फरीदाबाद. जन्माष्टमी का त्योहार जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है. 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी और इसे लेकर फरीदाबाद के बल्लभगढ़ मार्केट में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी चीजों की खरीदारी शुरू हो गई है. यहां कान्हा जी की पोशाक, बांसुरी, मुकुट, झूले, मोती और सजावट से जुड़ा सामान आसानी से मिल रहा है. जिन चीजों को खरीदने के लिए लोग अक्सर मथुरा और वृंदावन का रुख करते हैं, वही सामान बल्लभगढ़ में भी उचित रेट पर मिल रहा है. इसी वजह से बल्लभगढ़ ही नहीं, बल्कि दिल्ली एनसीआर और आसपास के इलाकों से भी ग्राहक यहां खरीदारी करने पहुंच रहे हैं. स्थानीय लोगों के लिए यह बाजार इसलिए भी खास है, क्योंकि बल्लभगढ़ की भाषा और संस्कृति में ब्रज की झलक दिखाई देती है और यहां से मथुरा वृंदावन भी ज्यादा दूर नहीं है.
कितने की ड्रेस
लोकल 18 से दुकानदार विशाल गुप्ता बताते हैं कि बल्लभगढ़ के इस बाजार में मेरी दुकान करीब 1902 से है. हालांकि कान्हा जी की पोशाक और उनसे जुड़ा सामान बेचने का काम पिछले करीब 25 साल से कर रहे हैं. जिन चीजों के लिए लोग मथुरा और वृंदावन जाते हैं, वह सामान अब मेरी दुकान पर आसानी से उपलब्ध है. मेरे यहां जरी वर्क की पोशाक से लेकर अलग-अलग डिजाइन और साइज की ड्रेस मौजूद हैं. 8 से 9 नंबर तक की ड्रेस यहां मिलती हैं, जिनकी कीमत 2350 रुपये और 2800 रुपये तक है.
छह नंबर साइज की ज्यादा मांग
विशाल गुप्ता बताते हैं कि कान्हा जी की मूर्तियों की शुरुआत एक नंबर साइज से होती है. एक नंबर की मूर्ति करीब 200 रुपये में मिलती है, जबकि इसके बाद 300 रुपये और बड़े साइज में 500 रुपये तक की मूर्तियां उपलब्ध हैं. प्रिंटेड पीस की कीमत करीब 600 रुपये से शुरू होती है. 900 रुपये, 1100 रुपये, 2500 रुपये और 4400 रुपये तक के विकल्प मौजूद हैं. घरों में पूजा के लिए लोग आमतौर पर पांच या छह नंबर साइज की कान्हा जी की मूर्ति लेते हैं, जिसकी कीमत करीब 1700 रुपये से 3000 रुपये तक रहती है.
डिस्काउंट बताने की जरूरत नहीं
विशाल के मुताबिक, मेरी दुकान पर ठाकुर जी के लिए अलग-अलग तरह के झूले भी मिलते हैं. लकड़ी के झूले के साथ मीनाकारी और स्टील के झूले भी उपलब्ध हैं. इनकी कीमत साइज और डिजाइन के हिसाब से तय होती है और करीब 750 रुपये से शुरू होकर 4500 रुपये तक जाती है. मेरे यहां ठाकुर जी से जुड़ा काम पूरे 12 महीने चलता है. पुराने ग्राहकों को मेरी दुकान की नीति पहले से मालूम है, इसलिए अलग से डिस्काउंट या सेल बताने की जरूरत नहीं पड़ती. सामान की मात्रा के हिसाब से रेट तय होता है. किसी ग्राहक को हजार रुपये का सामान चाहिए तो उसका रेट अलग होगा और लाखों रुपये की खरीदारी करने वाले ग्राहक के लिए कीमत अलग तय की जाती है.
कहां से आता सामान
विशाल बताते हैं कि मेरी दुकान पर दिल्ली तक से ग्राहक खरीदारी करने आते हैं. मथुरा और वृंदावन से बल्लभगढ़ नजदीक पड़ता है, इसलिए यहां कारोबारियों और ग्राहकों के लिए सामान मंगवाना आसान रहता है. दुकान में आने वाले सामान में करीब 50 प्रतिशत आइटम मथुरा और वृंदावन से आते हैं. करीब 30 प्रतिशत सामान राजस्थान से आता है, जिसमें मुख्य रूप से मुकुट का काम शामिल है. करीब 20 प्रतिशत रिबन, मोती और दूसरी सजावटी चीजें दिल्ली से आती हैं.











