नौकरी करने गया अंबाला का ये छोरा न्यूजीलैंड में बना वुशू चैंपियन, जानिए कौन हैं लालकुर्ती के रहने वाले पवन दीप सिंह?

On: September 19, 2026 7:37 PM
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Who is Pawan Deep Singh Ambala : अंबाला की गलियों से शुरू हुई मेहनत अब विदेशों में पहचान बना रही है. पवन दीप सिंह ने यह उपलब्धि वुशू कुंग फू फेडरेशन ऑफ न्यूजीलैंड की ओर से आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हासिल की है. पिछले साल उन्हें इसी चैंपियनशिप में रजत पदक मिला था. पवन दीप सिंह अंबाला कैंट की लालकुर्ती के रहने वाले हैं. पवन दीप सिंह कहते हैं कि खेलों के प्रति उनका लगाव बेहद कम उम्र में ही हो गया था. उनके पिता खुद भी फुटबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं.

अंबाला. जिस खेल का जुनून बचपन में अंबाला की गलियों और स्कूल से शुरू हुआ, वही अब विदेश की धरती पर भी पहचान बना रहा है. अंबाला कैंट की लालकुर्ती के रहने वाले पवन दीप सिंह ने न्यूजीलैंड में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया है. ऑकलैंड के नैटबॉल स्टेडियम में हुई इस प्रतियोगिता में गोल्ड जीतकर उन्होंने न सिर्फ परिवार, बल्कि अंबाला और हरियाणा का नाम भी रोशन किया है. पवन दीप सिंह ने यह उपलब्धि वुशू कुंग फू फेडरेशन ऑफ न्यूजीलैंड की ओर से आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हासिल की है. पिछले साल भी उन्होंने इसी चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था और उस समय उन्हें रजत पदक मिला था. उनकी इस उपलब्धि के बाद अंबाला स्थित उनके घर पर बधाई देने वालों का सिलसिला जारी है. पवन दीप सिंह कहते हैं कि खेलों के प्रति उनका लगाव बेहद कम उम्र में ही हो गया था. करीब छह साल की उम्र से ही उनकी खेलों में रुचि बढ़ने लगी थी. परिवार ने भी हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. उनके पिता बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत रहे हैं और खुद भी फुटबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं.

वुशू में किया डिप्लोमा

पवन ने भारत में रहते हुए वुशू को अपना करियर बनाया और स्पोर्ट्स कोच के तौर पर भी काम किया. उन्होंने एनआईएस पटियाला से वुशू में एक वर्षीय डिप्लोमा किया है और अंबाला में रहते हुए वह अपनी एकेडमी चलाने के साथ स्कूल में कोच की भूमिका भी निभाते रहे. वह युवाओं को खेलों से जोड़ने और नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करते. 2023 में पवन दीप सिंह वर्क वीजा पर न्यूजीलैंड पहुंचे थे. फिलहाल वह ऑकलैंड में रहते हैं और एक सुरक्षा कंपनी में पेट्रोलिंग अधिकारी के रूप में काम कर रहे हैं. हालांकि नौकरी की व्यस्तता के बावजूद उन्होंने वुशू का अभ्यास नहीं छोड़ा. वह नियमित रूप से ट्रेनिंग करते हैं और प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लेते हैं.

कायम रखा जुनून 

लोकल 18 से पवन की माता निर्मल कौर कहती हैं कि उनका बेटा छठी कक्षा से ही खेलों से जुड़ गया था. जब वह न्यूजीलैंड गया था, तब भी उसने परिवार से कहा था कि नौकरी के साथ वह खेल को जारी रखेगा. अब गोल्ड मेडल जीतने के बाद रिश्तेदारों और परिचितों के लगातार फोन आ रहे हैं. उनके भाई परमजीत सिंह कहते हैं कि पवन ने स्कूल स्तर से ही वुशू में कई पदक जीते हैं. जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी वह अपनी पहचान बना चुका है. भाई नौकरी के लिए विदेश गया था, लेकिन खेल के प्रति उसका जुनून आज भी उसी तरह कायम है.

क्षेत्र के पूर्व पार्षद नवीन यादव कहते हैं कि लालकुर्ती के युवाओं ने पहले भी अलग-अलग खेलों में उपलब्धियां हासिल की हैं. अब पवन दीप सिंह ने न्यूजीलैंड में गोल्ड जीतकर इलाके का नाम विदेश तक पहुंचाया है. छोटे से इलाके से निकलकर कोई युवा अपनी मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाए, यह पूरे क्षेत्र के लिए खुशी और गर्व की बात है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

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वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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