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Faridabad Mud House: फरीदाबाद जैसे शहर में अगर मिट्टी, लकड़ी और पत्थरों से बना घर दिख जाए तो पहली नजर में यकीन करना मुश्किल होता है. सूरजकुंड का वनभोज मड हाउस करीब 30 साल पुराना है. गर्मी में इसकी मिट्टी की दीवारें अंदर ठंडक बनाए रखती हैं. यही वजह है कि यह घर आज भी लोगों और स्टूडेंट्स के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
अगर फरीदाबाद जैसे शहर में मिट्टी से बना घर देख लें तो पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो जाता है. चारों तरफ ऊंची इमारतों और फैक्ट्रियों के बीच सूरजकुंड इलाके में बना वनभोज मड हाउस काफी अलग नजर आता है. इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे हम अचानक किसी पहाड़ी इलाके में पहुंच गए हों. मिट्टी, लकड़ी और पत्थरों से बना यह घर लोगों को अपनी तरफ खींच रहा है.
आजकल घर बनाने के लिए ज्यादातर सीमेंट और कंक्रीट का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन वनभोज में पहुंचकर पुराने समय के घरों की याद आ जाती है. इस घर को बनाने में मिट्टी के साथ लकड़ी और पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है. हमारे बुजुर्ग भी पहले इसी तरह के घरों में रहते थे. मिट्टी की मोटी दीवारों की वजह से गर्मी में घर के अंदर ठंडक बनी रहती थी. वनभोज का यह घर उसी पुराने तरीके को आज के समय में हमारे सामने रखता है.
घर की बनावट सबसे पहले ध्यान खींचती है. शहर में इस तरह का मकान आसानी से देखने को नहीं मिलता. कोई इसकी दीवारों को देखता है तो कोई इसकी पूरी बनावट को करीब से समझने की कोशिश करता है. कई लोग परिवार के साथ यहां पहुंचते हैं. यह जगह उन लोगों को खास तौर पर पसंद आती है जिन्हें कुछ अलग देखना और जानना अच्छा लगता है.
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इसे हाल ही में बनाया गया होगा, लेकिन इसकी कहानी करीब 30 साल पुरानी है. लोकल18 से बातचीत में इकोप्लोर की फाउंडर प्रेरणा प्रसाद बताती हैं कि इसे आर्किटेक्ट रेवती कामथ और बसंत कामथ ने तैयार किया था. अब इस जगह को वनभोज नाम से एक प्राइवेट म्यूजियम के तौर पर विकसित किया गया है. यहां आने वाले लोग घर को देखने के साथ इसकी बनावट और इसे तैयार करने के तरीके के बारे में भी जान सकते हैं.
वनभोज की सबसे खास बातों में से एक यहां की प्राकृतिक ठंडक भी है. हम लोग जैसे ही मिट्टी से बने इस घर के अंदर कदम रखते हैं तो बाहर के माहौल से फर्क महसूस होने लगता है. प्रेरणा प्रसाद के मुताबिक घर के अंदर का तापमान बाहर की तुलना में कम रहता है. यही वजह है कि गर्मी के दिनों में यहां कुछ समय बिताना अच्छा लगता है. बिना किसी चमक दमक के बना यह घर अपने साधारण तरीके से ही लोगों को काफी प्रभावित करता है.
वनभोज में सिर्फ घूमने वाले लोग ही नहीं पहुंचते बल्कि आर्किटेक्चर कॉलेज के स्टूडेंट्स और स्कूल के बच्चे भी यहां आ चुके हैं. प्रेरणा प्रसाद बताती हैं कि इस जगह को देखकर बच्चों और युवाओं को घर बनाने के पुराने तरीकों को समझने का मौका मिलता है. मिट्टी, लकड़ी और पत्थरों से तैयार इस घर की बनावट उनके लिए भी काफी दिलचस्प रहती है.
फरीदाबाद और दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण की परेशानी किसी से छिपी नहीं है. लेकिन वनभोज पहुंचने के बाद आसपास का माहौल शहर की भीड़भाड़ से काफी अलग महसूस होता है. दिल्ली में प्रदूषण ज्यादा होने के दौरान भी यहां का माहौल साफ रहता है. हरियाली और प्राकृतिक चीजों से जुड़ी यह जगह लोगों को कुछ समय शांत होकर बिताने का मौका देती है.
यहां आपको चमचमाती इमारतों के बजाय मिट्टी से बना अनोखा घर देखने को मिलता है. आसपास का शांत माहौल भी इस जगह को खास बनाता है. परिवार के साथ आने वाले लोगों से लेकर स्टूडेंट्स तक यहां कुछ नया देख सकते हैं. फरीदाबाद में रहते हुए अगर आप शहर से अलग अनुभव लेना चाहते हैं तो यह जगह आपको जरूर पसंद आ सकती है.











