‘काम पर ही नहीं जा पाया’, कपड़ा मार्केट से मॉडल टाउन तक बारिश ने खोली अंबाला निगम की पोल

On: August 4, 2026 5:53 PM
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अंबाला. रातभर आसमान से बरसी बारिश ने मंगलवार सुबह अंबाला शहर की ऐसी तस्वीर पेश की, जिसने एक बार फिर नगर की जल निकासी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. कुछ ही घंटों की तेज बारिश ने शहर की सड़कें तालाब में बदल दी हैं. कहीं घुटनों तक पानी है तो कहीं सड़कें पूरी तरह गायब हो चुकी हैं. हालात ऐसे बन गए है कि लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है. स्कूल जाने वाले बच्चे, काम पर निकलने वाले कर्मचारी, दुकानदार और रेहड़ी संचालक सभी बारिश के पानी के बीच अपनी रोजमर्रा की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद करते नजर आए है.

सभी रेलवे अंडरब्रिज बंद

ग्राउंड रिपोर्ट करने पहुंची लोकल 18 की टीम ने पाया कि एशिया का प्रसिद्ध कपड़ा मार्केट, नदी मोहल्ला, रामबाग मैदान, मॉडल टाउन सहित कई प्रमुख इलाकों में जलभराव ने लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं. सड़कों पर पानी इस कदर जमा था कि यह पहचानना मुश्किल हो रहा था कि सड़क कहां खत्म हो रही है और कहां शुरू हो रही है. दोपहिया वाहन पानी में बंद होते दिखे. कई कारें बीच रास्ते में फंस गईं और लंबा ट्रैफिक जाम लग गया. शहर के लगभग सभी रेलवे अंडरब्रिज पानी से भर गए, जिन्हें प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर बंद कर दिया है. इससे लोगों को कई किलोमीटर दूरी तय कर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा है.

रोजी-रोटी छिनने की वजह

बारिश ने सिर्फ आवाजाही ही नहीं रोकी, बल्कि रोज कमाने-खाने वालों की कमर भी तोड़ दी है. लोकल 18 से रामबाग मैदान के पास सब्जी की रेहड़ी लगाने वाले गौतम ने बताया कि जलभराव इतना ज्यादा था कि वे आज काम पर ही नहीं जा पाए. बारिश हमारे लिए राहत नहीं, बल्कि रोजी-रोटी छिनने का कारण बन जाती है, क्योंकि हल्की बारिश में भी शहर का यही हाल हो जाता है. गंदे पानी में बच्चों का निकलना मजबूरी है. इससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. स्थानीय निवासी हरीश कुमार ने बताया की उनकी आयु 78 वर्ष हो गई है. जगाधरी गेट और आसपास के क्षेत्रों में हर बारिश के बाद यही हालात बन जाते हैं, पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है.

बड़े-बड़े वादे, लेकिन…

हरीश कहते हैं कि चुनाव के समय नेता और जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन बारिश आते ही सारी तैयारियों की पोल खुल जाती है. नालियों का गंदा पानी और बारिश का पानी सड़कों पर मिल जाता है, जिससे लोगों को त्वचा रोग, खुजली और संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इलाज पर हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान आज तक नहीं मिला है.

स्थायी योजना की मांग

स्थानीय निवासी कमल ने बताया कि अब तो घुटनों तक पानी में साइकिल चलाकर काम पर जाना उनकी मजबूरी बन चुका है. यदि मानसून से पहले नालों और सीवरेज की नियमित सफाई कर दी जाए तो शहर को हर साल इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़े. उन्होंने प्रशासन से अपील की कि अस्थायी इंतजामों के बजाय जल निकासी की स्थायी योजना बनाई जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके. कमल कहते हैं कि बारिश थमने के बाद भी शहर के कई हिस्सों में घंटों तक पानी जमा रहता है. अब अंबाला में बारिश राहत नहीं, बल्कि चिंता का दूसरा नाम बन चुकी है. जनता सवाल पूछ रही है कि आखिर कब तक हर मानसून में अंबाला यूंही पानी में डूबता रहेगा, कब इससे राहत मिलेगी.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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