अंबाला: शादी से पहले लड़का और लड़की की कुंडली मिलाई जाती है और 36 में से मिलने वाले गुणों के आधार पर वैवाहिक जीवन को लेकर अनुमान लगाया जाता है. आमतौर पर माना जाता है कि जितने अधिक गुण मिलते हैं, शादीशुदा जिंदगी उतनी ही अच्छी रहती है. लेकिन क्या अधिक गुण मिलने के बाद भी पति-पत्नी के बीच तलाक की नौबत आ सकती है?
ज्योतिष के अनुसार, केवल गुण मिलान के आधार पर वैवाहिक जीवन का आकलन करना पर्याप्त नहीं माना जाता. दरअसल कुंडली में ग्रहों की स्थिति और अन्य ज्योतिषीय पहलुओं को भी देखा जाता है. इसी विषय पर अंबाला के लाल किताब एस्ट्रोलॉजर कुमार गौरव ने कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं.
कुंडली मिलान के दौरान ये बातें जरूरी
बता दें कि कुमार गौरव के अनुसार, कई बार लड़का और लड़की की कुंडली में 36 में से 34, 32, 26 या 18 गुण मिलने के बावजूद वैवाहिक जीवन में परेशानियों की आशंका जताई जाती है. उनका कहना है कि कुंडली मिलान के दौरान कुछ ऐसे बिंदु भी होते हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है. केवल सॉफ्टवेयर के माध्यम से गुणों का मिलान कर शादी का फैसला लेने के बजाय ज्योतिषीय सलाह लेने की भी जरूरत होती है.
संतान सुख से जुड़े ज्योतिषीय संकेतों का आकलन
वहीं लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए एस्ट्रोलॉजर कुमार गौरव ने बताया कि कई लोग 36 में से 24, 28 या 30 गुण मिलने पर कुंडली का मिलान सही मानकर विवाह का फैसला कर लेते हैं. हालांकि, उनके अनुसार कुंडली में ग्रहों की स्थिति, भकूट दोष, नाड़ी दोष और नवमांश कुंडली जैसे पहलुओं का आकलन करना भी जरूरी है. उनका दावा है कि इन बिंदुओं को देखने के बाद ही वैवाहिक जीवन और संतान सुख से जुड़े ज्योतिषीय संकेतों का आकलन किया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि कुंडली में केवल गुणों का मिलान देखना पर्याप्त नहीं होता. कई बार 36 में से ज्यादा गुण मिलने के बाद भी वैवाहिक जीवन से जुड़े दूसरे ज्योतिषीय पहलुओं को देखना जरूरी होता है. इसलिए विवाह से पहले भकूट, नाड़ी दोष और नवमांश कुंडली की स्थिति का भी आकलन करना चाहिए.
वैवाहिक जीवन में परेशानियों के संकेत
वहीं कुमार गौरव के अनुसार, कुंडली में सूर्य, बुध और शुक्र की युति के साथ शुक्र-राहु, शनि-राहु और राहु-शुक्र की युति जैसी ग्रह स्थितियों को भी ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाता है. उनका दावा है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में ये युतियां दूसरे विवाह या वैवाहिक जीवन में परेशानियों के संकेत मानी जाती हैं. हालांकि, किसी एक ग्रह स्थिति के आधार पर विवाह टूटने का निष्कर्ष निकालने के बजाय पूरी कुंडली का आकलन करना जरूरी बताया जाता है.
उन्होंने यह भी कहा कि सूर्य और बुध की युति को कुछ परिस्थितियों में प्रेम विवाह के संकेत से जोड़कर देखा जाता है. वहीं ग्रहों की स्थिति के अनुसार उपाय सुझाए जाने की बात भी उन्होंने कही. एस्ट्रोलॉजर कुमार गौरव ने सूर्य-बुध की युति के संदर्भ में एक उपाय का उल्लेख किया. उनके मुताबिक, तांबे के लोटे में साबुत हरी मूंग भरकर, उस पर पीतल का ढक्कन लगाकर दान करने या बहते पानी में प्रवाहित करने की सलाह कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में दी जाती है.उनका दावा है कि इस तरह के उपाय से दो विवाह के योग से जुड़े बंधन को दूर करने में मदद मिल सकती है.
केवल गुणों की संख्या पर निर्भर रहना जरूरी नहीं
वहीं कुमार गौरव ने कहा कि कुंडली के अनुसार ईष्ट देव की पूजा करने की सलाह दी जाती है. उनके मुताबिक, व्यक्ति जिस देवी-देवता में श्रद्धा रखता है. उनकी पूजा और आराधना से उसे मानसिक शांति और सकारात्मकता का अनुभव हो सकता है. उन्होंने बताया कि ज्योतिषीय उपाय व्यक्ति की कुंडली और ग्रहों की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं, ऐसे में विवाह से पहले केवल गुणों की संख्या पर निर्भर रहने के बजाय सभी पहलुओं पर विचार करने की सलाह दी जाती है. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि तलाक, विवाह की सफलता या संतान सुख का निर्धारण ग्रहों की स्थिति से होने का कोई स्थापित वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. वैवाहिक जीवन में आपसी समझ, संवाद, विश्वास और अनुकूलता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.





