रहे हो, उस तहसील के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में जाकर प्रॉपर सरकारी फीस जमा कराकर उसका रिकॉर्ड चेक कर सकते हैं. जो कॉपी सेलर ओरिजिनल देगा, सेम वैसी ही कॉपी नीचे रिकॉर्ड में मिलेगी.
प्रॉपर्टी बेचने वाला ही असली मालिक है यह कैसे सुनिश्चित करें, इस पर एडवोकेट कुणाल कांत शर्मा बताते हैं कि उसमें उसका नाम लिखा होता है, जो सेल डीड आपको दिखाएगा. उसमें उसका नाम होगा, उसका आधार कार्ड होगा, उसके नाम आधार कार्ड से मिलाइए. एक उसकी फोटो भी होती है. फोटो एक वैसे भी चिपकाते हैं और एक कंप्यूटर जनरेटेड फोटो होती है. जब आप सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में जाओगे, आपको उसकी फोटो एक प्रिंटआउट होकर मिलेगी.
ऑनलाइन चेक कर सकते हैं जानकारी
रजिस्ट्री से पहले प्रॉपर्टी पर किसी विवाद या केस की जानकारी कैसे लें, इस पर एडवोकेट कुणाल कांत शर्मा बताते हैं कि उस विवाद और केस की जानकारी वैसे आप ऑनलाइन चेक कर सकते हैं. लेकिन ज्यादा तो यही है कि आपको सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में जाकर पता चलेगा. मानकर चलो यदि किसी आदमी ने उस प्रॉपर्टी पर स्टे ले लिया. अब जो आदमी उसको खरीदेगा, उसको कैसे पता चलेगा कि वो स्टे है. जिस आदमी ने स्टे लिया होगा, वह सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में जाकर लिखवाएगा कि सर, मैंने इस संपत्ति पर कोर्ट से स्टे ले रखा है.
लोअर कोर्ट से हो या हाई कोर्ट से हो या सुप्रीम कोर्ट से हो या नंबर एक, तो इस तहसील में पता लग जाएगा. नंबर दो, जिस व्यक्ति से आप लेंगे, उससे अलग से आप एफिडेविट ले सकते हैं. इस प्रॉपर्टी को कहीं गिरवी नहीं रखा, कहीं मॉर्गेज नहीं किया या कोई केस तो नहीं है. उसके लिए आप अलग से पेपर ले सकते हैं.
ओरिजिनल पेपर देने में आनाकानी करे तो संभल जाएं
प्रॉपर्टी पर लोन या किसी तरह का बकाया है, यह कैसे पता किया जा सकता है, इस पर कुणाल कांत शर्मा बताते हैं कि अगर किसी ने लोन लिया होगा तो मैं आपको बता देता हूं. अगर वह कोई बैंक का लोन लेता है और अपनी प्रॉपर्टी को मॉर्गेज करवाता है. मॉर्गेज करवाने के साथ ही जितने भी उसके ओरिजिनल कागजात हैं, उसकी खुद की और उसकी पिछली चेन, जहां से वह प्रॉपर्टी चली है, वह सब ओरिजिनल बैंक के पास होते हैं. अगर वह ओरिजिनल पेपर देने में आनाकानी करे तो समझ लो वो प्रॉपर्टी कहीं न कहीं मॉर्गेज है.
रिकॉर्ड रूम में कराइए जांच
ब्रोकर या बेचने वाले की बात पर भरोसा करने के बजाय खरीदार को खुद कौन-सी जांच करनी चाहिए, इस पर एडवोकेट कुणाल कांत शर्मा बताते हैं कि सबसे पहले उससे आप फोटो कॉपी लीजिए. फोटोकॉपी नहीं देता है तो डॉक्यूमेंट का नंबर लीजिए और उसका आधार कार्ड लीजिए. सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में उसके रिकॉर्ड रूम में जांच कराइए, क्योंकि कोई भी डॉक्यूमेंट बनता है तो उसकी दो प्रतिलिपि बनती है. एक ओरिजिनल खरीदार को दे दी जाती है और एक जो होती है, रिकॉर्ड के लिए हमेशा रहती है.
उन्होंने कहा कि हमारा देश विकसित भारत की तरफ तरक्की कर रहा है. जैसे-जैसे शहर विकसित हो रहे हैं, देश विकसित हो रहा है. लोगों के अंदर जो है ना, वैसे ही चीटिंग की भावना भी पैदा हो रही है. आज जो आप प्रॉपर्टी ले रहे हो, 6 महीने बाद उस प्रॉपर्टी के रेट बढ़ रहे हैं. इसलिए चीटिंग जो है, बढ़ चुकी है. कोई भी चीज आप ले रहे हैं तो ध्यानपूर्वक लें. चाहे तो सलाह आप मुझसे ले सकते हैं, सारी सलाह निशुल्क दी जाएगी.











