अंबाला: आज के दौर में जहां युवा अच्छी नौकरी और लाखों की सैलरी के लिए विदेश जाने का सपना देखते हैं, वहीं हरियाणा के 34 साल के साहिल सपरा ने लाखों रुपये की नौकरी छोड़कर लोगों की सेवा को अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया. दरअसल किसान परिवार से आने वाले साहिल के परिवार के कई सदस्य विदेशों में अच्छी नौकरियां कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपना रास्ता अलग चुना.
बता दें कि साल 2019 में सेवा की शुरुआत करने वाले साहिल आज हरियाणा के कई जिलों में जरूरतमंदों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध करवाने के साथ अब बच्चों की पढ़ाई का भी सहारा बन रहे हैं. साहिल मूल रूप से फतेहाबाद जिले के टोहाना के रहने वाले हैं. फार्मेसी की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने एक मल्टीनेशनल कंपनी में न्यूट्रीशन ऑफिसर के तौर पर काम किया.
नौकरी छोड़ चुना सेवा का रास्ता
अच्छी नौकरी और कमाई होने के बावजूद उनके मन में समाज के लिए कुछ करने की इच्छा थी. इसी सोच के साथ उन्होंने साल 2019 में अपनी नौकरी छोड़कर सेवा का रास्ता चुना. इसके बाद उन्होंने तेरा तेरा फाउंडेशन के माध्यम से अलग-अलग शहरों में रेट टू रेट मेडिकल सेवा शुरू की, जहां जरूरतमंद लोगों को दवाइयां बेहद कम कीमत पर उपलब्ध करवाई जाती हैं.
दवाइयों में दे रहे बंपर छूट
वहीं साहिल बताते हैं कि उनकी कोशिश रहती है कि बीमारी के समय दवाइयां लोगों की पहुंच से बाहर न हों. यही वजह है कि कई बार बाजार में ढाई सौ रुपये की मिलने वाली दवा भी यहां करीब 30 रुपये में लोगों को उपलब्ध करवाई जाती है. अंबाला, करनाल, सिरसा और फतेहाबाद समेत कई जगहों पर उनकी मेडिकल सेवा चल रही है. अब जल्द ही कुरुक्षेत्र और यमुनानगर में भी ऐसी सुविधा शुरू करने की तैयारी है. लेकिन साहिल की सेवा अब सिर्फ दवाइयों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंबाला सेक्टर-10 गुरुद्वारा साहिब में चल रहे औषधि केंद्र के साथ उन्होंने जरूरतमंद बच्चों के लिए ओपन बुक बैंक शुरू किया है.
बच्चों को भी दे रहे सुविधा
यहां दो अलमारियां रखी गई हैं, जिसमे एक में पढ़ाई से जुड़ी किताबें हैं, जबकि दूसरी में धार्मिक पुस्तकें रखी गई हैं. खास बात यह है कि यह लाइब्रेरी किसी औपचारिक सदस्यता या शुल्क पर आधारित नहीं है. जरूरतमंद बच्चा यहां आकर अपनी जरूरत की किताब ले सकता है और पढ़ाई पूरी होने के बाद उसे वापस रखकर अगली कक्षा की किताब ले सकता है. यानी जिस परिवार के पास हर साल नई किताबें खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं, उसके बच्चे के लिए यह छोटी सी पहल बड़ी मदद बन सकती है. साहिल ने बच्चों के लिए निशुल्क कॉपी और पेन की व्यवस्था भी की है. उनका कहना है कि कोई भी जरूरतमंद बच्चा यहां आकर पढ़ाई से जुड़ी सामग्री ले सकता है. उनकी कोशिश है कि आर्थिक परेशानी किसी बच्चे की पढ़ाई के रास्ते में रुकावट न बने.
लाखों रुपये की नौकरी छोड़ दी
वहीं लोकल 18 से बातचीत में साहिल सपरा ने बताया कि उनका सपना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतें ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचें. उन्होंने बताया कि वह खुद नेस्टले मल्टीनेशनल कंपनी में न्यूट्रीशन ऑफिसर रह चुके हैं और अच्छी नौकरी कर रहे थे, लेकिन साल 2019 में उन्होंने लाखों रुपये की नौकरी छोड़कर सामाजिक कार्यों में आगे बढ़ने का फैसला किया. आज वह अपनी कमाई और संपत्ति से होने वाली आय का इस्तेमाल लोगों की सेवा में कर रहे हैं.
परिवार और संगत का मिला साथ
साहिल कहते हैं कि उनका परिवार एनआरआई है और उनके भाई कनाडा समेत दूसरे देशों में नौकरी कर रहे हैं. परिवार की तरफ से उन्हें विदेश जाकर बेहतर करियर बनाने का विकल्प भी मिला, लेकिन उनके मन में भारत में रहकर लोगों की सेवा करने का संकल्प था. वह इसे गुरु नानक देव जी का आशीर्वाद और संगत का सहयोग मानते हैं. उनका कहना है कि सेवा का रास्ता उन्होंने अकेले नहीं चुना, बल्कि परिवार और संगत का भी उन्हें लगातार साथ मिलता रहा.
फिटनेस, शिक्षा और सामाजिक कार्यों से जोड़ने की जरूरत
साहिल का कहना है कि मेरा हरियाणा में लड़ाई-झगड़े और नशे जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. ऐसे समय में युवाओं को गलत दिशा से दूर करके फिटनेस, शिक्षा और सामाजिक कार्यों से जोड़ने की जरूरत है. उनका संदेश है कि युवा खुद आगे आएं और अपनी कमाई या समय में से जितना संभव हो, समाज के लिए योगदान दें. उनकी कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने सिर्फ सेवा करने की बात नहीं की, बल्कि अपनी नौकरी और कमाई छोड़कर इसे अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाया. अब सस्ती दवाइयों के बाद बच्चों के लिए किताब, कॉपी और पेन की यह नई पहल उनके उसी संकल्प को आगे बढ़ा रही है.













