श्मशान का नाम सुनते ही मन में कई तरह की मान्यताएं और सवाल एक साथ घुमड़ने लगते हैं. कहा जाता है कि अंतिम संस्कार के बाद श्मशान से लौटते समय पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए, लेकिन क्यों. लोकल 18 से हरियाणा स्थित बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि जब किसी शव का अंतिम संस्कार किया जाता है तो वहां मौजूद लोगों को लकड़ी का एक-एक तिनका दिया जाता है. श्मशान से बाहर निकलते समय उस तिनके के दो टुकड़े करके पीछे की ओर फेंक दिए जाते हैं. इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए. ऐसा इसलिए ताकि उस जीवात्मा के साथ दोबारा मोह न जुड़ जाए. यही कामना की जाती है कि आत्मा की सद्गति हो और वह भटके नहीं. महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि यह भी मान्यता है कि अंतिम संस्कार के बाद श्मशान से निकलते समय किसी को आवाज लगाकर साथ चलने के लिए नहीं कहना चाहिए. ऐसा करने से दूसरी बुरी आत्माएं भी साथ आ सकती हैं. महंत कामेश्वरानंद बताते हैं कि छोटे बच्चों को भी सामान्य परिस्थितियों में श्मशान नहीं ले जाना चाहिए. 18 से 20 साल की उम्र के युवक परिपक्व हो जाते हैं और वह ऐसी परिस्थितियों को समझने में सक्षम होते हैं.








