हरियाणा के हिसार सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (DCCB) में संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों के वेतन में अवैध कटौती कर करीब 2.20 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। इसके साथ ही 31 संविदा कर्मचारियों को बिना कारण नौकरी से हटाने और उनकी जगह सिफारिश के आधार पर 48 लोगों की भर्ती किए जाने का भी खुलासा हुआ है। यह पूरा मामला सहकारिता विभाग की विजिलेंस जांच में सामने आया है।
2010 से 2020 तक वेतन में की गई अवैध कटौती
जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, बैंक प्रबंधन से मिलीभगत कर संविदा कर्मचारियों की आपूर्ति करने वाली एजेंसी मैसर्स बालाजी सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड ने वर्ष 2010 से 2020 के बीच कर्मचारियों के वेतन में लगातार अवैध कटौती की। जबकि नियमों के अनुसार संविदा कर्मचारियों को डीसी रेट (सर्किल रेट) पर वेतन दिया जाना था।
जांच में पाया गया कि इस कटौती के जरिए हर महीने करीब 6 लाख रुपये का गबन किया गया।
31 कर्मचारियों को हटाया, 48 को सिफारिश पर रखा
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि वर्ष 2020 में 31 संविदा कर्मचारियों को बिना नोटिस और बिना किसी ठोस कारण के नौकरी से हटा दिया गया। आदेशों के बावजूद इन कर्मचारियों की दोबारा बहाली नहीं की गई।
इसके उलट, उनकी जगह 48 नए कर्मचारियों को सत्ताधारी दल के नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों की सिफारिश पर भर्ती कर लिया गया। इन भर्तियों में विज्ञापन और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
सीएम विंडो शिकायत से खुला मामला
दरअसल, पीड़ित संविदा कर्मचारियों ने सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कर बैंक और एजेंसी पर कुल आठ गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत के आधार पर जब विजिलेंस जांच हुई, तो सभी आरोप सही पाए गए। वेतन कटौती को लेकर एजेंसी की ओर से दी गई दलीलें पूरी तरह निराधार साबित हुईं।
2.20 करोड़ वसूलने की सिफारिश
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में बैंक प्रबंधन को निर्देश देने की सिफारिश की है कि एजेंसी से 2.20 करोड़ रुपये की वसूली कर यह राशि प्रभावित कर्मचारियों को लौटाई जाए। रिपोर्ट के आधार पर हरको बैंक मुख्यालय ने भी मामले को गंभीर मानते हुए आवश्यक कार्रवाई के संकेत दिए हैं।









