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हरियाणा के सोहना के हरचंदपुर (निमोठ) के रहने वाले कृष्ण मोहन यादव अपने घर के लिए गिर गाय लेकर आए थे. गिर गाय के घर पर कदम पड़ते ही कृष्ण मोहन के परिवार की किस्मत चमक गई. उनकी जिंदगी में कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. अब हर साल उनके बैंक खाते में 5 करोड़ रुपये आते हैं. कृष्ण मोहन की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई है. एक गिर गाय से कृष्ण मोहन की जिंदगी कैसे बदली, आइये जानते हैं…..

कहा जाता है कि गो माता की सेहत और खुशी में ही शुद्धता का राज छिपा होता है. गाय से प्रकृति का सबसे शुद्ध और पौष्टिक उपहार दूध मिलता है. कृष्ण मोहन यादव की पूरी जिंदगी एक गिर गाय ने बदल दी. आज वो ‘गिर अमृतफल’ के नाम से गौशाला चलाते हैं. करोड़ों का टर्नओवर है. वो एक गिर गाय अपने परिवार के लाए थे. फिर दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए गिर गाय लेकर आए. यह सिलसिला आगे बढ़ा और उन्होंने अपनी गौशाला खोल ली. यह गौशाला देश की हाईटेक गौशाला में से एक है. कृष्ण मोहन ने यह सब कैसे किया, आइये जानते हैं….

कृष्ण मोहन यादव का हाईटेक डेयरी फॉर्म सोहना में करीब 150 एकड़ में फैला हुआ है. 19 और 17 एकड़ में दो गोशाला हैं और 105 एकड़ में गायों के लिए चारा उगाते हैं. पोस्ट ग्रेजुएट कृष्ण मोहन 2014 में अमेरिका गए. वहां चार साल नौकरी की. घर लौटे तो एक गिर गाय अपने परिवार की जरूरत के लिए ली. फिर यह सिलसिला आगे बढ़ता गया.

हाईटेक गोशाला का निर्माण स्वीडन की कंपनी से करवाया. 80×700 फीट का शेड गायों के लिए बनवाया. गौशाला की सबसे बड़ी खासियत यही है कि कोई भी गाय बंधी नहीं है. गिरि गोशाला में करीब 400 गाय हैं. एक हजार लीटर दूध रोजाना निकलता है.
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गिर गाय की खासियत क्या होती है, इस सवाल के जवाब में कृष्ण मोहन बताते हैं, ‘गिर गाय दूध बहुत अच्छा देती है. गिर गाय की नस्ल पूरी दुनिया में श्रेष्ठ है. जिस गाय में जितना ज्यादा हंप होगा, वो उतना ही ज्यादा दूध देगी.’

गिर गाय को क्या-क्या खिलाते हैं, इस सवाल का उत्तर देते हुए कृष्ण मोहन कहते हैं, ‘हम गायों को करी पत्ता, मोरंगा भी खिलाते हैं. 12 एकड़ में करी पत्ता लगाया हुआ है. देसी गाय को अगर आप शलगम-नमक जिस दिन भी ज्यादा खिला देंगे, अगले ही दूध का स्वाद बदल जाएगा. गायों को लाहौरी नमक चाटने के लिए देते हैं. गाय अपनी जरूरत के मुताबिक इस नमक को चाटती है.’

गिर गायों को मक्का-गेहूं, बार्ली (गर्मियों में) जबकि बाजरा सर्दियों में खिलाया जाता है. फाइबर गेहूं चोकर, सोयाबीन चोकर और चना चोकर दिया जाता है. इसके अलावा, सरसों-मूंगफली की खली खिलाई जाती है. गाय को शकरकंद, श्लगम, गाजर भी खिलाते हैं. दूध और घी का रेट पूछे जाने पर कृष्ण मोहन बताते हैं कि गिर गाय का दूध 150/- प्रति लीटर जबकि घी का रेट 4360 रुपये प्रति किलो है. कृष्ण मोहन ने बताआ कि भारतीय नस्ल की गाय गाय 15 साल तक दूध देती है.

कृष्ण मोहन बताते हैं कि गौशाला में बिलोना विधि से मक्खन निकालकर घी बनाया जाता है. मिट्टी के मटकों में धीमी आंच पर मक्खन की स्लो कुकिंग की जाती है, तब जाकर शुद्ध गाय का घी तैयार होता है.

कृष्ण मोहन डेयरी से होने वाली इनकम के सवाल पर वो कहते हैं, ‘दूध और दूध के उत्पाद से 5 करोड़ रुपये सालाना कमाते हैं. वेबसाइट और ऐप के जरिये ग्राहकों से जुड़े हैं.’











