क्या मां के पेट में पल रहे बच्चे का हो सकता है ऑपरेशन? डॉक्टर ने बताया अजन्मे शिशु की कब बचाई जा सकती जान

On: August 3, 2026 1:26 PM
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Faridabad News: क्या आपने कभी सोचा है कि मां के गर्भ में पल रहे बच्चे का भी इलाज या ऑपरेशन हो सकता है? आधुनिक फीटल मेडिसिन ने इसे संभव बना दिया है. कुछ गंभीर स्थितियों में डॉक्टर गर्भ में ही खून चढ़ाने, लेजर थेरेपी, शंट लगाने और अन्य प्रक्रियाओं से बच्चे की जान बचाने की कोशिश करते हैं. जानिए जानते हैं कि किन मामलों में यह इलाज किया जाता है और इसके क्या फायदे व जोखिम हैं.

फरीदाबाद: मां के पेट में पल रहे बच्चे का इलाज भी किया जा सकता है. सुनने में यह बात हैरान करने वाली लग सकती है, लेकिन आज की मेडिकल साइंस ने इसे संभव बना दिया है. अब कुछ ऐसी गंभीर स्थितियां होती हैं, जिनमें डॉक्टर बच्चे के जन्म का इंतजार नहीं करते, बल्कि गर्भ में रहते हुए ही उसका इलाज करते हैं. इससे कई बार बच्चे की जान बचाई जा सकती है और जन्म के बाद होने वाली बड़ी परेशानियों से भी बचाव हो सकता है. हालांकि, हर गर्भवती महिला या बच्चे को ऐसे इलाज की जरूरत नहीं होती. यह फैसला पूरी जांच और विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह के बाद ही लिया जाता है.

फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल की फीटल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. रीमा भट्ट बताती हैं कि मां के गर्भ में पल रहे बच्चे का इलाज अब संभव है. हर बच्चे को गर्भ में इलाज की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन कुछ ऐसे मामले होते हैं कि जहां समय रहते इलाज करना जरूरी हो जाता है. अगर सही समय पर उपचार किया जाए तो बच्चे की जान बचाई जा सकती है और गर्भावस्था को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है.

संक्रमण के खतरे में होता है इलाज
डॉ. रीमा भट्ट बताती हैं कि कई बार गर्भ में पल रहे बच्चे को एनीमिया यानी खून की कमी हो जाती है. ऐसा कई कारणों से हो सकता है, जैसे किसी संक्रमण की वजह से या फिर आरएच नेगेटिव मां के मामले में. ऐसी स्थिति में अल्ट्रासाउंड की मदद से गर्भ में ही बच्चे को खून चढ़ाया जाता है. इससे बच्चे की हालत सुधर सकती है और उसकी जान बचाई जा सकती है.

डॉ. रीमा भट्ट बताती हैं कि जुड़वा बच्चों की गर्भावस्था में भी कई बार परेशानी आ जाती है. जब दोनों बच्चे एक ही प्लेसेंटा साझा करते हैं, तो कई बार एक बच्चे को ज्यादा और दूसरे को कम खून मिलने लगता है. इससे एक बच्चा तेजी से बढ़ता है और दूसरा कमजोर रह जाता है. ऐसे मामलों में लेजर की मदद से इलाज किया जाता है, जिससे दोनों बच्चों के बीच खून का असंतुलन कम किया जा सके.

गर्भावस्था को आगे बढ़ाने में मदद
डॉ. रीमा भट्ट बताती हैं कि कुछ बच्चों के फेफड़ों या पेट में गर्भ के दौरान पानी भर जाता है. ऐसी स्थिति में पहले उस पानी की जांच की जाती है और जरूरत पड़ने पर शंट लगाया जाता है, ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकलता रहे. इससे बच्चे को गर्भ में ही राहत मिलती है और गर्भावस्था को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है. कुछ मामलों में रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं का इलाज भी गर्भ में रहते हुए किया जा सकता है.

गर्भ में पल रहे बच्चे की भी सर्जरी
डॉ. रीमा भट्ट बताती हैं कि आज विज्ञान काफी आगे बढ़ चुका है. जिस तरह बड़े लोगों का ऑपरेशन के जरिए बीमारी का इलाज किया जाता है, उसी तरह अब कुछ मामलों में गर्भ में पल रहे बच्चे की भी सर्जरी की जा सकती है. इन प्रक्रियाओं का मकसद बच्चे को जन्म से पहले बेहतर इलाज देना और उसके भविष्य को सुरक्षित बनाना होता है.

मां के लिए ये प्रक्रिया सुरक्षित
डॉ. रीमा भट्ट बताती हैं कि गर्भ में होने वाला ये इलाज पूरी तरह जोखिम से मुक्त नहीं होता. समय से पहले प्रसव पीड़ा शुरू हो सकती है या पानी की थैली फटने जैसी परेशानी आ सकती है. लेकिन अगर इलाज न किया जाए, तो कई बार बच्चे की जान भी जा सकती है. इसलिए जब इलाज की जरूरत होती है, तब उसका फायदा जोखिम से ज्यादा होता है. सही कारण होने पर और पूरी सावधानी से प्रक्रिया की जाए तो करीब 90 प्रतिशत मामलों में अच्छे नतीजे मिलने की उम्मीद रहती है. मां के लिए भी यह प्रक्रिया आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती है.

गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच जरूरी
डॉ. रीमा भट्ट बताती हैं कि सबसे जरूरी बात समय पर सही इलाज है. अगर बच्चे को समय रहते खून चढ़ा दिया जाए, जरूरत पड़ने पर शंट लगा दिया जाए या दूसरी जरूरी प्रक्रिया कर दी जाए तो कई बच्चों की जान बचाई जा सकती है. यही वजह है कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच कराना और किसी भी परेशानी को नजरअंदाज न करना बहुत जरूरी है. सही समय पर लिया गया फैसला बच्चे को स्वस्थ जीवन देने में बड़ी भूमिका निभा सकता है.

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आर्यन सेठ

आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…

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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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