Haryana News: हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ खर्च के मामले में देशभर में अव्वल है। यही नहीं, इस शहर के परिवार कमाई के मामले में भी आगे हैं। टाटा के 100 शहरों पर किए गए अध्ययन द मेनी अर्बन इंडियाज के अनुसार, छह बड़े महानगरों में औसत सालाना घरेलू आय के मामले में बेंगलुरु पहले और चंडीगढ़ दूसरे स्थान पर है। वहीं, प्रति परिवार खर्च में चंडीगढ़ शीर्ष पर है।
बेंगलुरु कमाई और बचत में आगे
रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु कमाई और बचत में आगे है, जबकि दिल्ली-एनसीआर कुल खपत के मामले में देश का सबसे बड़ा बाजार है। बेंगलुरु की औसत सालाना घरेलू आय छह बड़े महानगरों में सबसे अधिक है। चंडीगढ़ इसके बाद दूसरे स्थान पर है। हालांकि, अधिक औसत आय का मतलब यह नहीं है कि उच्च आय वाले परिवारों की संख्या भी सबसे ज्यादा हो। मुंबई और दिल्ली-एनसीआर में उच्च आय वाले परिवारों की संख्या सबसे अधिक है। बेंगलुरु में औसत आय सबसे ज्यादा होने के बावजूद उच्च आय वर्ग का हिस्सा छह महानगरों में सबसे कम है।
चंडीगढ़ प्रति परिवार खर्च में सबसे आगे
100 शहरों में परिवार अपनी आय का औसतन करीब 75 प्रतिशत खर्च करते हैं, जबकि छह बड़े महानगरों में यह हिस्सा करीब 58 प्रतिशत है। छह महानगरों में बेंगलुरु का सालाना घरेलू खर्च सबसे अधिक है। दिल्ली-एनसीआर में प्रति परिवार करीब 14.5 लाख रुपये सालाना खर्च होता है। दूसरी ओर, प्रति परिवार खर्च में चंडीगढ़ सबसे आगे है। वडोदरा और सूरत भी इस मामले में बेंगलुरु से आगे हैं।
दिल्ली-NCR सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार
दिल्ली-एनसीआर में करीब 75 लाख परिवार हैं। प्रति परिवार लगभग 15 लाख रुपये के सालाना खर्च के साथ यह देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है। अध्ययन के अनुसार, शहरी परिवारों का खर्च अब रोजमर्रा की जरूरतों तक सीमित नहीं है। आवास, स्वास्थ्य, आवागमन और शिक्षा पर खर्च बढ़ रहा है। सुविधा, अनुभव और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी परिवार अधिक धन लगा रहे हैं।
चेन्नई में कर्ज ज्यादा
कर्ज के मामले में चेन्नई का ऋण-आय अनुपात 27.7 प्रतिशत है, जो छह बड़े महानगरों में सबसे अधिक है। यहां आवास और वाहन खरीद के लिए लिया गया कर्ज प्रमुख है। हैदराबाद और बेंगलुरु में यह अनुपात करीब 15 प्रतिशत है। अध्ययन के अनुसार, अधिक कर्ज को सीधे आर्थिक दबाव का संकेत नहीं माना जा सकता। कर्ज का उद्देश्य और परिवार की आय भी स्थिति समझने में महत्वपूर्ण हैं।













