अंबाला: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब आम जनजीवन पर दिखाई देने लगा है. अंबाला में बिजली संकट के चलते जहां घरों में पानी की किल्लत खड़ी हो गई है, वहीं सरकारी कार्यालयों में भी कामकाज प्रभावित हो रहा है. दरअसल, अंबाला शहर की तहसील में जरूरी काम करवाने पहुंचे लोगों को बिजली न होने के कारण मायूस होकर लौटना पड़ रहा है.
हालात ऐसे हैं कि सरकारी कामकाज के लिए कर्मचारियों को मोबाइल की टॉर्च का सहारा लेना पड़ रहा है. इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है और वे जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग कर रहे हैं. बिजली संकट के कारण अंबाला तहसील परिसर में रजिस्ट्री और दूसरे जरूरी सरकारी काम प्रभावित हो रहे हैं. कोई मकान की रजिस्ट्री करवाने पहुंचा है, तो कोई अपने दस्तावेजों से जुड़ी कार्रवाई पूरी करने के लिए तहसील के चक्कर काट रहा है. बिजली न होने से लोगों के काम समय पर नहीं हो पा रहे हैं.
24 घंटे से बिजली गुल, मकान की रजिस्ट्री भी अटकी
लोकल 18 को अधिक जानकारी देते हुए अंबाला के देवी नगर निवासी हरमेश कुमार ने बताया कि उनके इलाके में पिछले 24 घंटे से बिजली नहीं है. वह अपने मकान की रजिस्ट्री करवाने तहसील पहुंचे थे, लेकिन वहां भी बिजली न होने के कारण उनका काम नहीं हो पाया.
उन्होंने कहा कि बिजली संकट के कारण ऐसा लग रहा है, जैसे लोग 50 साल पीछे चले गए हों. घरों में मोमबत्ती जलानी पड़ रही है और नहाने से लेकर बच्चों को स्कूल भेजने तक में परेशानी हो रही है. बिजली संकट का असर केवल सरकारी कामकाज तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो रही है.
घरों में पानी की किल्लत, नहाने तक के लिए नहीं मिला पानी
लोगों के अनुसार, बिजली न आने से घरों की पानी की टंकियां खाली हो रही हैं और पेयजल की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है. अंबाला शहर निवासी एसके शर्मा ने बताया कि उनके घर की पानी की टंकी खाली हो चुकी है. नौकरी पर जाने के लिए उन्हें नहाने तक का पानी नहीं मिला.
उन्होंने कहा कि बिजली के बिना फोटोस्टेट जैसे छोटे-छोटे काम भी रुक रहे हैं और लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है. बिजली संकट के कारण आम लोगों के जरूरी कामकाज प्रभावित हो रहे हैं.
छोटे बच्चों को अंधेरे में रहना पड़ रहा
वहीं, बलवंत सिंह ने बताया कि उनके घर के आसपास भी कल से बिजली नहीं है. वह कचहरी में जरूरी कागजी कार्रवाई करवाने पहुंचे थे, लेकिन वहां भी काम नहीं हो पाया. उन्होंने कहा कि घरों में छोटे बच्चे अंधेरे में रहने को मजबूर हैं और पानी की किल्लत ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
उन्होंने सवाल उठाया कि जब लोग नियमित रूप से बिजली के बिल भरते हैं, तो उन्हें ऐसी परेशानी का सामना क्यों करना पड़ रहा है. उन्होंने सरकार से मांग की कि जल्द से जल्द समस्या का समाधान किया जाए और बिजली विभाग के कर्मचारियों के साथ बैठकर जनता के हित में फैसला लिया जाए.
जनता को परेशान करना हमारा उद्देश्य नहीं
वहीं, दूसरी ओर अंबाला छावनी में बिजली यूनियन के प्रधान तिलक सिंह ने कहा कि कर्मचारियों का उद्देश्य जनता को परेशान करना नहीं है, बल्कि वे रोजगार और सरकारी विभागों के भविष्य को लेकर अपनी मांग उठा रहे हैं. उनका आरोप है कि सरकार की नीतियों के कारण सरकारी विभागों का निजीकरण बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में युवाओं के लिए सरकारी रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं.
70 से 80 बिजली फीडर बंद होने का दावा
तिलक सिंह के अनुसार, अंबाला में 70 से 80 बिजली फीडर बंद होने की सूचना मिली है और हजारों शिकायतें सामने आ रही हैं. उन्होंने कहा कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद कर्मचारियों को उनकी मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है.








