Haryana News: हरियाणा में पराली (धान के फसल अवशेष) प्रबंधन को लेकर जागरूकता और सरकारी सख्ती के चलते बड़ा सुधार देखने को मिला है। कृषि विभाग के अनुसार वर्ष 2016 की तुलना में पराली जलाने की घटनाओं में 90 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। हालांकि, राज्य में अभी भी करीब 13 हजार फसली अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनों की कमी बनी हुई है, जिसे धान कटाई सीजन से पहले पूरा करने की योजना है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों की समीक्षा के दौरान हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि किसानों को CRM मशीनों की खरीद पर सब्सिडी दी जाएगी। इसका उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं को और कम करना है।
उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर भी प्रगति हुई है। कुल 889 औद्योगिक इकाइयों को निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (CEMS) लगाने के निर्देश दिए गए थे, जिनमें से 871 इकाइयों ने इसे स्थापित कर लिया है। इनमें से 735 इकाइयां सक्रिय रूप से डेटा साझा कर रही हैं। बड़े और मध्यम उद्योगों को जुलाई 2026 तक और लघु उद्योगों को सितंबर 2026 तक प्रदूषण नियंत्रण उपकरण अपग्रेड करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने एनसीआर के सात नगर निगमों की 2026 की सिटी एक्शन प्लान की समीक्षा की। इस योजना में प्रदूषण नियंत्रण के लिए 360 डिग्री दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिसमें विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया गया है।
एक्शन प्लान के तहत सड़क धूल नियंत्रण, निर्माण और विध्वंस से होने वाले उत्सर्जन में कमी, ट्रैफिक जाम वाले स्थानों का समाधान, वायु निगरानी नेटवर्क का विस्तार और हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रिक बसों और ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, पार्किंग सुविधाओं के विस्तार और सड़कों के पूर्ण पेवमेंट पर भी जोर दिया गया है।
नगर निगमों को पुराने ठोस कचरे को 31 मार्च तक पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य दिया गया है। साथ ही निर्माण एवं विध्वंस कचरे के प्रबंधन के लिए प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने और हर 25 वर्ग किलोमीटर में एक सेकेंडरी कलेक्शन प्वाइंट बनाने की योजना है।
बैठक में मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग मशीनों, पानी के छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन के उपयोग से धूल नियंत्रण उपायों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। सरकार का लक्ष्य एनसीआर में वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाना और प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करना है।
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