फरीदाबाद: अगर आपने अपनी कार या बाइक किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दी है, तो केवल भुगतान लेकर वाहन की चाबी सौंप देना पर्याप्त नहीं माना जाता. बिक्री के बाद रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट यानी RC को नए खरीदार के नाम दर्ज कराना भी बेहद जरूरी है. कई लोग वाहन बेचने के बाद इस प्रक्रिया को टाल देते हैं और मान लेते हैं कि अब उससे जुड़ी कोई जिम्मेदारी उनकी नहीं रहेगी. लेकिन रिकॉर्ड में नाम पुराना होने की स्थिति में चालान, दुर्घटना या किसी कानूनी विवाद से जुड़ी पूछताछ उनके लिए परेशानी खड़ी कर सकती है. इसलिए बिक्री के साथ दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करना विक्रेता के हित में रहता है.
वाहन बेचने के बाद RC ट्रांसफर कराना क्यों जरूरी
Local18 से बातचीत में फरीदाबाद सेक्टर 12 कोर्ट के एडवोकेट मोहन तिवारी बताते हैं कि इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले मौजूद हैं. नवीन कुमार बनाम विजय कुमार मामले में वर्ष 2018 के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि सिर्फ वाहन बेच देने से दर्ज मालिक की जिम्मेदारी स्वतः समाप्त नहीं मानी जाती. रिकॉर्ड में जिस व्यक्ति का नाम दर्ज रहता है, कानूनी तौर पर वाहन का मालिकाना उसी आधार पर देखा जाता है. वर्ष 2020 के एक अन्य फैसले का जिक्र करते हुए बताया कि उसमें भी नवीन कुमार मामले में स्थापित सिद्धांतों को आधार माना गया था.
RC अपडेट न होने पर पुराने मालिक की बढ़ सकती है परेशानी
इसका सीधा मतलब यह है कि वाहन बेचने के बाद RC अपडेट नहीं कराने पर पुराने दर्ज स्वामी को कानूनी प्रक्रिया में शामिल होना पड़ सकता है. उदाहरण के तौर पर यदि खरीदार उस वाहन से दुर्घटना कर देता है, तो मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड में दर्ज व्यक्ति की भूमिका सामने आ सकती है. हालांकि वास्तविक जिम्मेदारी तय करते समय बिक्री से संबंधित दस्तावेज, भुगतान, एग्रीमेंट और अन्य परिस्थितियों को भी देखा जा सकता है. इसलिए बिक्री के प्रमाण सुरक्षित रखना बेहद महत्वपूर्ण है.
चालान के मामले में भी पंजीकरण रिकॉर्ड अहम
मोहन तिवारी बताते हैं कि चालान के मामले में भी पंजीकरण रिकॉर्ड अहम भूमिका निभाता है. वाहन से संबंधित कार्रवाई में जिस व्यक्ति का नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, उसके पास नोटिस या संबंधित जानकारी पहुंच सकती है. ऐसे में बिक्री के बाद नाम परिवर्तन कराने से भविष्य में अनावश्यक विवाद की संभावना कम की जा सकती है.
खरीदार RC ट्रांसफर में देरी करे तो क्या करें
मोहन तिवारी बताते हैं कि अगर RC ट्रांसफर में खरीदार देरी कर रहा है, तो विक्रेता को बातचीत के माध्यम से उसे प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहना चाहिए. कॉल, मैसेज या लिखित सूचना के जरिए बिक्री की तारीख और हस्तांतरण कराने की बात दर्ज रखना उपयोगी हो सकता है. इसके बावजूद सामने वाला व्यक्ति सहयोग नहीं करता है, तो संबंधित RTO कार्यालय में आवेदन देकर बिक्री की जानकारी देने और उपलब्ध कागजात जमा करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है.
वाहन बिक्री के सभी दस्तावेज संभालकर रखें
एडवोकेट मोहन तिवारी बताते हैं कि वाहन बेचने वाले व्यक्ति को सेल एग्रीमेंट, भुगतान से जुड़े प्रमाण, डिलीवरी से संबंधित रिकॉर्ड और उपलब्ध अन्य कागजात संभालकर रखने चाहिए. खरीदार से हुई बातचीत के जरूरी रिकॉर्ड भी भविष्य में मददगार साबित हो सकते हैं. इससे किसी विवाद की स्थिति में यह दिखाने में सहायता मिल सकती है कि वाहन किस तारीख को किस व्यक्ति को सौंपा गया था.
RC ट्रांसफर को अंतिम औपचारिकता समझकर न टालें
मोहन तिवारी बताते हैं कि इसलिए वाहन बेचने के बाद सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि RC हस्तांतरण को अंतिम औपचारिकता मानकर नजरअंदाज न करें. खरीदार को नाम परिवर्तन की प्रक्रिया समय पर पूरी कराने के लिए कहें और अपनी तरफ से बिक्री से जुड़े सभी प्रमाण सुरक्षित रखें. छोटी सी सावधानी भविष्य में चालान, दुर्घटना या कानूनी विवाद से पैदा होने वाली बड़ी परेशानी से बचाने में मदद कर सकती है.












