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Faridabad Water Crisis: न हलक तर करने को पानी, न मवेशियों के लिए बूंद भर सहारा… हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने फरीदाबाद के ग्रामीण इलाकों में हाहाकार मचा दिया है. बिजली गुल होते ही गांवों के वाटर प्लांट ठप पड़ गए हैं, स्कूल में नौनिहाल प्यास से बेहाल हैं और पशुपालक लाचार खड़े हैं. महंगे डीजल के बूते जनरेटर चलाकर प्यास बुझाना अब ग्रामीणों की पहुंच से बाहर हो रहा है.
Faridabad Water Crisis: घर में पीने का पानी नहीं है, पशुओं को पिलाने के लिए पानी नहीं मिल रहा और स्कूल पहुंचने वाले बच्चों को भी प्यासा रहना पड़ रहा है. कहीं पानी के प्लांट बंद पड़े हैं, तो कहीं जनरेटर चलाकर लोगों तक पानी पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. लेकिन महंगे डीजल के कारण प्लांट चलाना भी आसान नहीं है. हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब फरीदाबाद के ग्रामीण इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है. गांवों में रहने वाले लोगों के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है.
पशुओं को पानी पिलाना भी मुश्किल हो गया
खासकर उन परिवारों की परेशानी बढ़ गई है, जिनकी रोजी-रोटी खेती और पशुपालन पर निर्भर है. इंसान तो किसी तरह पानी खरीदकर अपना काम चला सकता है, लेकिन गाय-भैंस जैसे पशुओं को पानी पिलाना भी मुश्किल हो गया है. लोकल-18 की टीम जब गांव पहुंची, तो ग्रामीणों ने अपनी परेशानियां बताईं. गांव निवासी सत्यपाल सिंह बताते हैं कि बिजली की समस्या के कारण ग्रामीण व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है. खेती और पशुपालन करने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है. पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है.
पानी प्लांट पड़े हैं बंद
अगर बिजली विभाग का निजीकरण होता है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ सकता है. गांवों में रहने वाले लोगों के सामने पहले से ही कई समस्याएं हैं और अब बिजली नहीं होने से हमारी मुश्किलें और बढ़ गई हैं. पानी के प्लांट संचालक नरेन्द्र सिंह बताते हैं कि बिजली नहीं होने के कारण प्लांट बंद पड़े हैं. जनरेटर चलाकर पानी देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसमें डीजल का खर्च बहुत ज्यादा है. जनरेटर चलाकर पानी देने से कमाई नहीं हो रही है. एक तरफ लोगों को पानी देना जरूरी है, तो दूसरी तरफ पशुओं और दूसरे जरूरतमंदों तक पानी पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन गया है.
दो दिन से प्लांट बंद, बूंद-बूंद को तरसे मवेशी
विमला देवी बताती हैं कि बिजली नहीं होने से पशुओं को पानी पिलाना तक मुश्किल हो गया है. दो दिन से बिजली नहीं है और पानी का प्लांट भी बंद पड़ा है. कुछ देर के लिए प्लांट चला, तो केवल दो बोतल पानी लेकर पशुओं को पिला पाईं. डीजल महंगा पड़ रहा है. हमारे गांव में गाय-भैंस पालने वाले परिवारों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है.
स्कूलों में भी सूखा कंठ, बच्चों की बढ़ी परेशानी
स्कूल जाने वाले बच्चे भी पानी की किल्लत से परेशान हैं. छात्र बादल, मयंक और सक्षम बताते हैं कि स्कूल में पानी नहीं आ रहा है. जिस प्लांट से पानी आता था, वह बंद पड़ा है. सक्षम बताते हैं कि जब स्कूल में पानी ही नहीं मिलेगा, तो हम प्यास कैसे बुझाएंगे. घरों और गांव में भी पानी की परेशानी है. ऐसे में स्कूल में पानी नहीं मिलने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं.
समाधान की राह देख रहे बेबस ग्रामीण
गांव निवासी अजित कुमार बताते हैं कि पानी नहीं मिल रहा है. प्लांट बंद होने के कारण पानी की व्यवस्था नहीं हो पा रही है. बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण आम लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है. फरीदाबाद के ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट का असर अब सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है. पानी के प्लांट बंद होने से ग्रामीण, स्कूली बच्चे और पशुपालक सभी परेशान हैं. लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिजली कब आएगी और उन्हें पानी की इस परेशानी से कब राहत मिलेगी.
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Rahul Goel is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at News18 Hindi, managing State and Local18 content operations a…











