
ED Action in ₹645 Crore Bank Fraud Case: हरियाणा और चंडीगढ़ से जुड़े करीब ₹645 करोड़ के सरकारी फंड डायवर्जन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। एजेंसी ने चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में एक साथ 14 ठिकानों पर तलाशी ली। कार्रवाई के दायरे में कई ज्वेलरी कारोबारियों और उनसे जुड़े परिसरों को शामिल किया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी खातों से निकाली गई रकम को शेल कंपनियों और विभिन्न बैंक खातों के जरिए घुमाने के बाद कुछ रकम ज्वेलर्स तक पहुंचाई गई और उसके बदले नकदी हासिल की गई।
ज्वेलर्स के खातों तक पहुंची मनी ट्रेल
यह कार्रवाई उस मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है, जिसमें ED सरकारी विभागों, सार्वजनिक संस्थाओं और कुछ निजी स्कूलों के बैंक खातों से रकम निकालने और फिर उसे कई स्तरों पर ट्रांसफर किए जाने की जांच कर रही है। ED की जांच में सामने आया है कि सरकारी खातों से निकाली गई रकम सीधे एक जगह नहीं रखी गई, बल्कि कई मध्यस्थ और शेल संस्थाओं के बैंक खातों के जरिए आगे भेजी गई। जांच एजेंसी ने अदालत के समक्ष पहले दावा किया था कि करीब ₹203 करोड़ एक शेल फर्म के जरिए ट्रांसफर किए गए और बाद में रकम का एक हिस्सा ज्वेलर्स समेत विभिन्न तीसरे पक्षों तक पहुंचा। ED का आरोप है कि इस तरह के लेनदेन का इस्तेमाल रकम की लेयरिंग और उसके मूल स्रोत को छिपाने के लिए किया गया।
जांच के दायरे में आए कई ज्वेलर्स
मंगलवार की तलाशी में मलिक ज्वेलर्स और KLG ज्वेल्स समेत कई ज्वेलरी कारोबारियों और संबंधित परिसरों को शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस मामले की पिछली जांच में भी ज्वेलर्स के नाम सामने आए थे। जांच एजेंसी अब मंगलवार की तलाशी में मिले दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य सामग्री को पहले से जुटाए गए सबूतों के साथ मिलाकर देख रही है।
कैसे खुला ₹645 करोड़ का मामला?
यह मामला IDFC First Bank की चंडीगढ़ शाखा से जुड़े बैंक फर्जीवाड़े से शुरू हुआ। ED के अनुसार जांच में हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़ और पंचकूला के दो निजी स्कूलों के बैंक खातों से करीब ₹645 करोड़ के गबन का पता चला। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी विभागों के लिए रखी जाने वाली फिक्स्ड डिपॉजिट के संबंध में फर्जी दस्तावेज, FDR, RTGS/NEFT अनुरोध और बैंक रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद रकम को अलग-अलग शेल संस्थाओं के खातों में ट्रांसफर किया गया। मामले में जिन मध्यस्थ संस्थाओं का नाम सामने आया है, उनमें कैप्को फिनटेक सर्विसेज, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, RS ट्रेडर्स और SRR प्लानिंग गुरु प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन संस्थाओं के जरिए रकम को अलग-अलग खातों में घुमाया गया।
ज्वेलर्स से नकदी में बदलने का आरोप
जांच का एक अहम पहलू बैंकिंग लेनदेन और नकदी के बीच का संबंध है। ED ने अदालत में दावा किया है कि शेल कंपनियों से रकम ज्वेलर्स और अन्य तीसरे पक्षों को ट्रांसफर की गई और इन लेनदेन के बदले नकदी हासिल की गई। ED ने अदालत को बताया था कि सैकड़ों करोड़ रुपये विभिन्न ज्वेलर्स को ट्रांसफर किए गए और उनके बदले नकदी ली गई। एजेंसी का कहना है कि इस नकदी को बाद में चंडीगढ़-ट्राइसिटी में विभिन्न लोगों तक पहुंचाया गया। इससे जांच का दायरा केवल बैंक खातों से रकम निकालने तक सीमित नहीं रहा है। अब एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम किन-किन खातों और कारोबारों से होकर गुजरी और इसके अंतिम लाभार्थी कौन थे।













